2 अक्टूबर 2026
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राष्ट्रीय महिला आयोग की केंद्र को 37 सिफारिशें: निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव, 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटों का प्रस्ताव

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राष्ट्रीय महिला आयोग की केंद्र को 37 सिफारिशें: निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव, 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटों का प्रस्ताव

सारांश

राष्ट्रीय महिला आयोग की 37 सिफारिशें महज नीतिगत दस्तावेज़ नहीं — ये भारत की कार्यस्थल संस्कृति को बदलने की माँग हैं। निजी क्षेत्र, गिग वर्कर्स और असंगठित महिलाओं को दायरे में लाने का प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि मातृत्व सुरक्षा अब सिर्फ सरकारी नौकरियों का विशेषाधिकार नहीं रह सकती।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 2 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार को 37 सिफारिशें भेजीं।
निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव (CCL) लागू करने और इसे जेंडर न्यूट्रल बनाने का प्रस्ताव।
मौजूदा 730 दिनों की CCL को माता-पिता के बीच 365-365 दिन में बराबर बाँटने की सिफारिश।
90% से अधिक महिला कामगार अभी मातृत्व लाभों के दायरे से बाहर; गिग व असंगठित क्षेत्र को शामिल करने का सुझाव।
2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने के लिए राष्ट्रीय बाल देखभाल बुनियादी ढाँचा मिशन का प्रस्ताव।
गोद लेने वाली व कमीशनिंग माताओं की छुट्टी 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने की सिफारिश।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 2 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार को मातृत्व एवं बाल देखभाल व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए 37 सिफारिशें सौंपी हैं, जिनमें निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव (CCL), सभी क्षेत्रों में अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश और 2030 तक देशभर में 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का प्रस्ताव शामिल है। ये सिफारिशें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी गई हैं।

सिफारिशों की पृष्ठभूमि

आयोग की यह रिपोर्ट 5 मई 2026 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श के दौरान हुई विस्तृत चर्चाओं पर आधारित है। रिपोर्ट में नौ प्रमुख क्षेत्रों में सुधार के प्रस्ताव दिए गए हैं — मातृत्व लाभ, चाइल्ड केयर लीव, पितृत्व अवकाश, बाल देखभाल बुनियादी ढाँचा, स्तनपान सुविधाएँ, निजी क्षेत्र का समावेश, कानूनों में तालमेल, प्रभावी क्रियान्वयन और कार्यस्थल भेदभाव की रोकथाम।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 10 आयोग को महिलाओं से संबंधित मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने और संशोधन की सिफारिश करने का अधिकार देती है।

असंगठित और गिग श्रमिकों पर विशेष जोर

रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत से अधिक महिला कामगार अभी मातृत्व एवं बाल देखभाल लाभों के प्रभावी दायरे से बाहर हैं। NCW ने असंगठित क्षेत्र के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी इन लाभों के दायरे में लाने की सिफारिश की है।

इसके अलावा आयोग ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 की धारा 109 के अंतर्गत अलग से 'मैटरनिटी एंड चाइल्डकेयर फंड' बनाने और उसमें सरकार व नियोक्ताओं, दोनों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रस्ताव दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर को बढ़ाने पर नीतिगत बहस तेज हो रही है।

चाइल्ड केयर लीव में जेंडर न्यूट्रल बदलाव का प्रस्ताव

NCW ने मौजूदा 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव को माता और पिता के बीच 365-365 दिनों में समान रूप से बाँटने का सुझाव दिया है। यदि दोनों एक ही संस्थान में कार्यरत हों, तो एक साझा लीव पूल का विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है।

शून्य से दो वर्ष की उम्र के बच्चों की देखभाल के लिए 60:40 के अनुपात में प्राथमिक और द्वितीयक देखभालकर्ता के बीच छुट्टी वितरण का मॉडल भी सुझाया गया है। आयोग ने नॉर्डिक देशों की साझा पैरेंटल लीव प्रणाली को आदर्श मानते हुए भारत में भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की सिफारिश की है।

मातृत्व लाभ में समानता और विस्तार

आयोग ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) को सभी पात्र महिलाओं के लिए सार्वभौमिक और कानूनी अधिकार बनाने का सुझाव दिया है। जैविक, गोद लेने वाली और सरोगेसी के माध्यम से माँ बनने वाली महिलाओं के बीच मातृत्व लाभ में समानता लाने की भी बात कही गई है।

