'एक पेड़ मां के नाम' अभियान: नड्डा और शिवराज ने शिलांग में किया वृक्षारोपण, विश्व पर्यावरण दिवस 2026
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शिलांग, मेघालय में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इस अभियान की शुरुआत 5 जून 2024 को प्रधानमंत्री के आह्वान पर हुई थी और अब यह तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
शिलांग में नड्डा का संदेश
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लाखों कार्यकर्ता आज देशभर में लाखों स्थानों पर वृक्षारोपण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में इस अभियान की नींव रखी गई थी, 2025 में इसे बड़े पैमाने पर मनाया गया और 2026 में इसका और विस्तार हुआ है। नड्डा ने कहा, 'शिलांग में हमने भी अपना योगदान दिया है।'
शिवराज का सांस्कृतिक संदर्भ
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर कहा कि जीव-जंतु, पशु-पक्षी और धरती माता मिलकर हमारे पर्यावरण का निर्माण करते हैं और हमें सब कुछ प्रदान करते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि शास्त्रों में कहा गया है — '10 पुत्रों के बराबर एक पेड़।' चौहान ने इस परंपरागत सोच को आज के पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा।
उत्तर प्रदेश में व्यापक अभियान
प्रभारी मंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वन विभाग के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में तहसील स्तर से लेकर मंडल स्तर तक वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इसमें सरकारी, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता एक साथ भाग ले रहे हैं।
मुंबई की मेयर की अपील
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने विश्व पर्यावरण दिवस पर मुंबईकरों को शुभकामनाएं देते हुए अपील की कि हर नागरिक 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत अपनी माँ के नाम पर एक पौधा लगाए। उनकी यह अपील अभियान के भावनात्मक आयाम को रेखांकित करती है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में वन आवरण बढ़ाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान अब एक वार्षिक राष्ट्रीय परंपरा का रूप ले चुका है, जिसमें सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र भी सक्रिय रूप से जुड़ा है। भविष्य में इस अभियान के अंतर्गत लगाए गए पेड़ों की संख्या और उनके जीवित रहने की दर का सत्यापन एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।