मिजोरम राज्यपाल वीके सिंह और असम राइफल्स के आईजी भिंडर की बैठक, सुरक्षा-विकास और भर्ती रैली पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने 30 सितंबर 2026 को आइजोल में असम राइफल्स (पूर्व) के महानिरीक्षक मेजर जनरल इंदरजीत सिंह भिंडर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में मिजोरम में सुरक्षा और विकास संबंधी पहलों के साथ-साथ आगामी भर्ती रैली पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुआ
असम राइफल्स के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी पोस्ट के अनुसार, मेजर जनरल भिंडर ने राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट की और मिजोरम में बल की तैनाती, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति तथा विकास कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया। राज्यपाल ने मिजोरम में असम राइफल्स के योगदान और प्रयासों की सराहना की।
सीमा सुरक्षा की चुनौतियाँ
असम राइफल्स वर्तमान में भारत-म्यांमार की 510 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा की मिजोरम की ओर से निगरानी कर रही है। म्यांमार का चिन राज्य विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों, दुर्लभ वन्यजीवों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का केंद्र बना हुआ है। यह तस्करी मिजोरम के चम्फाई, सियाहा, लॉग्टलाई, हनथियाल, सैतुअल और सेरछिप — कुल छह जिलों के रास्ते होती है। गौरतलब है कि खुली सीमा होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा बलों के लिए एक संवेदनशील मोर्चा बना रहता है।
मिजो भाषा विकास पर भी हुई चर्चा
उसी दिन मिजो भाषा विकास बोर्ड (MLDB) के अध्यक्ष आर. लल्लियानजुआला और सचिव लालसांगपुड्या ने लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की। इस भेंट में मिजो भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विमर्श हुआ। राज्यपाल ने छोटे बच्चों और गैर-मिजो भाषी लोगों को मिजो भाषा सिखाने तथा शब्दों के सही उच्चारण की अहमियत पर विशेष बल दिया।
साहित्य अकादमी से सहयोग की पहल
राज्यपाल वीके सिंह ने पुस्तक प्रकाशन के लिए मिजो भाषा विकास बोर्ड के साथ सहयोग के वास्ते साहित्य अकादमी के अधिकारियों से संपर्क करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि मिजो भाषा बोलने वाले लोग अब विश्व के अनेक देशों में फैले हुए हैं और मिजोरम की उच्च साक्षरता दर इस भाषाई विरासत की मज़बूत नींव है।
आठवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रतिबद्धता
राज्यपाल ने भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में मिजो भाषा को शामिल कराने के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की — यह माँग मिजो भाषाई समुदाय लंबे समय से उठाता आया है। आगे यह देखना होगा कि केंद्र स्तर पर इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।