18 अगस्त 2026
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विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार का असम सरकार को समर्थन: माता-पिता की उपेक्षा और दूसरी शादी पर वेतन कटौती नीति सही

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विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार का असम सरकार को समर्थन: माता-पिता की उपेक्षा और दूसरी शादी पर वेतन कटौती नीति सही

सारांश

विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने असम सरकार की उस नीति का समर्थन किया जिसमें माता-पिता की उपेक्षा पर 10% और बिना तलाक दूसरी शादी पर 20% वेतन कटौती का प्रस्ताव है। साथ ही उन्होंने गोवा अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा 'वंदे मातरम' के केवल दो अंतरे गाने पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने 18 अगस्त को असम सरकार की वेतन कटौती नीति का खुलकर समर्थन किया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रस्ताव के तहत माता-पिता की उपेक्षा पर 10% और बिना कानूनी तलाक दूसरी शादी पर 20% वेतन कटौती का प्रावधान है।
आलोक कुमार ने बहुविवाह और बिना अदालत तलाक की प्रथाओं को सामाजिक रूप से अस्वीकार्य बताया।
गोवा कांग्रेस अधिवेशन में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो अंतरे गाए जाने पर विहिप ने कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाया।
असम की वेतन कटौती नीति का विधिक क्रियान्वयन ढाँचा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने मंगलवार, 18 अगस्त को असम सरकार की उस प्रस्तावित नीति का खुलकर समर्थन किया, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कटौती का प्रावधान किया जाना है — पहला, वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा करने पर, और दूसरा, पहली पत्नी के जीवित रहते बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करने पर। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कुमार ने इसे नैतिक और सामाजिक दायित्व की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया।

असम सरकार की नीति का ब्यौरा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की उपेक्षा करता है, तो उसके वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा काटा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने पर वेतन में 20 प्रतिशत तक की कटौती का प्रावधान प्रस्तावित है। यह नीति अभी विचाराधीन बताई जा रही है और इसके क्रियान्वयन का विस्तृत ढाँचा सामने नहीं आया है।

विहिप अध्यक्ष का पक्ष

आलोक कुमार ने कहा, 'मैं इन दोनों कदमों का स्वागत करता हूँ क्योंकि अपने माता-पिता की देखभाल करना न केवल कानूनी दायित्व है, बल्कि एक नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है। अगर कोई इस कर्तव्य को पूरा करने में विफल रहता है, तो समाज को उन्हें दंडित करना चाहिए और सरकार को भी इसे सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने चाहिए।'

बहुविवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'लैंगिक समानता के इस दौर में दो पत्नियाँ रखना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। आज पूरी दुनिया एक पति और एक पत्नी के सिद्धांत का सम्मान करती है।' कुमार ने यह भी कहा कि बिना अदालत की शरण लिए केवल तीन बार तलाक कहकर विवाह समाप्त करने जैसी प्रथाएँ सामाजिक रूप से अस्वीकार्य हैं और इनके विरुद्ध संघर्ष किया जाना चाहिए।

वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस पर निशाना

गोवा में आयोजित कांग्रेस के एक अधिवेशन में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो अंतरे गाए जाने के मुद्दे पर आलोक कुमार ने कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'यह कांग्रेस की मानसिकता है। अल्पसंख्यकों को खुश करने के प्रयास में पार्टी अक्सर सभी सीमाएँ पार कर जाती है।'

कुमार ने तर्क दिया कि संपूर्ण 'वंदे मातरम' भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रेरणा का स्रोत रहा है और इसके शेष अंतरे भी उसी राष्ट्रभक्ति की भावना को व्यक्त करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर पूरे गीत पर किसी को आपत्ति नहीं है, तो उसे पूरा गाने में क्या दिक्कत है?' उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अन्य नेताओं के उस बयान का हवाला भी दिया जिसमें उन्होंने सफाई दी थी कि वे पूरा गीत गाते हैं।

