मोदी सरकार के 12 साल: अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर बोले — संकट में भी भारतीय अर्थव्यवस्था रही मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर ने 26 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल के आर्थिक प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, सरकार की लगातार चुनावी सफलता का मूल कारण नागरिकों के बीच बना भरोसा और सरकार की नीयत में विश्वास है। उन्होंने कहा कि भारत ने खुद को एक 'रेजिलिएंट इकॉनमी' के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।
डिजिटाइजेशन और पारदर्शिता
योगेंद्र कपूर के अनुसार, मोदी सरकार ने देश के आर्थिक माहौल और समग्र इकोसिस्टम को बदलने का प्रयास किया। सरकार ने डिजिटाइजेशन को महज़ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि पारदर्शिता बढ़ाने के एक व्यापक माध्यम के रूप में अपनाया। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को मज़बूत कर सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और अन्य लाभों को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाया गया।
कपूर के अनुसार, आज पूरी दुनिया भारत के DBT मॉडल की सराहना कर रही है, क्योंकि इसके ज़रिए धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचती है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से भ्रष्टाचार में कमी आई और नागरिकों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा — जो चुनावी सफलता का एक बड़ा आधार रहा है।
संकट में अर्थव्यवस्था की परीक्षा
योगेंद्र कपूर ने कहा कि किसी भी सरकार और नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा संकट के समय होती है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में पूरी दुनिया में आर्थिक अस्थिरता का माहौल था और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ गहरे संकट में पड़ गई थीं। उनके अनुसार, भारत ने उस चुनौती का अपेक्षाकृत मज़बूती से सामना किया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी परिस्थितियाँ और आर्थिक उतार-चढ़ाव लगातार बने हुए हैं। कपूर के अनुसार, इन परिस्थितियों में भारत ने एक लचीली और स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
विकास दर और महंगाई पर रुख
कपूर ने कहा कि भारत लगातार 5 से 7 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए हुए है, जो दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई और वैश्विक दबाव जैसी चुनौतियों के बावजूद सरकार ने कीमतों को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया। गौरतलब है कि यह दावा ऐसे समय में आया है जब खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद बने रहे हैं।
अंतिम पंक्ति तक आर्थिक लाभ
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक आर्थिक लाभ पहुँचाने की प्रतिबद्धता पर कपूर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने इस दिशा में लगातार काम किया है। उनके अनुसार, नीतिगत ढाँचे को इस तरह तैयार किया गया कि योजनाओं का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुँचे।
वैश्विक नज़रिए में भारत
कपूर ने कहा कि आज भारत को देश और विदेश, दोनों स्तरों पर एक 'रेजिलिएंट इकॉनमी' के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुसार, इसके पीछे सरकार के निरंतर प्रयास और दीर्घकालिक नीतिगत फ़ैसले अहम भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत यह गति कैसे बनाए रखता है।