क्या अमेरिका मध्य-पूर्व के युद्ध में फंसता जा रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका और इजरायल का ईरान पर सैन्य हमला ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बना रहा है।
- 94.1%25 उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति में दुविधा है।
- शरणार्थियों की संख्या 2 करोड़ 50 लाख तक पहुँच गई है।
- अमेरिका का असली उद्देश्य डॉलर का प्रभुत्व बनाए रखना है।
- अत्यधिक सैन्य खर्च से आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ रहा है।
बीजिंग, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे सैन्य हमले अब ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं को लक्ष्य बना रहे हैं, जिससे यह संघर्ष एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। अमेरिका धीरे-धीरे इस युद्ध के दलदल में फंसता नजर आ रहा है। चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अंतर्गत सीजीटीएन द्वारा किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण में यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आई।
सर्वेक्षण के अनुसार, 94.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति में गहरी संरचनात्मक दुविधा दिखाई दे रही है, क्योंकि युद्ध का उद्देश्य अस्पष्ट है और संसाधन तथा समय दोनों सीमित हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी प्रभुत्व की पारंपरिक शैली अब तेजी से कमजोर पड़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मध्य-पूर्व संकट के कारण शरणार्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 2 करोड़ 50 लाख तक पहुंच गई है। ईरान में बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है, जबकि लेबनान में लगभग 8 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति अब एक गंभीर मानवीय आपातकाल में बदल चुकी है।
सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 90.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अमेरिका की "राज्य आतंकवाद" संबंधी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की। वहीं, 93.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मत है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों में न तो वैधता है और न ही कोई कानूनी औचित्य। इसके अतिरिक्त, 89.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका का असली उद्देश्य डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को बनाए रखना और ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना है।
इसके साथ ही, 75.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मत है कि अत्यधिक सैन्य खर्च से अमेरिका की आर्थिक मंदी और भी गहरी हो जाएगी, जबकि 90.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिका एक बार फिर मध्य-पूर्व के युद्ध दलदल में फंस गया है, जिससे उसके भीतर राजनीतिक और आर्थिक असंतुलन स्पष्ट हो रहा है।
सीजीटीएन का यह अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रांसीसी, अरबी और रूसी भाषा प्लेटफार्मों पर एक साथ जारी किया गया था। मात्र 24 घंटों में 18,906 विदेशी नेटीजनों ने इसमें भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)