एमपीएससी पेपर लीक: नंदुरबार से ऋतुजा पाटिल गिरफ्तार, ₹12 लाख की डील का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल टीम ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती 2026 के पेपर लीक मामले में मंगलवार, 1 सितंबर को एक और बड़ी सफलता हासिल की। इस मामले में वांछित आरोपी ऋतुजा पाटिल को नंदुरबार से हिरासत में लिया गया है। जांच में अब तक कुल ₹12 लाख की कथित डील का खुलासा हो चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
क्राइम ब्रांच ने इससे पहले 26 अगस्त को इसी मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अदालत ने सभी आरोपियों को 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा से दो दिन पहले पेपर लीक हुआ था और उसके बाद यह जानकारी कई लोगों तक फैल गई।
कैसे हुआ पेपर लीक — जांच में खुलासा
जांच के अनुसार, उम्मीदवार ऋतुजा पाटिल और गौरव पाटिल के बीच प्रेम संबंध थे। ऋतुजा ने अपने पिता अमृत पाटिल से परीक्षा का पेपर हासिल करने की बात कही। इसके बाद अमृत पाटिल कथित बिचौलिए प्रवीण पाटिल के संपर्क में आया, जो नंदुरबार में एक कोचिंग संस्थान चलाता है।
पुलिस को जानकारी मिली है कि प्रवीण पाटिल और एमपीएससी के गिरफ्तार अधिकारियों के बीच कथित तौर पर ₹5 लाख का वित्तीय लेन-देन हुआ, जबकि पूरी डील ₹12 लाख में तय हुई थी। क्राइम ब्रांच अब इससे जुड़े समस्त वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
नंदुरबार कनेक्शन और नेटवर्क की जड़ें
जांच में एक महत्वपूर्ण समानता उभर कर सामने आई है — प्रवीण पाटिल, अमृत पाटिल और एमपीएससी से जुड़े संदिग्ध अधिकारी, सभी नंदुरबार से संबंध रखते हैं। हालांकि पुलिस के अनुसार, प्रवीण पाटिल की कोचिंग क्लास का एफडीए इंस्पेक्टर परीक्षा से प्रत्यक्ष कोई संबंध नहीं है। इसी कारण क्राइम ब्रांच को संदेह है कि इस पेपर लीक नेटवर्क में आगे और भी आरोपी उजागर हो सकते हैं।
ब्रेकअप से हुआ भांडाफोड़
पुलिस की जांच के अनुसार, गौरव पाटिल और ऋतुजा पाटिल के बीच संबंध विच्छेद के बाद गौरव ने एमपीएससी को पेपर लीक की जानकारी देने का निर्णय लिया। गौरव पाटिल उर्फ लोकेश ने शिकायतकर्ता ऋषिकेश गांगुर्दे — जो सोशल मीडिया पर एफडीए से संबंधित सामग्री बनाते हैं — से संपर्क कर लीक हुए पेपर की जानकारी दी और बताया कि उनके पास उसकी कॉपी भी मौजूद है।
एमपीएससी अधिकारियों की भूमिका की जांच
इस मामले में एमपीएससी के तीन अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं — विश्वेश्वर नकटे (सहायक कक्ष अधिकारी), गोपाल मराठे (अवर सचिव, एमपीएससी) और अभिजीत लेंडवे (अवर सचिव, एमपीएससी)। इन तीनों की भूमिका की विस्तृत जांच जारी है। यह मामला एमपीएससी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करता है।