मुफ्ती शमून कासमी ने CM धामी की तारीफ की, बोले — मुसलमानों को हमेशा वोट बैंक समझा गया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड मदरसा एजुकेशन बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मुफ्ती शमून कासमी ने 30 अगस्त 2026 को देहरादून में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मदरसा सुधार फैसले की खुलकर प्रशंसा की और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के 80 वर्ष बाद भी मुसलमानों को केवल वोट बैंक के नज़रिए से देखा जाता रहा है।
मुफ्ती कासमी ने क्या कहा
मुफ्ती शमून कासमी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'असल में देश को आज़ाद हुए 80 साल हो चुके हैं। मुसलमानों को हमेशा सिर्फ वोट बैंक के तौर पर ही देखा गया है। जब भी कोई पार्टी या मुख्यमंत्री उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहते हैं तो ऐसे लोग सामने आ जाते हैं जो मुसलमानों को गुमराह करने का काम करते हैं। मैं उनकी निंदा करता हूं और मुसलमानों से अपील भी करता हूं कि वे उनका बहिष्कार करें।'
उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों से समुदाय को सतर्क रहना चाहिए और अपने बच्चों के भविष्य को किसी बाहरी हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।
मदरसा बोर्ड पर मुफ्ती कासमी का स्पष्टीकरण
मुफ्ती कासमी ने यह भी साफ किया कि उत्तराखंड मदरसा एजुकेशन बोर्ड को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि उसमें मानविकी (ह्यूमैनिटीज) विषयों को जोड़कर उसे नए सिरे से पुनर्गठित किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी का यह फैसला तारीफ के काबिल है, क्योंकि इससे गरीब मदरसा छात्रों के लिए इंजीनियर, डॉक्टर, IAS और PCS अधिकारी बनने के रास्ते खुलेंगे।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की सराहना
मुफ्ती कासमी ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को भी सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की यह पहल अल्पसंख्यक समुदाय को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
विपक्ष पर निशाना और मुस्लिम समुदाय से अपील
चुनावी माहौल का हवाला देते हुए मुफ्ती कासमी ने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया कि वे कांग्रेस और विपक्ष के 'षड्यंत्र' से बाहर निकलें और प्रशासन की सकारात्मक पहलों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यही वक्त है जब समुदाय अपनी दूरियाँ कम करे और मुख्यधारा से जुड़े।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में मदरसा सुधारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है और विपक्षी दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।