कांग्रेस का पक्ष और घटनाक्रम

गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी पर 'वंदे मातरम' का गायन बीच में रुकवाने की कोशिश के आरोप लगे थे। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को गोवा में राष्ट्रीय गीत गाया, हालाँकि गोवा अधिवेशन की शुरुआत में खड़गे और अन्य नेताओं ने 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो अंतरे ही गाए। आलोक कुमार ने इसे 'राष्ट्र का अपमान' और 'कानून की भावना के विरुद्ध' करार दिया।

आगे क्या

असम सरकार की वेतन कटौती नीति का विधिक ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है और यह देखना होगा कि इसे किस रूप में लागू किया जाता है। विहिप के इस समर्थन से इस नीति को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बहस का केंद्र बनने की संभावना है। आलोचक यह भी सवाल उठा सकते हैं कि माता-पिता की 'उपेक्षा' की परिभाषा कैसे तय होगी और इसकी जाँच का तंत्र क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके क्रियान्वयन में गंभीर व्यावहारिक प्रश्न हैं — 'माता-पिता की उपेक्षा' को कौन, कैसे और किस मानक पर परिभाषित करेगा? वेतन कटौती जैसे दंड तब तक न्यायसंगत नहीं हो सकते जब तक स्वतंत्र सत्यापन तंत्र न हो। विहिप का समर्थन इस नीति को हिंदू सामाजिक एजेंडे से जोड़ता है, जबकि विपक्ष इसे चुनिंदा धर्म-लक्षित नीति के रूप में पढ़ सकता है। 'वंदे मातरम' विवाद एक पुरानी राजनीतिक लकीर है — असली सवाल यह है कि क्या इन दोनों मुद्दों को एक साथ उठाना किसी व्यापक राजनीतिक कथा को आकार देने की कोशिश है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार की वेतन कटौती नीति क्या है?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रस्ताव के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों के वेतन का 10 प्रतिशत माता-पिता की उपेक्षा करने पर और 20 प्रतिशत पहली पत्नी के जीवित रहते बिना कानूनी तलाक दूसरी शादी करने पर काटा जा सकता है। यह नीति अभी प्रस्तावित अवस्था में है और इसका विधिक ढाँचा सार्वजनिक नहीं हुआ है।
विहिप ने इस नीति का समर्थन क्यों किया?
विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार, माता-पिता की देखभाल एक नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दायित्व है और सरकार को इसे सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए। बहुविवाह को उन्होंने लैंगिक समानता के विरुद्ध बताते हुए इसे सामाजिक रूप से अस्वीकार्य करार दिया।
वंदे मातरम विवाद क्या है और कांग्रेस पर क्या आरोप लगे?
गोवा में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में नेताओं ने 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो अंतरे गाए। इस पर विहिप ने कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाया। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में सोनिया गांधी पर गायन रोकने की कोशिश के आरोप भी लगे थे, जिन्हें कांग्रेस ने खारिज किया।
क्या यह नीति सभी धर्मों के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगी?
असम सरकार ने अब तक इस नीति का विस्तृत दायरा सार्वजनिक नहीं किया है। आलोचकों का कहना है कि बहुविवाह से संबंधित प्रावधान का असर मुख्यतः मुस्लिम समुदाय पर पड़ सकता है, जहाँ कुछ शर्तों के तहत एक से अधिक विवाह की अनुमति है। नीति के क्रियान्वयन का ढाँचा स्पष्ट होने के बाद ही इसकी व्यापकता का आकलन संभव होगा।
माता-पिता की उपेक्षा को कैसे परिभाषित और सत्यापित किया जाएगा?
असम सरकार ने अभी तक 'माता-पिता की उपेक्षा' की कानूनी परिभाषा और सत्यापन तंत्र का खुलासा नहीं किया है। यह नीति का सबसे विवादास्पद पहलू है — विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्पष्ट मानकों के ऐसे प्रावधान मनमाने ढंग से लागू हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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