11 जुलाई 2026
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नसीम सिद्दीकी ने मौलाना रशीदी का बचाव किया, बोले — देर से शादी भी रेप की वजह

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नसीम सिद्दीकी ने मौलाना रशीदी का बचाव किया, बोले — देर से शादी भी रेप की वजह

सारांश

एनसीपी (एसपी) नेता नसीम सिद्दीकी ने मौलाना साजिद रशीदी के उस बयान का बचाव किया जिसमें 50% रेप की वजह देर से शादी को बताया गया। यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने इसे 'संकीर्ण सोच' करार देते हुए तीखी आलोचना की।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 10 जुलाई को दावा किया कि 50% रेप के मामलों की वजह महिलाओं की देर से शादी है।
एनसीपी (एसपी) नेता नसीम सिद्दीकी ने 11 जुलाई को इस बयान का खुलकर समर्थन करते हुए इसे 'बिल्कुल सही' बताया।
सिद्दीकी ने तर्क दिया कि 18 वर्ष की उम्र में बालिग होते ही लड़कियों की जल्द शादी होनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मौलाना पर 'संकीर्ण सोच' का आरोप लगाया।
आलोचकों का कहना है कि यौन अपराध को पीड़िता की वैवाहिक स्थिति से जोड़ना भ्रामक और पीड़िता को दोष देने वाली सोच है।

एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता नसीम सिद्दीकी ने शनिवार, 11 जुलाई को ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की उस विवादित टिप्पणी का खुलकर समर्थन किया, जिसमें रशीदी ने यौन उत्पीड़न के मामलों को महिलाओं की देर से शादी से जोड़ा था। सिद्दीकी ने कहा कि मौलाना का बयान 'बिल्कुल सही' है और इसे 'सकारात्मक रूप से' लिया जाना चाहिए।

मौलाना रशीदी का मूल बयान

मौलाना साजिद रशीदी ने शुक्रवार, 10 जुलाई को एक सार्वजनिक संवाद के दौरान कहा था: 'दुष्कर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि शादियों में देरी हो रही है। अगर आप अपनी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो उनकी शादी जल्दी कर दें।' उन्होंने यह भी दावा किया था कि 'कम से कम 50 प्रतिशत रेप के मामले इसलिए होते हैं, क्योंकि महिलाओं की शादी जल्दी नहीं की जाती।' इस बयान ने तत्काल व्यापक विवाद उत्पन्न कर दिया था।

सिद्दीकी का बचाव और तर्क

नसीम सिद्दीकी ने मौलाना के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पुरुषों के लिए यौन संबंध एक 'स्वाभाविक इंसानी ज़रूरत' है। उन्होंने यह भी कहा कि जब शादी में देरी होती है, तो मोबाइल फोन और तकनीक के इस दौर में लोग 'गलत कामों में पड़ सकते हैं।' सिद्दीकी के अनुसार, 'कम से कम 50 प्रतिशत रेप के मामले इसलिए होते हैं, क्योंकि महिलाओं की शादी जल्दी नहीं होती और फिर वे किसी लव ट्राएंगल में फंस जाती हैं।'

उन्होंने शादी की उम्र पर तर्क देते हुए कहा: 'अगर लड़कियों को 18 साल की उम्र में वोट देने की इजाजत है, तो इसका मतलब है कि वे बालिग हैं — और लड़के 21 साल की उम्र में बालिग होते हैं — तो उसके बाद शादी में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी आग्रह किया कि इस मामले को 'कोई अलग रंग न दिया जाए।'

महिला आयोग की कड़ी आलोचना

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने शनिवार को मौलाना रशीदी की तीखी आलोचना की और उन पर 'संकीर्ण सोच' रखने का आरोप लगाया। चौहान ने कहा: 'आज भारत की महिलाओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में — यहाँ तक कि वैश्विक स्तर पर भी — देश का नाम रोशन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं और उन्हें पुरुषों के बराबर लाना चाहते हैं, क्योंकि देश की आधी आबादी महिलाओं की है। अगर हम अभी भी पीछे हैं तो इसकी वजह लोगों की ऐसी सोच है।'

व्यापक संदर्भ और विवाद

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता पर बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि यौन उत्पीड़न को पीड़िता की वैवाहिक स्थिति से जोड़ना न केवल तथ्यात्मक रूप से भ्रामक है, बल्कि अपराध की ज़िम्मेदारी पीड़िता पर डालने वाली सोच को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बलात्कार एक अपराध है जिसकी जड़ें शक्ति के दुरुपयोग और सामाजिक असमानता में हैं, न कि विवाह की उम्र में। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के बयान महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को किस हद तक प्रभावित करते हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस 'विक्टिम ब्लेमिंग' की संस्कृति को राजनीतिक वैधता देता है जिसे न्यायपालिका और महिला अधिकार संस्थाएँ दशकों से चुनौती देती रही हैं। चिंताजनक यह है कि यह बयान किसी हाशिये की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक संसदीय दल के नेता से आया — जो विपक्षी राजनीति में महिला मुद्दों पर बढ़ती असंवेदनशीलता का संकेत है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को 'विवाद' तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि ऐसे नेता अपने पद पर बने क्यों रहते हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने क्या विवादित बयान दिया था?
मौलाना साजिद रशीदी ने 10 जुलाई को दावा किया कि कम से कम 50% रेप के मामले इसलिए होते हैं क्योंकि महिलाओं की शादी जल्दी नहीं की जाती। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बेटियों की जल्द शादी करें।
नसीम सिद्दीकी ने मौलाना के बयान का समर्थन क्यों किया?
एनसीपी (एसपी) नेता नसीम सिद्दीकी ने बयान को 'बिल्कुल सही' बताया और तर्क दिया कि देर से शादी और मोबाइल-युग में अश्लील सामग्री तक पहुँच यौन अपराधों की एक वजह है। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में बालिग होते ही लड़कियों की शादी का समर्थन किया।
उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने इस पर क्या कहा?
यूपी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मौलाना रशीदी की 'संकीर्ण सोच' की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएँ वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं और ऐसी सोच उनकी प्रगति में बाधा है।
क्या यौन उत्पीड़न को देर से शादी से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही है?
आलोचकों और विशेषज्ञों के अनुसार, बलात्कार की जड़ें शक्ति के दुरुपयोग और सामाजिक असमानता में हैं, न कि विवाह की उम्र में। इस तरह के दावों को महिला अधिकार संगठन और न्यायपालिका 'विक्टिम ब्लेमिंग' की श्रेणी में रखते हैं।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन भारत में मस्जिदों के इमामों का एक संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी हैं। यह संगठन समय-समय पर धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बयान देता है।
राष्ट्र प्रेस
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