महाराजा हरि सिंह विवाद: एनसी नेता तारिक भट ने मांगी माफी, कहा — जम्मू की भावनाओं का सम्मान करता हूं
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेता तारिक भट ने महाराजा हरि सिंह पर की गई कथित विवादित टिप्पणी को लेकर 17 जुलाई को सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए अपना बयान वापस ले लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत बयान था और इसका नेशनल कॉन्फ्रेंस की आधिकारिक स्थिति से कोई संबंध नहीं है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
12 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू के महाराजा हरि सिंह पार्क में जम्मू-कश्मीर को पुनः राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) दिलाने की मांग को लेकर एक बड़ी जनसभा आयोजित की थी। इसी कार्यक्रम के दौरान मीडिया ने तारिक भट से जम्मू-कश्मीर के इतिहास से संबंधित सवाल पूछे। उनके जवाबों को व्यापक रूप से महाराजा हरि सिंह का अपमान माना गया, जिसके बाद जम्मू संभाग में तीखी प्रतिक्रिया उभरी।
तारिक भट का पक्ष
भट ने कहा, '12 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में मीडिया के सवालों के जवाब में मैंने जो बातें कहीं, वे उन किताबों पर आधारित थीं जो मैंने पढ़ी थीं। लेकिन मेरे कुछ भाइयों को मेरी बातें पसंद नहीं आईं।' उन्होंने आगे कहा, 'यदि पूरे जम्मू क्षेत्र की राय एक है और केवल मेरी राय अलग है, तो जनता की आवाज़ ज़्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए जम्मू के लोगों की भावनाओं का पूरा सम्मान करते हुए मैं उस अवसर पर कहे गए अपने शब्द वापस लेता हूं।'
विरोध प्रदर्शन और दबाव
विवाद बढ़ने पर युवा राजपूत सभा और रियासी जिला बार एसोसिएशन ने खुलकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के पुतले फूंके और बयान की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक माफी नहीं मांगी गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक संवेदनशीलता पहले से ही ऊंचाई पर है और स्टेटहुड की मांग को लेकर विभिन्न दलों के बीच तनाव बना हुआ है।
पार्टी से अलग बताया बयान
तारिक भट ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका बयान उनका निजी विचार था और इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस की पार्टी लाइन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। गौरतलब है कि महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक थे, जिन्होंने 1947 में भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उनसे जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियाँ जम्मू क्षेत्र में विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
आगे क्या
माफी के बाद यह देखना होगा कि युवा राजपूत सभा और रियासी जिला बार एसोसिएशन अपनी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी को वापस लेते हैं या नहीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना जम्मू-कश्मीर की राजनीति में ऐतिहासिक प्रतीकों को लेकर बनी संवेदनशीलता को एक बार फिर रेखांकित करती है।