मध्य प्रदेश में ₹1 लाख करोड़ के NHAI समझौते से अधोसंरचना को नई रफ्तार, CM मोहन यादव ने गिनाईं उपलब्धियाँ

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मध्य प्रदेश में ₹1 लाख करोड़ के NHAI समझौते से अधोसंरचना को नई रफ्तार, CM मोहन यादव ने गिनाईं उपलब्धियाँ

सारांश

मध्य प्रदेश में NHAI के साथ ₹1 लाख करोड़ का समझौता, 77 हज़ार किमी से अधिक का सड़क नेटवर्क और 6 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे — CM मोहन यादव ने 14 मई को अधोसंरचना की नई तस्वीर पेश की। GIS सर्वेक्षण, लोकपथ 2.0 और 506 लोक कल्याण सरोवर इस बदलाव की बानगी हैं।

मुख्य बातें

NHAI के साथ लगभग ₹1 लाख करोड़ का समझौता; ₹28 हज़ार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है।
पिछले दो वर्षों में 11,632 किमी सड़कों का निर्माण/सुदृढ़ीकरण और 190 पुल व फ्लाईओवर बनाए गए।
वर्तमान में 16,954 किमी सड़क और 531 पुल/फ्लाईओवर परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं।
GIS आधारित मोबाइल ऐप से 71 हज़ार किमी सड़कों, 3 हज़ार भवनों और 1,400 पुलों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा।
875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण; गुणवत्ता में कमी पर 25 ठेकेदार ब्लैकलिस्ट।
अब तक 506 लोक कल्याण सरोवर तैयार; 600 नए सरोवर बनाने का लक्ष्य।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 14 मई 2025 को कहा कि प्रदेश अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेज़ी से नई पहचान बना रहा है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'विकसित भारत' की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग ने सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और डिजिटल तकनीक के ज़रिए जमीनी स्तर पर व्यापक बदलाव लाए हैं। विभाग का मूल मंत्र 'लोक निर्माण से लोक कल्याण' है — यानी हर निर्माण कार्य को सीधे नागरिकों की सुविधा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि से जोड़ना।

सड़क नेटवर्क और पुल निर्माण की उपलब्धियाँ

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 77 हज़ार किलोमीटर से अधिक का सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में 11,632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण, 5,741 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण तथा 190 पुल एवं फ्लाईओवर बनाए गए हैं। इसके अलावा फिलहाल 16,954 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य और 531 पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।

NHAI समझौता और एक्सप्रेसवे परियोजनाएँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि अधोसंरचना विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ लगभग ₹1 लाख करोड़ का समझौता किया गया है। इनमें से ₹28 हज़ार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है और कई पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके साथ ही 6 प्रमुख ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर काम प्रारंभ हो चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में रिंग रोड परियोजनाओं पर भी तेज़ी से काम हो रहा है, जिससे शहरी यातायात का दबाव कम होगा और औद्योगिक-व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलेगा।

डिजिटल तकनीक और पारदर्शी निगरानी

लोक निर्माण विभाग ने 'लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप' विकसित किया है, जो GIS आधारित तकनीक पर काम करता है। इसके ज़रिए प्रदेश में 71 हज़ार किलोमीटर से अधिक सड़कों, लगभग 3 हज़ार भवनों और 1,400 से अधिक पुलों का विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इस डेटा के आधार पर योजनाएँ अधिक सटीक तरीके से तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा GIS आधारित बजट मॉड्यूल लागू किया गया है, जिससे हर सड़क प्रस्ताव डिजिटल नक्शे पर दर्ज होता है और योजनाओं में दोहराव समाप्त हुआ है।

'लोकपथ 2.0' ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल गाइड की तरह काम कर रहा है। इसमें रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल व पेट्रोल पंप की लोकेशन, SOS सुविधा और दुर्घटना-संभावित स्थानों की चेतावनी शामिल है। ऐप ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिल रही है।

गुणवत्ता निगरानी और ठेकेदारों पर कार्रवाई

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया और कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) लागू किया जा रहा है, जिससे योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर होगी।

पर्यावरण संरक्षण और हरित पहलें

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से बने गड्ढों को 'लोक कल्याण सरोवर' के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार हो चुके हैं और 600 नए सरोवर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही सड़क किनारे भूजल रिचार्ज, फ्लाईओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग निर्माण जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह विकास यात्रा मध्य प्रदेश को एक विकसित राज्य बनाने की दिशा में मज़बूत आधार प्रदान करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹1 लाख करोड़ का NHAI समझौता और GIS-आधारित निगरानी — लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता है। 25 ठेकेदारों का ब्लैकलिस्ट होना यह भी बताता है कि ज़मीनी स्तर पर गुणवत्ता की चुनौती अभी बनी हुई है। 6 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और 5 शहरों में रिंग रोड की घोषणाएँ महत्वाकांक्षी हैं, पर इन परियोजनाओं की समयसीमा और भूमि अधिग्रहण की स्थिति पर सरकार ने अभी स्पष्टता नहीं दी है — जो अक्सर ऐसी बड़ी परियोजनाओं में सबसे बड़ी बाधा बनती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में NHAI के साथ कितने रुपये का समझौता हुआ है?
मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ लगभग ₹1 लाख करोड़ का समझौता किया है। इनमें से ₹28 हज़ार करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है और कई पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
लोकपथ 2.0 ऐप क्या है और इसमें क्या सुविधाएँ हैं?
लोकपथ 2.0 मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित स्मार्ट ट्रैवल गाइड ऐप है। इसमें रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल व पेट्रोल पंप लोकेशन, SOS सुविधा और ब्लैक स्पॉट से 500 मीटर पहले दुर्घटना चेतावनी अलर्ट जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में कितने नए एक्सप्रेसवे बनाए जाएँगे?
मध्य प्रदेश में 6 प्रमुख ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में रिंग रोड परियोजनाओं पर भी तेज़ी से काम किया जा रहा है।
लोक कल्याण सरोवर योजना क्या है?
सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से बने गड्ढों को 'लोक कल्याण सरोवर' के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार हो चुके हैं और 600 नए सरोवर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो भूजल रिचार्ज और पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं।
मध्य प्रदेश में निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
लोक निर्माण विभाग ने 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया और गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके अलावा PMS 2.0 (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम) लागू किया जा रहा है, जिससे योजना निर्माण से भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर होगी।
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