1 अक्टूबर 2026
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मुस्तफा मस्जिद मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट में एमडीए ने शो कॉज नोटिस वापस लिया, जमीयत को राहत

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मुस्तफा मस्जिद मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट में एमडीए ने शो कॉज नोटिस वापस लिया, जमीयत को राहत

सारांश

मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद को 21 अगस्त को जारी एमडीए के शो कॉज नोटिस के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कानूनी पहल रंग लाई — इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार ने नोटिस वापस लेकर नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया का वादा किया। लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।

मुख्य बातें

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुस्तफा मस्जिद के खिलाफ जारी शो कॉज नोटिस वापस लिया।
मूल नोटिस 21 अगस्त 2026 को यूपी अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27(1) के तहत जारी हुआ था।
चतुर्वेदी ने माना कि नोटिस 'अस्पष्ट' था; अब कानून के अनुसार नया नोटिस जारी होगा।
हाईकोर्ट ने बयान रिकॉर्ड पर लेते हुए मुतवल्ली जीशान अहमद फरीद की रिट याचिका का निपटारा किया।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा — कानूनी संघर्ष जारी रहेगा।

मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र स्थित मुस्तफा मस्जिद के संरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में 1 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति हुई। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने मस्जिद के खिलाफ जारी शो कॉज नोटिस को वापस ले लिया, जिसे अदालत ने अपने रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया। इस घटनाक्रम से जमीयत उलेमा-ए-हिंद को कानूनी मोर्चे पर राहत मिली है।

मामले की पृष्ठभूमि

मुस्तफा मस्जिद के खिलाफ 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27(1) के अंतर्गत शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। मस्जिद के मुतवल्ली जीशान अहमद फरीद ने इस नोटिस को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में तर्क दिया गया था कि नोटिस अस्पष्ट है और उसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी एवं दस्तावेजी पहलुओं को स्पष्ट नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक मस्जिद के खिलाफ किसी भी ध्वस्तीकरण या जबरन कार्रवाई को रोका जाए।

अदालत में क्या हुआ

यह मामला मुतवल्ली मस्जिद जीशान अहमद फरीद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य के रूप में हाईकोर्ट में दायर था। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी ने अदालत को बताया कि पूर्व में जारी नोटिस अस्पष्ट था, इसलिए उसे वापस लिया जा रहा है और अब कानून के अनुसार नया नोटिस जारी किया जाएगा। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले 24 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में स्थानीय प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

जमीयत की कानूनी टीम

मस्जिद की ओर से अदालत में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड आदित्य परिहार ने पक्ष रखा। मामले की तैयारी और पैरवी में अधिवक्ता मोहम्मद ताहिर हकीम, अधिवक्ता मोहम्मद निजाम पाशा और जमीयत उलेमा-ए-गुजरात के महासचिव प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह पूरी कानूनी कार्रवाई जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के मार्गदर्शन में संचालित हो रही है।

मौलाना मदनी का बयान

मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि मुस्तफा मस्जिद के मामले में कानूनी लड़ाई को एक दिशा मिली है, लेकिन अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है। उन्होंने कहा, 'हमारी कानूनी लड़ाई का उद्देश्य केवल मस्जिद का संरक्षण नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी भी नागरिक या धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही हो।' मदनी ने यह भी कहा कि धार्मिक मामलों में प्रशासन को अधिक सावधानी और संवेदनशीलता के साथ काम करने की आवश्यकता है।

आगे की राह

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने स्पष्ट किया है कि वह मुस्तफा मस्जिद मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर निगाह रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर सभी उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करेगी। एमडीए द्वारा कानून के अनुसार नया नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला एक नए चरण में प्रवेश करेगा, और तब यह देखना होगा कि नया नोटिस पर्याप्त कानूनी स्पष्टता के साथ जारी होता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नया नोटिस किस आधार पर और कितनी पारदर्शिता के साथ जारी होगा। उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों से जुड़े प्रशासनिक नोटिसों की यह एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जहाँ 'अस्पष्टता' का हवाला देकर नोटिस वापस लेना और फिर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करना न्यायिक दबाव का परिणाम बनता जा रहा है। अदालत ने केवल बयान रिकॉर्ड किया है — किसी कार्रवाई पर स्थायी रोक नहीं लगाई। इसलिए जमीयत की सतर्कता स्वाभाविक और ज़रूरी है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुस्तफा मस्जिद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या हुआ?
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 1 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने मुस्तफा मस्जिद के खिलाफ जारी शो कॉज नोटिस को अस्पष्ट बताते हुए वापस ले लिया। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए रिट याचिका का निपटारा कर दिया।
मुस्तफा मस्जिद को शो कॉज नोटिस क्यों जारी किया गया था?
मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र स्थित मुस्तफा मस्जिद को 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27(1) के तहत शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। बाद में सरकारी वकील ने खुद माना कि यह नोटिस अस्पष्ट था।
इस मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की क्या भूमिका है?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद मस्जिद के कानूनी संरक्षण के लिए सक्रिय है और मौलाना महमूद असद मदनी के मार्गदर्शन में पूरी कानूनी लड़ाई संचालित हो रही है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह आगे की कार्रवाई पर नज़र रखेगा और ज़रूरत पड़ने पर सभी कानूनी उपाय अपनाएगा।
अब आगे क्या होगा — क्या मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई रुक गई है?
एमडीए ने वादा किया है कि पुराने नोटिस की जगह अब कानून के अनुसार नया नोटिस जारी किया जाएगा। हाईकोर्ट ने किसी कार्रवाई पर स्थायी रोक नहीं लगाई है, इसलिए मामला नए नोटिस के बाद फिर अदालत में आ सकता है।
24 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ था?
24 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में स्थानीय प्रशासन ने अदालत को यह आश्वासन दिया था कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आश्वासन के बाद 1 अक्टूबर को नोटिस वापसी की औपचारिक पुष्टि हुई।
राष्ट्र प्रेस
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