मेवात में 'पारो/मोलकी' प्रथा की जांच को NCW ने बनाई 5 सदस्यीय टीम, 10 दिन में मांगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 27 अगस्त 2026 को हरियाणा के मेवात, विशेषकर नूंह जिले में कथित 'दुल्हन खरीद-फरोख्त' — स्थानीय स्तर पर 'पारो' या 'मोलकी' कहलाने वाली प्रथा — की जांच के लिए एक पाँच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया है। आयोग ने इस समिति को 10 कार्य दिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया है।
क्या है 'पारो/मोलकी' प्रथा
आयोग के अनुसार, इस प्रथा में दूसरे राज्यों के आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की महिलाओं को बिचौलियों के ज़रिए मेवात क्षेत्र में लाकर स्थानीय पुरुषों से विवाह कराया जाता है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में बिचौलियों या महिला के परिवार को धनराशि दी जाती है। कुछ मामलों में महिलाओं को कथित तौर पर दोबारा बेचे जाने, लगातार शोषण और हिंसा का सामना करना पड़ता है।
NCW ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह जांच शुरू की है। आयोग का मानना है कि इन आरोपों में अंतरराज्यीय मानव तस्करी और महिलाओं के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की गंभीर आशंका निहित है।
समिति की संरचना
तथ्य-खोज समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के पूर्व महानिदेशक और सेवानिवृत्त IPS अधिकारी पी.एम. नायर करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक बी.के. सिन्हा, दिल्ली विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर सीमा सिंह, फिल्म निर्माता एवं अभिनेत्री तृप्ति भोइर और NCW के विधि अधिकारी मनमोहन वर्मा शामिल हैं।
जांच का दायरा
समिति 'पारो/मोलकी' प्रथा की व्यापकता, स्वरूप और संचालन की पड़ताल करेगी। इसके साथ ही बिचौलियों की भूमिका और राज्यों के बीच सक्रिय संभावित मानव तस्करी नेटवर्क की भी जांच होगी। महिलाओं की कानूनी पहचान, उत्तराधिकार अधिकार, बाल विवाह, सामाजिक कलंक, न्याय और सरकारी सेवाओं तक पहुँच जैसे मुद्दे भी समीक्षा के दायरे में रहेंगे।
NCW की टीम नूंह/मेवात और आवश्यकतानुसार अन्य स्थानों का दौरा कर पीड़ित महिलाओं, स्थानीय निवासियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा सामाजिक संगठनों से बातचीत करेगी।
NCW अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
NCW की अध्यक्ष विजया राहतकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'किसी महिला को शादी के नाम पर खरीदा-बेचा नहीं जा सकता और न ही उसे वस्तु की तरह देखा जा सकता है। विवाह सम्मान और समानता का रिश्ता है, कोई लेन-देन नहीं।' उन्होंने कहा कि यदि जांच में मानव तस्करी, शोषण या व्यवस्था की विफलता सामने आती है, तो आयोग ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े और प्रभावी कदमों की सिफारिश करेगा।
आगे क्या होगा
समिति की रिपोर्ट आने के बाद NCW अपनी सिफारिशें संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों को भेजेगा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मानव तस्करी-रोधी कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है। समिति की रिपोर्ट मेवात में महिला अधिकारों की स्थिति पर नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।