17 अगस्त 2026
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जरदारी के 'हिंदुओं को बर्दाश्त' वाले बयान पर मीर यार बलूच का तीखा हमला, पाक राष्ट्रपति को बताया विभाजनकारी

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जरदारी के 'हिंदुओं को बर्दाश्त' वाले बयान पर मीर यार बलूच का तीखा हमला, पाक राष्ट्रपति को बताया विभाजनकारी

सारांश

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी का 'हिंदुओं को बर्दाश्त करते हैं' वाला बयान अब बड़े विवाद में है। बलूच कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने इसे सैन्य जनरलों का लिखाया हुआ 'जहरीला' कथन बताया और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक दमन के इतिहास को सामने रखा।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 14 अगस्त के भाषण में कथित तौर पर कहा कि पाकिस्तान हिंदुओं को 'बर्दाश्त' करता है, जो देश की आबादी का 3-4 प्रतिशत हैं।
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने एक्स पर इस बयान को 'जहरीला और विभाजनकारी' करार दिया।
मीर ने आरोप लगाया कि यह भाषण पाकिस्तानी सैन्य जनरलों ने लिखा और जरदारी से पढ़वाया।
कार्यकर्ता ने 1947 के बाद से अल्पसंख्यकों पर धर्म परिवर्तन के दबाव, रोज़गार पर रोक और धार्मिक स्वतंत्रता में बाधाओं का इतिहास सामने रखा।
1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो सरकार के दौरान बलूच इलाकों में सैन्य अभियान और बांग्लादेशी बंगालियों पर दमन का भी उल्लेख किया गया।

बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के 14 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस भाषण की कड़ी निंदा की है, जिसमें जरदारी ने कथित तौर पर कहा कि पाकिस्तान की मुस्लिम-बहुल आबादी देश के हिंदू अल्पसंख्यकों — जो कुल आबादी का लगभग 3-4 प्रतिशत हैं — को 'बर्दाश्त' करती है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और तीखी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर रहा है।

मीर यार बलूच का आरोप

मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जरदारी का यह बयान एक 'जहरीला और विभाजनकारी' कथन है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाषण पाकिस्तानी सैन्य जनरलों द्वारा तैयार किया गया था और जरदारी को उनके 'राजनीतिक मोहरे' के रूप में इसे पढ़वाया गया। बलूच कार्यकर्ता के अनुसार, 'बर्दाश्त' जैसा शब्द पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति को ढकने का प्रयास है।

अल्पसंख्यकों पर ऐतिहासिक दमन का संदर्भ

मीर यार बलूच ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान में रह गए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को धार्मिक कट्टरता और उग्रवाद का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, इन समुदायों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, व्यापार और रोज़गार के अवसरों पर रोक, तथा धार्मिक परंपराओं को स्वतंत्र रूप से निभाने में बाधाएँ डालने की घटनाएँ दर्ज हैं।

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, सम्मान और सुरक्षा के लिए बहुत कम काम किया है। धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, व्यापार और रोज़गार पर रोक और धार्मिक परंपराओं में बाधाएँ — ये सब पाकिस्तान के काले इतिहास का हिस्सा रही हैं।'

जरदारी और भुट्टो शासन पर सीधा निशाना

मीर यार बलूच ने जरदारी पर ऐतिहासिक विरोधाभास उजागर करते हुए कहा कि जरदारी 'पंजाबी जनरलों द्वारा दिए गए राष्ट्रपति पद' पर बैठे हैं और वे शायद भूल गए हैं कि उनके ससुर, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के शासन में लाखों बांग्लादेशी बंगालियों पर किस तरह का बर्बर सैन्य दमन हुआ था।

उन्होंने कहा, 'लाखों बंगालियों की हत्या की गई और बड़ी संख्या में बंगाली महिलाओं के साथ यौन हिंसा की गई। पाकिस्तान मुसलमानों को भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, फिर हिंदुओं को बर्दाश्त करने की बात तो बहुत दूर है।'

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा

मीर यार बलूच ने 1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो सरकार के दौरान बलूच इलाकों में शुरू किए गए सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर हज़ारों बलूच मारे गए और बड़ी संख्या में लोगों को 'गायब' कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जरदारी की पार्टी ने बांग्लादेशी बंगालियों के नरसंहार के दौरान भी सैन्य प्रतिष्ठान को खुश करने के लिए राजनीतिक भूमिका निभाई।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले से सवाल उठाए जा रहे हैं। मीर यार बलूच जैसे कार्यकर्ताओं की आवाज़ें पाकिस्तानी राज्य की आधिकारिक कथाओं को सीधे चुनौती देती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भीतर से उठती चीख है। यह विवाद दर्शाता है कि पाकिस्तान में 'सहिष्णुता' का दावा और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को आधिकारिक भाषणों से नहीं पाटा जा सकता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह एक और संकेत है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों की स्थिति पर निगरानी और बढ़ानी होगी।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जरदारी ने अपने भाषण में हिंदुओं के बारे में क्या कहा था?
कथित तौर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 14 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस भाषण में कहा कि पाकिस्तान की मुस्लिम-बहुल आबादी देश के हिंदू अल्पसंख्यकों को 'बर्दाश्त' करती है, जो कुल आबादी का लगभग 3-4 प्रतिशत हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ।
मीर यार बलूच कौन हैं और उन्होंने क्या आरोप लगाए?
मीर यार बलूच एक प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्होंने एक्स पर जरदारी के बयान को 'जहरीला और विभाजनकारी' बताया और आरोप लगाया कि यह भाषण पाकिस्तानी सैन्य जनरलों ने लिखा था और जरदारी को उनके राजनीतिक मोहरे के रूप में पढ़वाया गया।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर मीर यार बलूच ने क्या कहा?
मीर यार बलूच के अनुसार, 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान में रहे हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और अन्य अल्पसंख्यकों को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, रोज़गार पर रोक और धार्मिक स्वतंत्रता में बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे पाकिस्तान के 'काले इतिहास का हिस्सा' बताया।
मीर यार बलूच ने जुल्फिकार अली भुट्टो का ज़िक्र क्यों किया?
मीर यार बलूच ने जरदारी पर ऐतिहासिक विरोधाभास उजागर करने के लिए उनके ससुर जुल्फिकार अली भुट्टो के शासनकाल का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर लाखों बांग्लादेशी बंगालियों पर बर्बर सैन्य दमन हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि 1973 में भुट्टो सरकार के दौरान बलूच इलाकों में सैन्य अभियान में हज़ारों बलूच मारे गए।
यह विवाद पाकिस्तान की अल्पसंख्यक नीति के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले से सवाल उठाए जा रहे हैं। जरदारी जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति का 'बर्दाश्त' जैसा शब्द प्रयोग पाकिस्तान की आधिकारिक सहिष्णुता की कथा और ज़मीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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