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मुजफ्फरनगर दंगा मुकदमे वापस: साध्वी प्राची बोलीं — 'राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत फंसाया गया था'

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मुजफ्फरनगर दंगा मुकदमे वापस: साध्वी प्राची बोलीं — 'राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत फंसाया गया था'

सारांश

उत्तर प्रदेश शासन ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा मामले में साध्वी प्राची, डॉ. संजीव बालियान सहित कई BJP नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए। साध्वी प्राची ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा से मुक्ति बताया और CM योगी व BJP सरकार का आभार जताया।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश शासन ने मुजफ्फरनगर दंगा (2013) मामले में स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट से मुकदमे वापस लिए।
राहत पाने वालों में डॉ.
संजीव बालियान , साध्वी प्राची , सुरेश राणा , कुंवर भारतेंदु और कपिल देव अग्रवाल शामिल हैं।
आरोपियों पर भड़काऊ भाषण देने और निजी परिवाद दायर करने के मुकदमे दर्ज थे।
साध्वी प्राची ने कहा — उन्हें 'राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत फंसाया गया था।' साध्वी प्राची ने CM योगी आदित्यनाथ और BJP सरकार का विशेष आभार जताया।

उत्तर प्रदेश शासन ने मुजफ्फरनगर दंगा (2013) से जुड़े मामलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, साध्वी प्राची, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद कुंवर भारतेंदु और मंत्री कपिल देव अग्रवाल सहित कई नेताओं के विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस ले लिए हैं। शासन के आदेश पर स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने यह केस औपचारिक रूप से वापस किया, जिससे संबंधित नेताओं को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

मुकदमों की पृष्ठभूमि

2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान इन नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने और निजी परिवाद दायर करने के आरोप लगाए गए थे। तब से इन मामलों में लगातार सुनवाई जारी थी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पुराने राजनीतिक मामलों की समीक्षा कर रही है।

साध्वी प्राची की प्रतिक्रिया

मुकदमे वापस होने पर साध्वी प्राची ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि 2013 में मुजफ्फरनगर में जो घटनाएँ हुई थीं, उनके दौरान वे 'हिंदुओं की रक्षा, सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान' के लिए वहाँ गई थीं। उनका कहना है कि उन्हें और उनके साथियों को बाद में 'एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत मुकदमों में फंसाया गया था।'

साध्वी प्राची ने तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार और तत्कालीन मंत्री आजम खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौर में 'दंगे कराए गए थे।' गौरतलब है कि ये आरोप उनके अपने बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

न्यायपालिका और सरकार का आभार

साध्वी प्राची ने कहा कि मुजफ्फरनगर की अदालत द्वारा 'सम्मानपूर्वक बरी किए जाने' के बाद वे न्यायपालिका की आभारी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, BJP सरकार, शासन और प्रशासन का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उनके अनुसार, 'मामले में निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई हुई है।'

राजनीतिक संदर्भ

मुजफ्फरनगर दंगे उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील सांप्रदायिक प्रकरणों में से एक रहे हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई थी और हज़ारों विस्थापित हुए थे। उस समय सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सरकार पर दंगों को रोकने में विफलता के आरोप लगे थे, जबकि विपक्षी नेताओं पर भड़काऊ बयानबाज़ी के आरोप दर्ज हुए थे। अब इन मुकदमों की वापसी को आलोचक राजनीतिक दृष्टि से देख रहे हैं, जबकि सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।

आगे क्या

मुकदमे वापसी के बाद संबंधित नेता कानूनी रूप से इन मामलों से मुक्त हो गए हैं। हालाँकि, 2013 के दंगों से जुड़े अन्य मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हो सकते हैं। विपक्षी दलों की ओर से इस फैसले पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सरकार इसे कानूनी समीक्षा का परिणाम बताती है। यह ध्यान देने योग्य है कि 2013 के दंगे उत्तर प्रदेश के सबसे घातक सांप्रदायिक प्रकरणों में से एक थे — जिनमें दर्जनों मौतें और हज़ारों का विस्थापन हुआ था। मुकदमे वापसी की प्रक्रिया और उसके आधार की पारदर्शी व्याख्या न होने से जवाबदेही को लेकर सवाल स्वाभाविक हैं। न्यायिक राहत और राजनीतिक सुविधा के बीच की रेखा को सार्वजनिक विमर्श में स्पष्ट रखना लोकतांत्रिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरनगर दंगा मुकदमे किन नेताओं के खिलाफ वापस लिए गए हैं?
उत्तर प्रदेश शासन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, साध्वी प्राची, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद कुंवर भारतेंदु और मंत्री कपिल देव अग्रवाल सहित कई नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए हैं। स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने शासन के आदेश पर यह कदम उठाया।
इन नेताओं पर मूल रूप से क्या आरोप थे?
2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान इन नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने और निजी परिवाद दायर करने के मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मामलों में लंबे समय से अदालत में सुनवाई चल रही थी।
साध्वी प्राची ने मुकदमे वापसी पर क्या कहा?
साध्वी प्राची ने कहा कि वे 2013 में हिंदुओं की रक्षा के लिए मुजफ्फरनगर गई थीं और बाद में उन्हें 'राजनीतिक प्रोपेगेंडा के तहत मुकदमों में फंसाया गया।' उन्होंने CM योगी आदित्यनाथ, BJP सरकार और न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया।
मुजफ्फरनगर दंगे 2013 क्या थे?
2013 के मुजफ्फरनगर दंगे उत्तर प्रदेश के सबसे गंभीर सांप्रदायिक हिंसा के प्रकरणों में से एक थे, जिनमें दर्जनों लोगों की मौत हुई और हज़ारों लोग विस्थापित हुए। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी।
क्या इन नेताओं से जुड़े अन्य मामले अभी भी चल रहे हैं?
शासन के आदेश पर स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने इन विशेष मुकदमों को वापस लिया है, जिससे संबंधित नेता इन मामलों से मुक्त हो गए हैं। 2013 के दंगों से जुड़े अन्य मामलों की स्थिति के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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