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मोदी सरकार के 12 साल: अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर बोले — संकट में भी भारतीय अर्थव्यवस्था रही मजबूत

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मोदी सरकार के 12 साल: अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर बोले — संकट में भी भारतीय अर्थव्यवस्था रही मजबूत

सारांश

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर ने कहा कि DBT मॉडल, डिजिटाइजेशन और संकट-प्रबंधन ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक मज़बूत और लचीली अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। 5 से 7 प्रतिशत की विकास दर को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया।

मुख्य बातें

अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर ने मोदी सरकार के 12 वर्षीय कार्यकाल के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण किया।
DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मॉडल को भ्रष्टाचार कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रमुख साधन बताया।
भारत की 5 से 7 प्रतिशत आर्थिक विकास दर को वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करार दिया।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के आर्थिक संकट-प्रबंधन को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
कपूर के अनुसार, भारत आज देश-विदेश में एक 'रेजिलिएंट इकॉनमी' के रूप में पहचाना जाता है।

अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर ने 26 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल के आर्थिक प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, सरकार की लगातार चुनावी सफलता का मूल कारण नागरिकों के बीच बना भरोसा और सरकार की नीयत में विश्वास है। उन्होंने कहा कि भारत ने खुद को एक 'रेजिलिएंट इकॉनमी' के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।

डिजिटाइजेशन और पारदर्शिता

योगेंद्र कपूर के अनुसार, मोदी सरकार ने देश के आर्थिक माहौल और समग्र इकोसिस्टम को बदलने का प्रयास किया। सरकार ने डिजिटाइजेशन को महज़ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि पारदर्शिता बढ़ाने के एक व्यापक माध्यम के रूप में अपनाया। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को मज़बूत कर सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और अन्य लाभों को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाया गया।

कपूर के अनुसार, आज पूरी दुनिया भारत के DBT मॉडल की सराहना कर रही है, क्योंकि इसके ज़रिए धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचती है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से भ्रष्टाचार में कमी आई और नागरिकों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा — जो चुनावी सफलता का एक बड़ा आधार रहा है।

संकट में अर्थव्यवस्था की परीक्षा

योगेंद्र कपूर ने कहा कि किसी भी सरकार और नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा संकट के समय होती है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में पूरी दुनिया में आर्थिक अस्थिरता का माहौल था और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ गहरे संकट में पड़ गई थीं। उनके अनुसार, भारत ने उस चुनौती का अपेक्षाकृत मज़बूती से सामना किया।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी परिस्थितियाँ और आर्थिक उतार-चढ़ाव लगातार बने हुए हैं। कपूर के अनुसार, इन परिस्थितियों में भारत ने एक लचीली और स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

विकास दर और महंगाई पर रुख

कपूर ने कहा कि भारत लगातार 5 से 7 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए हुए है, जो दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई और वैश्विक दबाव जैसी चुनौतियों के बावजूद सरकार ने कीमतों को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया। गौरतलब है कि यह दावा ऐसे समय में आया है जब खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद बने रहे हैं।

अंतिम पंक्ति तक आर्थिक लाभ

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक आर्थिक लाभ पहुँचाने की प्रतिबद्धता पर कपूर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने इस दिशा में लगातार काम किया है। उनके अनुसार, नीतिगत ढाँचे को इस तरह तैयार किया गया कि योजनाओं का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुँचे।

वैश्विक नज़रिए में भारत

कपूर ने कहा कि आज भारत को देश और विदेश, दोनों स्तरों पर एक 'रेजिलिएंट इकॉनमी' के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुसार, इसके पीछे सरकार के निरंतर प्रयास और दीर्घकालिक नीतिगत फ़ैसले अहम भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत यह गति कैसे बनाए रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे उसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए — यह स्वतंत्र अकादमिक मूल्यांकन नहीं, बल्कि एक विशेषज्ञ की राय है। DBT की सफलता निर्विवाद है, लेकिन 5-7% विकास दर का दावा तब और पुख्ता होता जब रोज़गार की गुणवत्ता, असंगठित क्षेत्र की स्थिति और वास्तविक मज़दूरी वृद्धि जैसे आँकड़ों से इसे समर्थन मिलता। महंगाई नियंत्रण की बात भी आंशिक है — खाद्य मुद्रास्फीति के मोर्चे पर चुनौतियाँ बनी रही हैं। 'रेजिलिएंट इकॉनमी' की छवि सच है, पर पूरी तस्वीर तभी उभरती है जब असमानता और रोज़गार के आँकड़ों को भी बराबर वज़न मिले।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्थशास्त्री योगेंद्र कपूर ने मोदी सरकार के 12 साल के बारे में क्या कहा?
योगेंद्र कपूर ने कहा कि मोदी सरकार ने डिजिटाइजेशन, DBT और नीतिगत सुधारों के ज़रिए भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत और पारदर्शी बनाया है। उनके अनुसार, संकट के समय सरकार का प्रबंधन और लगातार 5-7% की विकास दर बड़ी उपलब्धियाँ हैं।
भारत का DBT मॉडल क्यों महत्त्वपूर्ण माना जाता है?
DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) मॉडल के तहत सरकारी योजनाओं की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है। कपूर के अनुसार, इससे भ्रष्टाचार में कमी आई और नागरिकों का सरकार पर भरोसा बढ़ा।
कोविड-19 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा रहा?
कपूर के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ गहरे संकट में थीं, भारत ने उस चुनौती का अपेक्षाकृत मज़बूती से सामना किया। उन्होंने इसे सरकार के संकट-प्रबंधन की क्षमता का प्रमाण बताया।
भारत की आर्थिक विकास दर अभी कितनी है?
योगेंद्र कपूर के अनुसार, भारत लगातार 5 से 7 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए हुए है, जो दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन माना जाता है।
मोदी सरकार की चुनावी सफलता का आर्थिक कारण क्या है?
कपूर के अनुसार, सरकार की लगातार चुनावी सफलता के पीछे DBT के ज़रिए बनी पारदर्शिता और नागरिकों में सरकार की नीयत पर बना भरोसा प्रमुख कारण रहे हैं। उनके मुताबिक, योजनाओं का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुँचना इस विश्वास की नींव है।
राष्ट्र प्रेस
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