नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का आरोप — पुलिस ने नामांकन वापस लेने का बनाया दबाव
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव से पहले एक गंभीर विवाद सामने आया है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को हल्दिया सुधार गृह से रिहा होने के तुरंत बाद राज्य पुलिस पर आरोप लगाया कि उन पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव डाला गया था। उनके इन आरोपों ने बंगाल की चुनावी राजनीति में खलबली मचा दी है।
गिरफ्तारी और जमानत का घटनाक्रम
मिलन प्रधान को इस महीने की शुरुआत में वर्ष 2007 में दर्ज एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को उन्हें 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की। आवश्यक कागजी कार्रवाई और औपचारिकताएँ पूरी होने के पश्चात उन्हें बुधवार दोपहर हल्दिया स्थित सुधार गृह से रिहा किया गया।
मिलन प्रधान के मुख्य आरोप
सुधार गृह के बाहर मीडिया से बात करते हुए मिलन प्रधान ने कथित तौर पर बताया कि 18 सितंबर को जब वे चांदीपुर में प्रचार कर रहे थे, तब सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी उन्हें उठाकर ले गए। उनके अनुसार, मंदारमणि के एक होटल में उनकी आँखों पर पट्टी बाँधकर ले जाया गया, जहाँ उनसे नामांकन वापस लेने को कहा गया और इसके बदले उनकी इच्छा के अनुसार कुछ भी देने की पेशकश की गई।
प्रधान ने आरोप लगाया, 'जब मैंने अपना नामांकन वापस लेने से इनकार कर दिया तो मुझे वापस चांदीपुर ले जाया गया और वहाँ आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।' उनका यह भी कहना था कि प्रारंभिक हिरासत के दौरान उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था।
पुलिस और राज्य सरकार की स्थिति
खबर तैयार होने तक पूर्वी मेदिनीपुर जिला पुलिस की ओर से मिलन प्रधान के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के जमानत आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का कदम उठाया है। इस पर प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार को शीर्ष अदालत में सफलता नहीं मिलेगी।
उपचुनाव की पृष्ठभूमि
नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम पहले से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में अत्यंत संवेदनशील सीट के रूप में जाना जाता है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र अपने तीखे राजनीतिक संघर्षों और आरोप-प्रत्यारोपों के लिए चर्चित रहा है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई का परिणाम और 6 अक्टूबर का मतदान — दोनों ही इस उपचुनाव की दिशा तय करेंगे। आलोचकों का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी, क्योंकि सत्तारूढ़ दल पर दबाव बनाने के आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।