डॉ. मेधा कुलकर्णी बनीं विज्ञान-पर्यावरण संसदीय समिति की अध्यक्ष, राज्यसभा सचिवालय ने जारी किया आदेश
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सदस्य डॉ. मेधा कुलकर्णी को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन से संबंधित विभागीय संसदीय स्थायी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा मंगलवार, 19 मई को जारी आधिकारिक पत्र में इस नियुक्ति की पुष्टि की गई, जो सोमवार से ही प्रभावी मानी जाएगी।
नियुक्ति का आधिकारिक आदेश
राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव राकेश नैथानी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, डॉ. कुलकर्णी को राज्यसभा के कार्य संचालन नियम 269 के तहत इस समिति का सदस्य भी नामित किया गया है। राज्यसभा के सभापति ने उनके नाम पर सहमति देते हुए उन्हें समिति का अध्यक्ष घोषित किया। पत्र के साथ समिति के सदस्यों की सूची और कामकाज से जुड़ा पृष्ठभूमि नोट भी संलग्न किया गया है।
समिति की भूमिका और महत्व
यह संसदीय स्थायी समिति देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े नीतिगत मुद्दों, कानूनों और सरकारी योजनाओं की गहन समीक्षा करती है। समिति केंद्र सरकार को आवश्यक सुझाव देने का भी अधिकार रखती है, जिससे यह विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनती है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण नीति जैसे विषयों पर वैश्विक दबाव के बीच इस समिति की सक्रियता और भी अहम हो जाती है।
डॉ. मेधा कुलकर्णी: परिचय और राजनीतिक पृष्ठभूमि
डॉ. मेधा कुलकर्णी महाराष्ट्र भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती हैं और पुणे से विधायक भी रह चुकी हैं। शिक्षा, सामाजिक कार्य और राजनीति में दशकों से सक्रिय रहने वाली डॉ. कुलकर्णी ने इस नई जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा कि इससे उन्हें देश में वैज्ञानिक प्रगति, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी चुनौतियों पर नीति स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा, 'आज के समय में विज्ञान और पर्यावरण दोनों ही देश के विकास के लिए बेहद अहम विषय हैं। इस समिति के माध्यम से देशहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा और सकारात्मक सुझाव देने की दिशा में काम किया जाएगा।'
महाराष्ट्र BJP के लिए उपलब्धि
डॉ. कुलकर्णी की इस नियुक्ति को महाराष्ट्र BJP के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं और समर्थकों ने उन्हें बधाई देते हुए इस जिम्मेदारी को राज्य के लिए गर्व का विषय बताया है। गौरतलब है कि यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं और घरेलू पर्यावरण नीति दोनों मोर्चों पर बड़े फैसलों की दहलीज पर खड़ा है।
आगे की राह
नई अध्यक्ष के रूप में डॉ. कुलकर्णी के समक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े अनुदान मांगों की जाँच, नीतिगत प्रस्तावों की समीक्षा और विशेषज्ञों से परामर्श जैसी प्रमुख जिम्मेदारियाँ होंगी। समिति की पहली बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन संसद सत्र के दौरान यह शीघ्र ही आयोजित होने की संभावना है।