18 अगस्त 2026
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असम सरकार के वेतन-कटौती फैसलों पर मौलाना साजिद कासमी बोले — 'स्वागतयोग्य और सराहनीय कदम'

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असम सरकार के वेतन-कटौती फैसलों पर मौलाना साजिद कासमी बोले — 'स्वागतयोग्य और सराहनीय कदम'

सारांश

असम सरकार के दो नए नियम — माता-पिता की देखभाल न करने पर 10% और बिना तलाक दूसरी शादी पर 20% वेतन कटौती — को जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष मौलाना साजिद कासमी ने 'बहुत अच्छा कदम' बताया है। उनके समर्थन ने इन फैसलों को व्यापक सामाजिक स्वीकृति का संकेत दिया है।

मुख्य बातें

असम सरकार ने नियम लागू किया कि माता-पिता की देखभाल न करने वाले सरकारी कर्मचारियों के वेतन से 10 प्रतिशत राशि सीधे माता-पिता के खाते में भेजी जाएगी।
पहली पत्नी को कानूनी तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने पर कर्मचारी के वेतन से 20 प्रतिशत की कटौती का प्रावधान किया गया है।
जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने दोनों फैसलों को 'स्वागतयोग्य और सराहनीय' बताया।
मौलाना ने वृद्धाश्रम में छोड़े जाने वाले बुजुर्गों की समस्या को 'बेअदबी' करार देते हुए इस नियम की ज़रूरत पर बल दिया।
मौलाना के अनुसार ये दोनों कदम बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा देने और विवाह संस्था की मर्यादा बचाने में सहायक होंगे।

जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने असम सरकार के दो महत्वपूर्ण फैसलों का खुलकर समर्थन किया है — पहला, माता-पिता की देखभाल न करने वाले सरकारी कर्मचारियों के वेतन से 10 प्रतिशत कटौती का नियम, और दूसरा, पहली पत्नी को कानूनी तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने पर 20 प्रतिशत वेतन काटने का प्रावधान। शामली से बोलते हुए मौलाना ने कहा कि ये दोनों कदम समाज में पारिवारिक मूल्यों की रक्षा के लिए ज़रूरी हैं।

माता-पिता की देखभाल पर वेतन-कटौती नियम

असम सरकार ने नियम लागू किया है कि जो सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से 10 प्रतिशत राशि सीधे उनके माता-पिता के बैंक खाते में भेजी जाएगी। मौलाना साजिद कासमी ने इस फैसले पर कहा, 'मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा कदम है। अब तक हमने देखा है कि कई लोग अपने माता-पिता को बुढ़ापे में वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं। उनके पास कोई रिश्तेदार या वारिस नहीं बचता। जब आखिरी वक्त आता है तो अंतिम संस्कार में भी बच्चे ज़्यादातर शरीक नहीं होते। यह बेअदबी का मामला है।'

उनका मानना है कि इस प्रावधान से बुजुर्ग माता-पिता को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उनकी उपेक्षा की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। गौरतलब है कि बुजुर्गों की देखभाल को लेकर भारत में कानूनी ढाँचा पहले से मौजूद है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के वेतन से सीधी कटौती का यह प्रावधान अपनी तरह का विशेष कदम माना जा रहा है।

बिना तलाक दूसरी शादी पर वेतन-कटौती का प्रावधान

असम सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जो सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी को कानूनी रूप से तलाक दिए बिना दूसरी शादी करेंगे, उनके वेतन से 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। मौलाना कासमी ने इस संदर्भ में कहा, 'सनातन धर्म में, अगर कोई पहले से शादीशुदा है, तो दूसरी शादी का कोई प्रावधान नहीं है।' उन्होंने मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, 'अगर फिर भी कोई शादी करता है तो मुख्यमंत्री का यह कदम बहुत अच्छा है।'

पारिवारिक मूल्यों की रक्षा पर ज़ोर

मौलाना साजिद कासमी ने व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में कहा कि समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा और पारिवारिक मूल्यों का ह्रास एक गंभीर समस्या बन चुकी है। उनके अनुसार, असम सरकार के ये दोनों फैसले इस दिशा में ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप हैं — एक जो बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा देता है, और दूसरा जो विवाह संस्था की मर्यादा को कानूनी बल प्रदान करता है।

आगे क्या

असम सरकार के इन दोनों प्रावधानों के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा अभी सामने आनी बाकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नियमों को व्यवहार में किस प्रकार लागू किया जाता है और अन्य राज्य इससे क्या सबक लेते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनके क्रियान्वयन की व्यावहारिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है — खासकर जब माता-पिता की 'देखभाल न करने' की परिभाषा और सत्यापन तंत्र अभी स्पष्ट नहीं हैं। मौलाना कासमी जैसे धार्मिक नेता का समर्थन इन नियमों को सामाजिक वैधता देता है, जो आमतौर पर विवादास्पद हो सकते थे। यह उल्लेखनीय है कि पारिवारिक मूल्यों की रक्षा के नाम पर राज्य का वेतन में सीधा हस्तक्षेप एक नई नज़ीर स्थापित करता है, जिसे अन्य राज्य भी अपना सकते हैं।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार का माता-पिता की देखभाल से जुड़ा वेतन-कटौती नियम क्या है?
असम सरकार ने नियम लागू किया है कि जो सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से 10 प्रतिशत राशि काटकर सीधे माता-पिता के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उनकी उपेक्षा रोकना है।
असम में बिना तलाक दूसरी शादी पर वेतन कटौती का क्या प्रावधान है?
असम सरकार के अनुसार, जो सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी को कानूनी रूप से तलाक दिए बिना दूसरी शादी करेंगे, उनके वेतन से 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। यह नियम विवाह संस्था की कानूनी मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है।
मौलाना साजिद कासमी ने असम सरकार के फैसलों पर क्या कहा?
जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने दोनों फैसलों को 'बहुत अच्छा कदम' और 'स्वागतयोग्य' बताया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ना 'बेअदबी' है और ऐसे नियम समाज में पारिवारिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करेंगे।
इन फैसलों से किसे फायदा होगा?
माता-पिता की देखभाल वाले नियम से सीधे तौर पर वे बुजुर्ग लाभान्वित होंगे जिनके सरकारी कर्मचारी बच्चे उनकी उपेक्षा करते हैं। दूसरे नियम से पहली पत्नी के कानूनी अधिकारों की रक्षा होगी।
क्या अन्य राज्यों में भी ऐसे नियम हैं?
भारत में बुजुर्गों की देखभाल के लिए 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007' पहले से लागू है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के वेतन से सीधी कटौती का यह प्रावधान असम का विशेष कदम है। अन्य राज्यों में इस तरह का प्रत्यक्ष वेतन-कटौती तंत्र अभी व्यापक रूप से लागू नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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