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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड: कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा का सभी दलों से एकजुटता का आह्वान

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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड: कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा का सभी दलों से एकजुटता का आह्वान

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों की बैठक में कांग्रेस की गैर-मौजूदगी ने सियासी सवाल खड़े किए — जवाब में कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने स्पष्ट किया कि स्टेटहुड की लड़ाई किसी एक दल की नहीं, पूरे जम्मू-कश्मीर की है और इसके लिए जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी दलों को एकजुट होना होगा।

मुख्य बातें

कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने 6 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली के लिए सभी राजनीतिक दलों से एकजुटता की अपील की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की हालिया बैठक में कांग्रेस की अनुपस्थिति से सियासी चर्चा तेज हुई।
शर्मा ने कहा कि विधानसभा में पहले भी स्टेटहुड पर प्रस्ताव लाया जा चुका है और सरकार की प्राथमिकता अपरिवर्तित है।
बारिश और सुरक्षा स्थिति जैसी परिस्थितियों के कारण कुछ प्रक्रियाओं में देरी स्वीकार की गई।
डोगरा , गुर्जर सहित सभी समुदायों को साथ लेकर सामाजिक और राजनीतिक एकता मजबूत करने पर जोर दिया गया।

कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने 6 जून 2026 को जम्मू में स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) वापस दिलाने की लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की है और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आना होगा। उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की हालिया बैठक में कांग्रेस की अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई थी।

मंत्री का स्पष्ट संदेश

शर्मा ने कहा कि यह समय राजनीतिक भेदभाव का नहीं, बल्कि एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होने का है। उन्होंने कहा, 'सरकार या दलों के बीच किसी तरह की दूरी नहीं रखी जा रही है और सभी को मिलकर उस अधिकार को वापस लाने के लिए प्रयास करना चाहिए, जो राज्य से छीना गया है।' मंत्री ने कांग्रेस और अन्य दलों को भी इस प्रयास में साथ आने का आह्वान किया।

विधानसभा प्रस्ताव और प्राथमिकता

शर्मा ने बताया कि विधानसभा में पहले भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव लाया जा चुका है और सरकार की प्राथमिकता हमेशा से स्टेटहुड की बहाली रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि बारिश, सुरक्षा स्थिति और अन्य परिस्थितियों के कारण कुछ प्रक्रियाओं में देरी हुई है, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट है और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।

ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक एकता

मंत्री ने इतिहास का उल्लेख करते हुए महाराजा हरि सिंह, महाराजा गुलाब सिंह और महाराजा रणजीत सिंह जैसे शासकों को याद किया। उन्होंने कहा कि इन शासकों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब राज्य की पहचान और उसका गौरव फिर से स्थापित हो। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर का यह क्षेत्र सदियों से विविधता और एकता का प्रतीक रहा है।

सामाजिक समावेश पर जोर

शर्मा ने जम्मू-कश्मीर के सभी समुदायों — डोगरा, गुर्जर और अन्य — को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि सामाजिक और राजनीतिक एकता मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक और राजनीतिक परिस्थितियों में समाज को जाति और धर्म से ऊपर उठकर काम करना होगा।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

मंत्री ने यह भी कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जब कोई राज्य अपनी माँग रखता है, तो वहाँ सभी दल एक साथ खड़े होते हैं — उसी तरह जम्मू-कश्मीर के लिए भी एक साझा दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के संवैधानिक अधिकारों की है और इसमें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही कांग्रेस की अनुपस्थिति पर अप्रत्यक्ष दबाव भी — यह संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर समन्वय उतना सहज नहीं जितना दिखाया जाता है। जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 हटने के बाद से स्टेटहुड की माँग लगातार उठती रही है, लेकिन केंद्र की ओर से कोई ठोस समयसीमा अब तक नहीं आई है। 'देरी' की स्वीकारोक्ति — चाहे बारिश या सुरक्षा का हवाला हो — यह भी बताती है कि सरकार के पास अभी कोई निश्चित रोडमैप नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह राजनीतिक एकता केवल बयानबाज़ी है या संसद और केंद्र पर सामूहिक दबाव बनाने की ठोस रणनीति।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली की माँग क्या है?
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। तब से वहाँ के राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग कर रहे हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस की बैठक में कांग्रेस क्यों नहीं थी?
स्रोत के अनुसार कांग्रेस की अनुपस्थिति के कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन इस गैर-मौजूदगी ने सियासी हलकों में चर्चा को तेज कर दिया। कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने कांग्रेस सहित सभी दलों से इस प्रयास में शामिल होने का आह्वान किया।
सतीश शर्मा ने स्टेटहुड में देरी के क्या कारण बताए?
मंत्री शर्मा ने कहा कि बारिश, सुरक्षा स्थिति और अन्य परिस्थितियों के कारण कुछ प्रक्रियाओं में देरी हुई है, लेकिन सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है और वह उसी दिशा में काम कर रही है।
क्या जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड पर प्रस्ताव आया है?
हाँ, सतीश शर्मा के अनुसार विधानसभा में पहले भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव लाया जा चुका है। सरकार की प्राथमिकता हमेशा से स्टेटहुड की बहाली रही है।
जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड से किन समुदायों को फायदा होगा?
मंत्री शर्मा ने डोगरा, गुर्जर और क्षेत्र के अन्य सभी समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टेटहुड की बहाली पूरे जम्मू-कश्मीर की जनता के संवैधानिक अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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