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मौलाना रजवी बरेलवी: दशकों से बसे बांग्लादेशियों को सीएए के तहत मिले राहत, जबरन निष्कासन न हो

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मौलाना रजवी बरेलवी: दशकों से बसे बांग्लादेशियों को सीएए के तहत मिले राहत, जबरन निष्कासन न हो

सारांश

मुस्लिम समुदाय के एक प्रमुख धार्मिक नेता ने दशकों से भारत में बसे बांग्लादेशियों के लिए सीएए के तहत राहत की माँग की — यह बयान उस कानून के समर्थन में आया है जिसे लेकर मुस्लिम तबके में अब तक व्यापक विरोध रहा है। साथ ही केरल के 'वंदे मातरम' विवाद पर उन्होंने विकास को राजनीति से ऊपर रखने की अपील की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 मई 2026 को बरेली से दशकों से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों को सीएए के तहत राहत देने की माँग की।
1971 में बांग्लादेश निर्माण के दौरान और बाद में आए हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बसे हुए हैं।
मौलाना ने कहा — जो लोग समाज का हिस्सा बन चुके हैं, उन्हें जबरन निष्कासित न किया जाए।
केरल में 'वंदे मातरम' विवाद पर उन्होंने राजनीतिक दलों से विवाद छोड़कर जनकल्याण को प्राथमिकता देने की अपील की।
पश्चिम बंगाल के होल्डिंग सेंटरों के मुद्दे को उन्होंने राज्य का सबसे महत्वपूर्ण वर्तमान मुद्दा बताया।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 मई 2026 को बरेली से पश्चिम बंगाल में बनाए गए होल्डिंग सेंटरों (नजरबंदी केंद्रों) और केरल में 'वंदे मातरम' विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि जो बांग्लादेशी नागरिक दशकों से भारत में रहकर समाज का हिस्सा बन चुके हैं, उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत राहत दी जानी चाहिए।

पश्चिम बंगाल के होल्डिंग सेंटर और घुसपैठ का मुद्दा

मौलाना रजवी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों का मुद्दा इस समय राज्य का सबसे महत्वपूर्ण विषय है, जिसे नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह मसला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक आयाम भी रखता है।

उनके अनुसार, वर्ष 1971 में भारत के सहयोग से बांग्लादेश के गठन के दौरान और उसके बाद बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग बांग्लादेश से भारत आए। ये लोग असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों में जाकर बस गए।

सीएए के तहत राहत की माँग

मौलाना रजवी ने कहा कि इनमें से अधिकांश लोग शोषित और वंचित वर्गों से आते हैं, जिन्होंने पिछले कई दशकों में मेहनत-मजदूरी करके अपना जीवन यापन किया है। उनका स्पष्ट मत है कि ऐसे लोगों के प्रति भारत सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के दायरे में लाकर राहत प्रदान की जाए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग वर्षों से भारतीय समाज में घुल-मिल चुके हैं, उन्हें न तो देश से बाहर निकाला जाए और न ही जबरन वापस भेजने का कोई प्रयास किया जाए। गौरतलब है कि सीएए मुख्यतः पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता का रास्ता देता है — ऐसे में मुस्लिम समुदाय के एक प्रमुख धार्मिक नेता का यह बयान उल्लेखनीय है।

केरल में 'वंदे मातरम' विवाद पर प्रतिक्रिया

केरल में नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा में 'वंदे मातरम' गाने को लेकर उठे विवाद पर मौलाना रजवी ने कहा कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं — कुछ इसके समर्थन में हैं, कुछ विरोध में। उन्होंने किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करने से परहेज करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को विवादित मुद्दों की बजाय जनता की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विकास और जनकल्याण पर ध्यान देने की अपील

मौलाना ने कहा कि केरल की नई सरकार को एक ऐसा रोडमैप तैयार करना चाहिए जिससे राज्य की जनता को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें और समग्र विकास सुनिश्चित हो। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे विवादों में उलझने की बजाय जनकल्याण को अपना मुख्य एजेंडा बनाएँ।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब घुसपैठ और नागरिकता के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है और सीएए के क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न समुदायों में मतभेद बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इस कानून को लेकर मुस्लिम संगठनों में अब तक तीखा विरोध रहा है — यह एक असामान्य स्वर है जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है। हालाँकि, मौलाना की माँग में एक अंतर्विरोध भी है: सीएए मुख्यतः गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए है, जबकि वे मुस्लिम बांग्लादेशियों को भी इसके दायरे में लाने की बात कर रहे हैं — जो कानून की मौजूदा संरचना से मेल नहीं खाता। केरल के 'वंदे मातरम' विवाद पर उनकी तटस्थ अपील राजनीतिक रूप से सुरक्षित है, पर वह उस असली सवाल से बचती है कि एक धर्मनिरपेक्ष विधानसभा में राष्ट्रगान से अलग किसी गीत को अनिवार्य बनाना कितना उचित है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सीएए को लेकर क्या माँग की है?
मौलाना रजवी ने माँग की है कि दशकों से भारत में रहकर समाज का हिस्सा बन चुके बांग्लादेशी नागरिकों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत राहत दी जाए और उन्हें जबरन वापस न भेजा जाए। उनका कहना है कि ऐसे लोगों के प्रति भारत सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
पश्चिम बंगाल के होल्डिंग सेंटर क्या हैं और मौलाना का उन पर क्या रुख है?
पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को रखने के लिए होल्डिंग सेंटर (नजरबंदी केंद्र) बनाए गए हैं, जिन्हें नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी प्रमुखता से उठाते रहे हैं। मौलाना ने इसे राज्य का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
केरल में 'वंदे मातरम' विवाद क्या है?
केरल में नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा में 'वंदे मातरम' गाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा विवाद खड़ा हो गया है। कुछ दल इसके समर्थन में हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं।
मौलाना रजवी ने केरल की नई सरकार को क्या सलाह दी?
मौलाना ने केरल की नई सरकार से अपील की कि वह विवादित मुद्दों की बजाय राज्य के विकास और जनकल्याण पर ध्यान केंद्रित करे और एक ऐसा रोडमैप तैयार करे जिससे जनता को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात कौन सा संगठन है?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक राष्ट्रीय मुस्लिम धार्मिक संगठन है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी हैं। यह संगठन धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर समय-समय पर अपनी राय सार्वजनिक करता है।
राष्ट्र प्रेस
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