जरदारी के 'हिंदुओं को बर्दाश्त' वाले बयान पर मीर यार बलूच का तीखा हमला, पाक राष्ट्रपति को बताया विभाजनकारी
सारांश
मुख्य बातें
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के 14 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस भाषण की कड़ी निंदा की है, जिसमें जरदारी ने कथित तौर पर कहा कि पाकिस्तान की मुस्लिम-बहुल आबादी देश के हिंदू अल्पसंख्यकों — जो कुल आबादी का लगभग 3-4 प्रतिशत हैं — को 'बर्दाश्त' करती है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और तीखी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर रहा है।
मीर यार बलूच का आरोप
मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जरदारी का यह बयान एक 'जहरीला और विभाजनकारी' कथन है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाषण पाकिस्तानी सैन्य जनरलों द्वारा तैयार किया गया था और जरदारी को उनके 'राजनीतिक मोहरे' के रूप में इसे पढ़वाया गया। बलूच कार्यकर्ता के अनुसार, 'बर्दाश्त' जैसा शब्द पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति को ढकने का प्रयास है।
अल्पसंख्यकों पर ऐतिहासिक दमन का संदर्भ
मीर यार बलूच ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान में रह गए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को धार्मिक कट्टरता और उग्रवाद का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, इन समुदायों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, व्यापार और रोज़गार के अवसरों पर रोक, तथा धार्मिक परंपराओं को स्वतंत्र रूप से निभाने में बाधाएँ डालने की घटनाएँ दर्ज हैं।
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, सम्मान और सुरक्षा के लिए बहुत कम काम किया है। धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, व्यापार और रोज़गार पर रोक और धार्मिक परंपराओं में बाधाएँ — ये सब पाकिस्तान के काले इतिहास का हिस्सा रही हैं।'
जरदारी और भुट्टो शासन पर सीधा निशाना
मीर यार बलूच ने जरदारी पर ऐतिहासिक विरोधाभास उजागर करते हुए कहा कि जरदारी 'पंजाबी जनरलों द्वारा दिए गए राष्ट्रपति पद' पर बैठे हैं और वे शायद भूल गए हैं कि उनके ससुर, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के शासन में लाखों बांग्लादेशी बंगालियों पर किस तरह का बर्बर सैन्य दमन हुआ था।
उन्होंने कहा, 'लाखों बंगालियों की हत्या की गई और बड़ी संख्या में बंगाली महिलाओं के साथ यौन हिंसा की गई। पाकिस्तान मुसलमानों को भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, फिर हिंदुओं को बर्दाश्त करने की बात तो बहुत दूर है।'
बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा
मीर यार बलूच ने 1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो सरकार के दौरान बलूच इलाकों में शुरू किए गए सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर हज़ारों बलूच मारे गए और बड़ी संख्या में लोगों को 'गायब' कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जरदारी की पार्टी ने बांग्लादेशी बंगालियों के नरसंहार के दौरान भी सैन्य प्रतिष्ठान को खुश करने के लिए राजनीतिक भूमिका निभाई।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले से सवाल उठाए जा रहे हैं। मीर यार बलूच जैसे कार्यकर्ताओं की आवाज़ें पाकिस्तानी राज्य की आधिकारिक कथाओं को सीधे चुनौती देती हैं।