17 जुलाई 2026
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चंडीगढ़ में PM मोदी ने 'ब्रूम वॉरियर' इंदरजीत सिंह संधू को सराहा, पद्म सम्मान का किया उल्लेख

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चंडीगढ़ में PM मोदी ने 'ब्रूम वॉरियर' इंदरजीत सिंह संधू को सराहा, पद्म सम्मान का किया उल्लेख

सारांश

चंडीगढ़ की जनसभा में पीएम मोदी ने 'ब्रूम वॉरियर' इंदरजीत सिंह संधू को सार्वजनिक मंच पर सराहा और उनके पद्म सम्मान का उल्लेख किया। संधू ने स्वच्छता को धर्मग्रंथों और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रीय कर्तव्य बताया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को चंडीगढ़ जनसभा में रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह संधू की सार्वजनिक प्रशंसा की।
संधू को 'ब्रूम वॉरियर' के नाम से जाना जाता है; उन्हें इस वर्ष पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया।
मोदी ने कहा कि संधू ने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर नई अलख जगाई और लोगों को प्रेरित किया।
संधू ने स्वच्छता को गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और वेदों से जोड़ते हुए इसे आध्यात्मिक दायित्व बताया।
संधू ने बताया कि पहले अकेले सफाई करते थे, अब धीरे-धीरे लोग उनसे जुड़ने लगे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को चंडीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह संधू की खुलकर प्रशंसा की और बताया कि उन्हें इस वर्ष पद्म सम्मान से नवाज़ा गया है। स्वच्छता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के कारण 'ब्रूम वॉरियर' के नाम से मशहूर संधू ने पीएम मोदी के इस उल्लेख पर गहरा आभार व्यक्त किया।

जनसभा में पीएम मोदी का संबोधन

चंडीगढ़ की जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह संधू जी की भी सराहना करना चाहूंगा। उनकी पहचान 'ब्रूम वॉरियर' की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।'

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत नागरिक स्तर पर स्वच्छता आंदोलन को और मज़बूत करने पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वाले ज़मीनी कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक मंच पर इस तरह उद्धृत करना, सरकार की 'जन-भागीदारी' नीति का हिस्सा माना जाता है।

संधू ने जताया आभार, सुनाई स्वच्छता की प्रेरणा

पीएम मोदी की सराहना पर प्रतिक्रिया देते हुए इंदरजीत सिंह संधू ने कहा, 'प्रधानमंत्री का मैं आभारी हूं। उनसे दिल्ली में मिला था, तब भी उन्होंने कहा कि आपने तो पूरा चंडीगढ़ साफ कर दिया है। मैंने उनसे कहा कि मैं छोटा आदमी हूं, थोड़ा ही काम कर सकता हूं। आज उन्होंने फिर से मुझे याद किया, उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद।'

संधू ने बताया कि वे सुबह और शाम नियमित रूप से सफाई करते हैं और यह उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

धर्मग्रंथों से प्रेरणा: स्वच्छता को बताया आध्यात्मिक कर्तव्य

संधू ने स्वच्छता को केवल सामाजिक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा, 'हमारे सभी धर्मग्रंथ, वेद और गुरु ग्रंथ साहिब यही कहते हैं कि सफाई बनाए रखें। गुरु नानक देव जी ने कहा है कि वातावरण का कोई अंत नहीं है — यह भगवान ने हमें दिया है, तो हमें इसे साफ रखना चाहिए।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'हम हवा को गुरु और पानी को पिता मानते हैं। धरती हमारी माता है। उन्हें स्वच्छ रखना हमारा फर्ज है।' उनका यह दर्शन पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को एक साथ जोड़ता है।

बदलाव की बयार: अकेले शुरू हुई मुहिम में जुड़ने लगे लोग

संधू ने बताया कि शुरुआत में उनके साथ कोई नहीं आता था, लेकिन अब धीरे-धीरे लोग सफाई अभियान में शामिल होने लगे हैं। उन्होंने कहा, 'यह एक-दो दिन की बात नहीं है, बल्कि हमें हमेशा भारत को साफ रखना चाहिए। देश में गंदगी नहीं फैलानी चाहिए और न ही प्रदूषण।' उनकी यह मुहिम चंडीगढ़ में नागरिक स्वच्छता चेतना का प्रतीक बन चुकी है और आने वाले समय में यह प्रेरणा और अधिक लोगों तक पहुँचने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्वच्छ भारत मिशन की 'जन-भागीदारी' रणनीति का सुविचारित हिस्सा है — यह केवल व्यक्तिगत प्रशंसा नहीं, बल्कि नागरिक व्यवहार परिवर्तन का संदेश है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि व्यक्तिगत प्रेरणाओं को संस्थागत ढाँचे में बदलने की ज़रूरत है — अकेले 'ब्रूम वॉरियर' पर्याप्त नहीं, जब तक नगर निगम स्तर पर ठोस तंत्र न हो। संधू की कहानी प्रेरक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह प्रेरणा नीतिगत बदलाव में तब्दील होती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदरजीत सिंह संधू कौन हैं और उन्हें 'ब्रूम वॉरियर' क्यों कहते हैं?
इंदरजीत सिंह संधू चंडीगढ़ के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं, जो सेवानिवृत्ति के बाद नियमित रूप से सुबह-शाम सफाई करके शहर में स्वच्छता की अलख जगाते हैं। उनकी इस अनूठी पहल के कारण उन्हें 'ब्रूम वॉरियर' की पहचान मिली है।
इंदरजीत सिंह संधू को पद्म सम्मान कब और क्यों मिला?
PM मोदी के अनुसार, इंदरजीत सिंह संधू को इस वर्ष पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार चंडीगढ़ में स्वच्छता के प्रति उनके दीर्घकालिक समर्पण और नागरिकों को प्रेरित करने के उनके प्रयासों को मान्यता देता है।
PM मोदी ने चंडीगढ़ जनसभा में संधू का ज़िक्र क्यों किया?
17 जुलाई को चंडीगढ़ जनसभा में PM मोदी ने संधू को स्वच्छता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बताते हुए सार्वजनिक रूप से सराहा। यह स्वच्छ भारत मिशन के तहत ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने की सरकार की नीति के अनुरूप है।
संधू स्वच्छता की प्रेरणा कहाँ से लेते हैं?
संधू ने बताया कि वेद, गुरु ग्रंथ साहिब और गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ उन्हें स्वच्छता के लिए प्रेरित करती हैं। वे हवा को गुरु, पानी को पिता और धरती को माता मानते हैं और उन्हें स्वच्छ रखना अपना धार्मिक एवं नैतिक कर्तव्य समझते हैं।
क्या चंडीगढ़ में संधू के साथ अब और लोग जुड़ रहे हैं?
संधू ने बताया कि शुरुआत में वे अकेले सफाई करते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे कुछ लोग उनसे प्रेरित होकर सफाई अभियान में शामिल होने लगे हैं। उनका मानना है कि यह निरंतर और दीर्घकालिक प्रयास होना चाहिए, न कि एक-दो दिन का।
राष्ट्र प्रेस
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