राष्ट्रीय महिला आयोग की केंद्र को 37 सिफारिशें: निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव, 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटों का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 2 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार को मातृत्व एवं बाल देखभाल व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए 37 सिफारिशें सौंपी हैं, जिनमें निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव (CCL), सभी क्षेत्रों में अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश और 2030 तक देशभर में 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का प्रस्ताव शामिल है। ये सिफारिशें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी गई हैं।
सिफारिशों की पृष्ठभूमि
आयोग की यह रिपोर्ट 5 मई 2026 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श के दौरान हुई विस्तृत चर्चाओं पर आधारित है। रिपोर्ट में नौ प्रमुख क्षेत्रों में सुधार के प्रस्ताव दिए गए हैं — मातृत्व लाभ, चाइल्ड केयर लीव, पितृत्व अवकाश, बाल देखभाल बुनियादी ढाँचा, स्तनपान सुविधाएँ, निजी क्षेत्र का समावेश, कानूनों में तालमेल, प्रभावी क्रियान्वयन और कार्यस्थल भेदभाव की रोकथाम।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 10 आयोग को महिलाओं से संबंधित मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने और संशोधन की सिफारिश करने का अधिकार देती है।
असंगठित और गिग श्रमिकों पर विशेष जोर
रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत से अधिक महिला कामगार अभी मातृत्व एवं बाल देखभाल लाभों के प्रभावी दायरे से बाहर हैं। NCW ने असंगठित क्षेत्र के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी इन लाभों के दायरे में लाने की सिफारिश की है।
इसके अलावा आयोग ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 की धारा 109 के अंतर्गत अलग से 'मैटरनिटी एंड चाइल्डकेयर फंड' बनाने और उसमें सरकार व नियोक्ताओं, दोनों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रस्ताव दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिला श्रम बल भागीदारी दर को बढ़ाने पर नीतिगत बहस तेज हो रही है।
चाइल्ड केयर लीव में जेंडर न्यूट्रल बदलाव का प्रस्ताव
NCW ने मौजूदा 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव को माता और पिता के बीच 365-365 दिनों में समान रूप से बाँटने का सुझाव दिया है। यदि दोनों एक ही संस्थान में कार्यरत हों, तो एक साझा लीव पूल का विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है।
शून्य से दो वर्ष की उम्र के बच्चों की देखभाल के लिए 60:40 के अनुपात में प्राथमिक और द्वितीयक देखभालकर्ता के बीच छुट्टी वितरण का मॉडल भी सुझाया गया है। आयोग ने नॉर्डिक देशों की साझा पैरेंटल लीव प्रणाली को आदर्श मानते हुए भारत में भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की सिफारिश की है।
मातृत्व लाभ में समानता और विस्तार
आयोग ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) को सभी पात्र महिलाओं के लिए सार्वभौमिक और कानूनी अधिकार बनाने का सुझाव दिया है। जैविक, गोद लेने वाली और सरोगेसी के माध्यम से माँ बनने वाली महिलाओं के बीच मातृत्व लाभ में समानता लाने की भी बात कही गई है।
गोद लेने वाली और कमीशनिंग माताओं की छुट्टी मौजूदा 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही चाइल्ड केयर लीव में दो बच्चों की मौजूदा सीमा पर पुनर्विचार करते हुए तीसरे बच्चे को भी इसके दायरे में लाने का प्रस्ताव है।
क्रेच बुनियादी ढाँचा और कार्यस्थल सुधार
NCW ने केंद्र और राज्यों के सहयोग से 'राष्ट्रीय बाल देखभाल बुनियादी ढाँचा मिशन' शुरू करने और 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का सुझाव दिया है। कार्यस्थल पर क्रेच, क्लस्टर-आधारित साझा क्रेच और MSME के बीच संसाधन साझाकरण जैसे विकल्प भी सुझाए गए हैं।
स्तनपान कराने वाली कामकाजी माताओं का मौजूदा ब्रेक 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने और कार्यस्थलों पर अलग स्तनपान कक्ष अनिवार्य करने की सिफारिश भी शामिल है। बाल देखभाल नीतियाँ अपनाने वाले नियोक्ताओं को टैक्स प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
आगे की राह
NCW की ये सिफारिशें अभी प्रस्ताव के रूप में हैं और इन्हें लागू करने के लिए संसदीय अनुमोदन या नीतिगत बदलाव की आवश्यकता होगी। आयोग ने नियमों का पालन न करने वाले नियोक्ताओं के लिए कड़े दंड और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र बनाने की भी सिफारिश की है। इन सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रिया और उनके क्रियान्वयन की समयसीमा अभी तक घोषित नहीं हुई है।