3 नवंबर 2026
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नाहरगढ़ वन कार्यालय हमला: नरेश मीणा के पैतृक घर पर पुलिस की दबिश, 6 नवंबर को आत्मसमर्पण का ऐलान

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नाहरगढ़ वन कार्यालय हमला: नरेश मीणा के पैतृक घर पर पुलिस की दबिश, 6 नवंबर को आत्मसमर्पण का ऐलान

सारांश

भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा बारां के नाहरगढ़ में वन कार्यालय पर कथित हमले के मामले में फरार हैं। पुलिस की सुबह 5 बजे की दबिश के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर 6 नवंबर को आत्मसमर्पण का ऐलान किया। अब तक 4 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और पंचायती राज चुनावों के बीच यह मामला राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस ने 3 नवंबर 2026 की सुबह 5 बजे किसान नेता नरेश मीणा के पैतृक आवास नयागांव पर छापा मारा, लेकिन वह वहाँ नहीं मिले।
मामला 1 नवंबर 2026 को नाहरगढ़ वन रेंज कार्यालय पर हुए कथित हमले से जुड़ा है, जिसमें वनकर्मियों की मारपीट, दस्तावेज़ों को नुकसान और जब्त जनरेटर वापस ले जाने के आरोप हैं।
नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पर 6 नवंबर को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने में आत्मसमर्पण करने की घोषणा की।
इस मामले में अब तक 4 आरोपी — जितेंद्र नागर, देवेंद्र कुशवाहा, पप्पू भील और मुरारी गुर्जर — गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जा चुके हैं।
विशेष पुलिस टीम का नेतृत्व बारां एसपी अभिषेक अंदासु के निर्देश पर किया गया और इसमें अटरू सर्किल ऑफिसर रामानंद यादव सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
मीणा ने सोशल मीडिया पोस्ट में राजस्थान मतदाताओं से कांग्रेस और BJP से इतर तीसरे मोर्चे को समर्थन देने की अपील भी की।

राजस्थान पुलिस ने बारां जिले के नाहरगढ़ कस्बे में वन विभाग के रेंज कार्यालय पर कथित हमले के सिलसिले में भगत सिंह सेना के प्रमुख और किसान नेता नरेश मीणा की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की सुबह करीब 5 बजे पुलिस की एक विशेष टीम ने उनके पैतृक आवास नयागांव पर छापा मारा, लेकिन मीणा वहाँ मौजूद नहीं थे और टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। इसके बाद मीणा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर 6 नवंबर को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने में आत्मसमर्पण करने की घोषणा की।

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

इस पूरे मामले की शुरुआत 1 नवंबर 2026 को हुई थी, जब नाहरगढ़ वन चौकी प्रभारी प्रदीप सिंह राठौड़ एक वनरक्षक और अन्य कर्मचारियों के साथ झिरी टापरा क्षेत्र में वन भूमि पर कथित तौर पर अवैध ट्यूबवेल के लिए इस्तेमाल हो रहे जनरेटर को जब्त करने पहुँचे। जब्त जनरेटर को वन विभाग के रेंज कार्यालय लाया गया।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद नरेश मीणा अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कार्यालय पहुँचे। आरोप है कि भीड़ ने परिसर में आग लगाने की धमकी दी, वनकर्मियों के साथ मारपीट की, उनकी वर्दी से बैज और नेमप्लेट नोंच लिए, सरकारी दस्तावेज़ों — जिनमें जब्ती से जुड़ा पंचनामा भी शामिल था — को नुकसान पहुँचाया और जब्त जनरेटर को एक मिनी ट्रांसपोर्ट वाहन में लेकर चली गई। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पंचायती राज चुनाव चल रहे हैं और क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरम है।

पुलिस कार्रवाई और विशेष टीम

बारां एसपी अभिषेक अंदासु के निर्देश पर नरेश मीणा की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई। इस टीम में अटरू सर्किल ऑफिसर रामानंद यादव, मोथपुर थाना प्रभारी कमल सिंह, बारां सदर थाना प्रभारी नवलकिशोर मीणा और जिला विशेष टीम (डीएसटी) के जवान शामिल थे।

इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नाहरगढ़ थाना प्रभारी विवेक हरसाना के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में जितेंद्र नागर (36) नाहरगढ़ निवासी, देवेंद्र कुशवाहा (22) बालापुरा निवासी, पप्पू भील (25) लकड़ाई निवासी और मुरारी गुर्जर (20) मुरारी निवासी शामिल हैं। चारों को अदालत में पेश किया गया जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

नरेश मीणा का सोशल मीडिया ऐलान

पुलिस छापे के बाद नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सुबह 5 बजे उनके घर पहुँची थी। उन्होंने 6 नवंबर को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने में आत्मसमर्पण करने का संकल्प व्यक्त किया।

गौरतलब है कि मीणा ने इसी पोस्ट में राजस्थान के मतदाताओं से कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इतर 'तीसरे मोर्चे' का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने बसपा के चुनाव चिह्न हाथी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) की बोतल चिह्न और मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ-साथ सीकर में वामपंथी उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात कही।

आरोप और कानूनी पहलू

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों पर सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी निर्वहन से रोकने और वन विभाग के कर्मचारियों को धमकाने के आरोप लगाए गए हैं। फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और लगातार छापेमारी जारी है।

यह पहली बार नहीं है जब वन भूमि अतिक्रमण और सरकारी कार्रवाई के विरोध में इस तरह की घटना सामने आई हो — राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले दर्ज हुए हैं। पुलिस का ध्यान अब मुख्य आरोपी नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अपनी शर्तों पर आ रहे हैं, जो उन्हें जन-आंदोलन के प्रतीक की छवि देता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सब पंचायती राज चुनावों के ठीक बीच हो रहा है, और उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में वोटर अपील जोड़ना इस मामले को केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व का मामला भी बनाती है। वन भूमि पर अतिक्रमण बनाम किसान अधिकार का यह तनाव राजस्थान में नया नहीं है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की वर्दी से नेमप्लेट नोंचने जैसे कथित आरोप संस्थागत अधिकार को सीधी चुनौती है — जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाहरगढ़ वन कार्यालय हमले का मामला क्या है?
यह मामला 1 नवंबर 2026 को बारां जिले के नाहरगढ़ में वन विभाग के रेंज कार्यालय पर हुए कथित हमले से जुड़ा है। आरोप है कि किसान नेता नरेश मीणा सैकड़ों समर्थकों के साथ कार्यालय पहुँचे, वनकर्मियों की पिटाई की, सरकारी दस्तावेज़ नष्ट किए और जब्त जनरेटर वापस ले गए।
नरेश मीणा पुलिस को क्यों तलाश रही है?
नरेश मीणा पर सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़, वन कर्मचारियों को धमकाने और उन्हें ड्यूटी करने से रोकने के आरोप हैं। वे इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में नामज़द हैं और अब तक गिरफ्तारी से बचते रहे हैं।
नरेश मीणा कब और कहाँ आत्मसमर्पण करेंगे?
नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर 6 नवंबर 2026 को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने में आत्मसमर्पण करने का ऐलान किया है। पुलिस इस घोषणा की पुष्टि का इंतज़ार कर रही है।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने सोमवार को इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया — जितेंद्र नागर (36), देवेंद्र कुशवाहा (22), पप्पू भील (25) और मुरारी गुर्जर (20)। इन चारों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
इस घटनाक्रम का राजस्थान के पंचायती राज चुनावों से क्या संबंध है?
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में पंचायती राज चुनाव जारी हैं। नरेश मीणा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में मतदाताओं से कांग्रेस और BJP से इतर तीसरे मोर्चे — बसपा, RLP और वामपंथी उम्मीदवारों — को समर्थन देने की अपील भी की, जिससे मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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