गोद लेने वाली और कमीशनिंग माताओं की छुट्टी मौजूदा 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही चाइल्ड केयर लीव में दो बच्चों की मौजूदा सीमा पर पुनर्विचार करते हुए तीसरे बच्चे को भी इसके दायरे में लाने का प्रस्ताव है।

क्रेच बुनियादी ढाँचा और कार्यस्थल सुधार

NCW ने केंद्र और राज्यों के सहयोग से 'राष्ट्रीय बाल देखभाल बुनियादी ढाँचा मिशन' शुरू करने और 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का सुझाव दिया है। कार्यस्थल पर क्रेच, क्लस्टर-आधारित साझा क्रेच और MSME के बीच संसाधन साझाकरण जैसे विकल्प भी सुझाए गए हैं।

स्तनपान कराने वाली कामकाजी माताओं का मौजूदा ब्रेक 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने और कार्यस्थलों पर अलग स्तनपान कक्ष अनिवार्य करने की सिफारिश भी शामिल है। बाल देखभाल नीतियाँ अपनाने वाले नियोक्ताओं को टैक्स प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

आगे की राह

NCW की ये सिफारिशें अभी प्रस्ताव के रूप में हैं और इन्हें लागू करने के लिए संसदीय अनुमोदन या नीतिगत बदलाव की आवश्यकता होगी। आयोग ने नियमों का पालन न करने वाले नियोक्ताओं के लिए कड़े दंड और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र बनाने की भी सिफारिश की है। इन सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रिया और उनके क्रियान्वयन की समयसीमा अभी तक घोषित नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — 2017 में मातृत्व लाभ अधिनियम संशोधन के बाद भी बड़े पैमाने पर अनुपालन नहीं हुआ। 90% महिला कामगारों का लाभों से बाहर होना दर्शाता है कि कानून बनाना और उसे लागू करना दो अलग बातें हैं। निजी और असंगठित क्षेत्र पर बिना मज़बूत निगरानी तंत्र और वित्तपोषण के ये प्रस्ताव महज कागज़ी दस्तावेज़ बन सकते हैं। जब तक सरकार स्पष्ट समयसीमा, बजट आवंटन और दंड प्रावधानों के साथ इन सिफारिशों को स्वीकार नहीं करती, तब तक इनकी वास्तविक प्रभावशीलता संदिग्ध रहेगी।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय महिला आयोग की 37 सिफारिशें किस विषय पर हैं?
ये सिफारिशें मातृत्व एवं बाल देखभाल से संबंधित कानूनों में सुधार पर केंद्रित हैं। इनमें निजी क्षेत्र में CCL, जेंडर न्यूट्रल पैरेंटल लीव, अनिवार्य पितृत्व अवकाश और 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें शामिल हैं।
निजी क्षेत्र की महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव कब मिलेगी?
NCW ने चरणबद्ध तरीके से पहले बड़े उद्योगों और बाद में MSME तक CCL विस्तार का प्रस्ताव दिया है। हालाँकि ये अभी सिफारिशें हैं — लागू होने के लिए सरकारी अनुमोदन और संसदीय प्रक्रिया आवश्यक होगी।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को क्या लाभ मिलने का प्रस्ताव है?
NCW ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मातृत्व एवं चाइल्ड केयर लाभों के दायरे में लाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार 90% से अधिक महिला कामगार अभी इन लाभों से वंचित हैं, जिसे दूर करने के लिए सोशल सिक्योरिटी कोड में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
पितृत्व अवकाश के बारे में NCW का क्या प्रस्ताव है?
NCW ने निजी और असंगठित क्षेत्र में भी अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश लागू करने की सिफारिश की है। आयोग का मानना है कि पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए ताकि बच्चे की देखभाल में पिता की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्रीय बाल देखभाल बुनियादी ढाँचा मिशन क्या है?
यह NCW द्वारा प्रस्तावित एक केंद्र-राज्य सहयोग मिशन है, जिसका लक्ष्य 2030 तक देशभर में 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करना है। इसमें कार्यस्थल क्रेच, क्लस्टर-आधारित साझा क्रेच और MSME के बीच संसाधन साझाकरण के विकल्प शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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