6 अगस्त 2026
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नीति आयोग: देखभाल क्षेत्र में कौशल विकास से भारत बन सकता है वैश्विक नेता, लाखों रोजगार का अवसर

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नीति आयोग: देखभाल क्षेत्र में कौशल विकास से भारत बन सकता है वैश्विक नेता, लाखों रोजगार का अवसर

सारांश

नीति आयोग की नई रिपोर्ट देखभाल क्षेत्र को महज सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और वैश्विक ताकत का अगला मोर्चा बताती है। प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की वैश्विक मांग को भुनाने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य से जोड़ने की यह पहल नीति निर्माण में एक नई सोच को दर्शाती है।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने 6 अगस्त 2026 को देखभाल क्षेत्र पर एक व्यापक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कौशल विकास और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में देखभाल कार्य को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की गई है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि वैश्विक केयरगिवर मांग भारत के लिए आर्थिक नेतृत्व का अवसर है।
बालासुब्रमण्यम ने इसे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए सामाजिक समावेश और आजीविका सृजन का माध्यम बताया।
रिपोर्ट में राष्ट्रीय देखभाल नीति और राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद के गठन का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।

नीति आयोग ने 6 अगस्त 2026 को जारी एक नई रिपोर्ट में कहा है कि देश में देखभाल क्षेत्र (केयर सेक्टर) में कुशल पेशेवरों की एक मजबूत फौज तैयार करने की तत्काल आवश्यकता है, जो न केवल घरेलू मांग को पूरा करे बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ करे। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र रोजगार सृजन और आर्थिक मूल्य निर्माण के लिहाज से भारत के लिए एक अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करता है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

नीति आयोग की इस रिपोर्ट में देखभालकर्ताओं को पूरी देखभाल व्यवस्था का केंद्रबिंदु बताया गया है। रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि देखभाल कार्य को एक कुशल, सम्मानजनक और मूल्यवान पेशे के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण देखभाल सेवाएं, पेशेवर पहचान, कार्यबल कल्याण, संस्थागत सहयोग और परिवारों व समुदायों को किफायती सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।

रिपोर्ट में नीति निर्माण, पेशेवर मान्यता, कार्यबल विकास, वैश्विक सहयोग, सामाजिक सुरक्षा और परिवार-समुदाय आधारित देखभाल सहित कई रणनीतिक स्तंभों पर सिफारिशें की गई हैं।

वैश्विक अवसर और भारत की भूमिका

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर केयरगिवर्स की बढ़ती मांग भारत के लिए एक अनूठा अवसर है। उनके अनुसार, इसके माध्यम से भारत पारंपरिक देखभाल सेवाओं में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है, बड़े आर्थिक मूल्य का सृजन कर सकता है और रोजगार के नए द्वार खोल सकता है।

लाहिड़ी ने यह भी कहा कि इससे देखभालकर्ताओं को बेहतर पहचान और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान-आधारित विशेषज्ञता और सॉफ्ट पावर को भी वैश्विक मंच पर मजबूती मिलेगी।

सभ्यतागत मूल्यों से जुड़ाव

नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि 'सेवा और संवेदना' हमेशा से भारत की सभ्यतागत विचारधारा के केंद्र में रही हैं, और देखभाल करना इन शाश्वत मूल्यों का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत देखभाल प्रणाली सामाजिक समावेश को सुदृढ़ करेगी, समुदायों को सशक्त बनाएगी और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत की जनसंख्या तेजी से बुजुर्ग हो रही है और वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित देखभाल पेशेवरों की कमी गहराती जा रही है।

राष्ट्रीय देखभाल नीति का रोडमैप

नीति आयोग ने राष्ट्रीय देखभाल नीति और राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद के माध्यम से एक संगठित, पेशेवर और भविष्य के लिए तैयार देखभाल प्रणाली का रोडमैप प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट का उद्देश्य भारत के देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र को सुलभ, व्यावसायिक और टिकाऊ बनाना है।

आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की नीतिगत दिशा तय करने में यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती इरादे को जमीनी क्रियान्वयन में बदलने की है। भारत में अनौपचारिक देखभाल कार्य का बड़ा हिस्सा महिलाएं करती हैं, जिन्हें न पहचान मिलती है, न पारिश्रमिक — रिपोर्ट इस संरचनात्मक असमानता को स्वीकार तो करती है, पर सुधार की समयसीमा और वित्तपोषण का स्पष्ट उल्लेख नहीं करती। 'राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद' जैसे प्रस्ताव तब तक कागज पर रहेंगे जब तक उन्हें बजटीय आवंटन और विधायी समर्थन न मिले। वैश्विक बाजार में भारत की संभावना वास्तविक है, पर उसे भुनाने के लिए प्रमाणन मानकों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित करना अगली बड़ी परीक्षा होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग की देखभाल क्षेत्र रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
नीति आयोग की इस रिपोर्ट में देखभाल कार्य को एक कुशल और सम्मानजनक पेशे के रूप में मान्यता देने, कार्यबल विकास और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट राष्ट्रीय देखभाल नीति और राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद के जरिए एक संगठित देखभाल प्रणाली का रोडमैप भी प्रस्तुत करती है।
भारत देखभाल क्षेत्र में वैश्विक नेता कैसे बन सकता है?
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित केयरगिवर्स की बढ़ती मांग भारत को इस क्षेत्र में नेतृत्व का अवसर देती है। भारत की सांस्कृतिक विरासत, सॉफ्ट पावर और बड़े कार्यबल के दम पर यह संभव है, बशर्ते कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाए।
राष्ट्रीय देखभाल नीति क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय देखभाल नीति नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित एक नीतिगत ढांचा है, जिसका उद्देश्य भारत में देखभाल सेवाओं को संगठित, पेशेवर और सुलभ बनाना है। यह राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद के माध्यम से पेशेवर मान्यता, सामाजिक सुरक्षा और कार्यबल कल्याण सुनिश्चित करेगी।
देखभाल क्षेत्र में कौशल विकास से किसे फायदा होगा?
इस क्षेत्र में कौशल विकास से देखभालकर्ताओं को बेहतर पहचान, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और बच्चों की देखभाल की जरूरत वाले परिवारों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध होंगी।
विकसित भारत 2047 से देखभाल क्षेत्र का क्या संबंध है?
नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम के अनुसार, एक मजबूत देखभाल प्रणाली सामाजिक समावेश, समुदायों के सशक्तिकरण और गुणवत्तापूर्ण आजीविका सृजन के जरिए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
राष्ट्र प्रेस
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