20 सितंबर 2026
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मायावती का बड़ा फैसला: आकाश आनंद और बहन पार्टी जिम्मेदारी से बाहर, ईशान आनंद को मिलेगी बसपा में भूमिका

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मायावती का बड़ा फैसला: आकाश आनंद और बहन पार्टी जिम्मेदारी से बाहर, ईशान आनंद को मिलेगी बसपा में भूमिका

सारांश

मायावती ने परिवारवाद पर एक और बड़ा दांव खेला — आकाश आनंद और बहन के बाद अब ईशान आनंद को मौका, लेकिन शर्त के साथ। बसपा संस्थापक कांशीराम और बाबा साहेब आंबेडकर के उदाहरण देकर उन्होंने साफ किया कि बहुजन मिशन से बड़ा कोई रिश्ता नहीं।

मुख्य बातें

मायावती ने 20 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर घोषणा की कि आकाश आनंद और उनकी बहन को बसपा की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक भूमिका दी जाएगी।
मायावती ने चेतावनी दी कि यदि ईशान आनंद ने भी पार्टी विरोधी कृत्य किया, तो उन्हें भी बाहर किया जाएगा और परिवार के किसी अन्य सदस्य को जगह नहीं मिलेगी।
भीमराव आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के पत्र का हवाला देकर मायावती ने अपने फैसले को वैचारिक आधार दिया।
पार्टी की अखिल भारतीय बैठक 23 सितंबर 2026 को बुलाई गई है।
आकाश आनंद को ससुर अशोक सिद्धार्थ से कथित जुड़ाव के कारण पार्टी से अलग किया गया था।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 20 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि उनके भतीजे आकाश आनंद और उनकी बहन को अब पार्टी की कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, और उनके स्थान पर आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक भूमिका दी जाएगी। यह घोषणा उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से की, जिसमें परिवारवाद पर उनके कड़े रुख को एक बार फिर रेखांकित किया गया।

मायावती का सख्त संदेश

मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि यदि राजनीति में सफल होना है और समाज के लिए कुछ करना है, तो भाई-बहनों व नज़दीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करना होगा। उन्होंने बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद कभी भी अपने नज़दीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया और अपनी पूरी जिंदगी बहुजन समाज के हित में समर्पित कर दी।

मायावती ने यह भी कहा कि महिला होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने भाई-बहनों को साथ रखना पड़ा, जिसके तहत उनके छोटे भाई आनंद कुमार लंबे समय से उनकी सेवा में कार्यरत हैं।

आकाश आनंद को क्यों हटाया गया

मायावती ने बताया कि आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे किया गया था। किंतु विवाह के बाद आकाश आनंद के रवैये और गतिविधियों के कारण उन्हें कुछ दिन पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।

मायावती ने कहा, 'अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद को पार्टी में वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता।

ईशान आनंद को मौका, पर शर्त के साथ

मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि आनंद कुमार की बेटी को लेकर यह आशंका थी कि शादी के बाद उनका मामला भी आकाश आनंद जैसा हो सकता है, इसलिए उन्हें भी पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का निर्णय लिया गया।

साथ ही मायावती ने चेतावनी दी कि यदि ईशान आनंद ने भी भविष्य में कोई पार्टी विरोधी गंभीर कृत्य किया, तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी — बल्कि पार्टी के किसी मिशनरी और वफादार दलित कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

आंबेडकर के पत्र का संदर्भ

मायावती ने अपने फैसले के समर्थन में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से आंबेडकर ने अपने पुत्र यशवंत बी. आंबेडकर को पत्र लिखकर बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कामकाज में कथित अनियमितता पर चेतावनी दी थी।

उस पत्र में आंबेडकर ने स्पष्ट किया था कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है, न कि उनकी या उनके पुत्र की निजी संपत्ति। उन्होंने बेटे को अंतिम निर्देश की अवहेलना पर प्रेस से बाहर करने और ज़रूरत पड़ने पर मुकदमा चलाने तक की चेतावनी दी थी। मायावती ने इस ऐतिहासिक उदाहरण को अपने निर्णय की वैचारिक नींव के रूप में प्रस्तुत किया।

23 सितंबर को अखिल भारतीय बैठक

बसपा प्रमुख ने घोषणा की कि 23 सितंबर 2026 को पार्टी की अखिल भारतीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें देश और जनहित के जरूरी मुद्दों के साथ इस विशेष मुद्दे पर भी विचार किया जाएगा। मायावती ने अंत में कहा कि समस्त बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है और बहुजन समाज को 'शोषित से शासक वर्ग' बनाना उनका मिशनरी लक्ष्य है — इसके लिए वह अपने भाई-बहनों के खिलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बसपा की घटती चुनावी प्रासंगिकता के बीच संगठन को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। आकाश आनंद को उत्तराधिकारी के रूप में पेश करने का प्रयोग विफल रहा — यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना राजनीतिक साहस की बात है, परंतु यह सवाल भी उठाता है कि क्या बसपा के पास वास्तव में कोई दूसरी पीढ़ी का नेतृत्व तैयार है। कांशीराम और आंबेडकर के उदाहरण देकर फैसले को वैचारिक वैधता देना प्रभावी है, लेकिन पार्टी की ज़मीनी ताकत तभी लौटेगी जब सांगठनिक ढाँचा पारिवारिक नहीं, मिशनरी आधार पर खड़ा होगा — और यही सबसे बड़ी परीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से क्यों हटाया?
मायावती के अनुसार, विवाह के बाद आकाश आनंद के रवैये और गतिविधियों में बदलाव आया और वह अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ से कथित तौर पर प्रभावित हो गए। इसे पार्टी हित के विरुद्ध मानते हुए मायावती ने उन्हें बसपा की जिम्मेदारी से अलग करने का फैसला किया।
ईशान आनंद कौन हैं और उन्हें बसपा में क्यों मौका दिया जा रहा है?
ईशान आनंद, मायावती के भाई आनंद कुमार के परिवार के सदस्य हैं। मायावती ने बताया कि आकाश आनंद और उनकी बहन को हटाने के बाद, परिवार में से ईशान आनंद ऐसे सदस्य लगे जो पार्टी हित में काम कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने पार्टी विरोधी कृत्य किया, तो उन्हें भी बाहर किया जाएगा।
बसपा की 23 सितंबर की अखिल भारतीय बैठक में क्या होगा?
मायावती ने 23 सितंबर 2026 को बसपा की अखिल भारतीय बैठक बुलाई है, जिसमें देश और जनहित के मुद्दों के साथ पार्टी के संगठनात्मक भविष्य और उत्तराधिकार के इस विशेष मुद्दे पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं को पुनः संगठन कार्यों में सक्रिय करना है।
मायावती ने आंबेडकर के किस पत्र का हवाला दिया?
मायावती ने 23 फरवरी 1956 को नई दिल्ली से डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा अपने पुत्र यशवंत बी. आंबेडकर को लिखे पत्र का हवाला दिया। उस पत्र में आंबेडकर ने बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को सार्वजनिक संपत्ति घोषित करते हुए अपने पुत्र को कथित अनियमितता पर कड़ी चेतावनी दी थी।
क्या मायावती का यह फैसला बसपा की परिवारवाद विरोधी नीति का हिस्सा है?
हाँ, मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम की परंपरा का हवाला देते हुए परिवारवाद का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने कभी अपने नज़दीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया और वह भी उन्हीं पदचिह्नों पर चलने का प्रयास कर रही हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने भाई-बहनों के खिलाफ फैसले लेने पड़ें।
राष्ट्र प्रेस
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