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कर्नाटक में SIR प्रक्रिया पर NDA का हमला, राज्यपाल गहलोत से हस्तक्षेप की माँग

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कर्नाटक में SIR प्रक्रिया पर NDA का हमला, राज्यपाल गहलोत से हस्तक्षेप की माँग

सारांश

कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एनडीए और कांग्रेस सरकार के बीच सीधा टकराव। कुमारस्वामी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल गहलोत को ज्ञापन सौंपा — आरोप है कि सरकार संवैधानिक चुनाव प्रक्रिया को दबाने के लिए पुलिस मशीनरी का उपयोग कर रही है।

मुख्य बातें

अशोक के नेतृत्व में एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने 6 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन सौंपा।
आरोप है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया पर अनुचित दबाव डाल रही है।
बेलगावी, बीदर, बल्लारी और मैसूर समेत कई जिलों में फॉर्म-7 दाखिल करने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई।
एनडीए ने BNS, 2023 के तहत झूठे मुकदमों पर रोक लगाने के लिए राज्यपाल से निर्देश जारी करने की अपील की।
शिवकुमार और मंत्रियों पर रोक के बावजूद चुनाव कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करने का आरोप।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं स्टील मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और चलवाडी नारायणस्वामी के नेतृत्व में एनडीए के एक प्रतिनिधिमंडल ने 6 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के लोक भवन में राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की संवैधानिक प्रक्रिया पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कथित तौर पर अनुचित दबाव डालने पर गहरी चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपते हुए फॉर्म-7 आवेदन के ज़रिए आपत्ति दर्ज कराने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।

मुख्य आरोप और ज्ञापन की विषय-वस्तु

भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] के विधायकों व सांसदों से बने इस प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव कार्यालय (Chief Electoral Office) राज्य सरकार के दबाव में आ गया है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से यह सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी करने की अपील की कि SIR प्रक्रिया के संदर्भ में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत BJP कार्यकर्ताओं सहित आम नागरिकों के विरुद्ध झूठी और अनावश्यक एफआईआर दर्ज न की जाएँ।

SIR प्रक्रिया की कानूनी वैधता पर एनडीए का तर्क

ज्ञापन में कहा गया कि SIR प्रक्रिया वर्तमान में नोटिस जारी करने तथा दावों और आपत्तियों के निपटारे के चरण में सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 के नियम 13(2) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति फॉर्म-7 में दर्ज कराई जा सकती है और ऐसा करना एक पूरी तरह वैध संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने 16 जनवरी 2026 के भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के संचार और मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल्स, 2023 का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में सुधार के लिए एक साथ आवेदन दाखिल किए जा सकते हैं।

ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को जमा किए जाने वाले फॉर्म-7 आवेदनों की संख्या पर कोई सीमा नहीं है और सभी आपत्तियों का चुनाव अधिकारियों द्वारा क्रॉस-वेरिफिकेशन अनिवार्य है। बूथ लेवल एजेंट भी एकाधिक फॉर्म-7 आवेदन जमा कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर आरोप

एनडीए नेताओं ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कैबिनेट मंत्रियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने रोक के आदेशों के बावजूद कथित तौर पर मुख्य चुनाव कार्यालय के परिसर में विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कार्यालय के सामान्य कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। ज्ञापन के अनुसार इन कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव देने वाला एक सर्कुलर जारी हुआ, जिसने फॉर्म-7 दाखिल करने वालों में भय का वातावरण उत्पन्न कर दिया।

एफआईआर और भय का माहौल

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बेलगावी, बीदर, बल्लारी और मैसूर समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। उनका कहना था कि इस सर्कुलर ने पुलिस मशीनरी के उपयोग को वैध ठहराते हुए SIR प्रक्रिया में दखलंदाज़ी का रास्ता खोल दिया है और BNS, 2023 के तहत आपराधिक मुकदमों की आशंका से नागरिक अब अपने वैध संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने से डर रहे हैं।

राज्यपाल से माँग और आगे की राह

एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल गहलोत से आग्रह किया कि वे कर्नाटक सरकार को उचित निर्देश जारी करें ताकि फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराने वालों के हितों की सुरक्षा हो सके। प्रतिनिधिमंडल ने ज़ोर दिया कि न्याय के हित में और निर्वाचन प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए राज्यपाल का हस्तक्षेप आवश्यक है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक केंद्रीय मुद्दा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संवैधानिक रूप से स्वतंत्र है, यदि वास्तव में दबाव में आ गया तो यह संस्थागत स्वायत्तता के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करता है। राज्यपाल का हस्तक्षेप इस मामले को राजनीतिक से संवैधानिक बना देगा, और इसकी प्रतिक्रिया आने वाले चुनावों में दोनों पक्षों के लिए कथा-निर्माण का अवसर बनेगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाने और पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने का काम होता है। यह प्रक्रिया वर्तमान में कर्नाटक में नोटिस और दावों-आपत्तियों के निपटारे के चरण में है।
एनडीए ने राज्यपाल को ज्ञापन क्यों सौंपा?
एनडीए प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि कांग्रेस सरकार मुख्य चुनाव कार्यालय पर दबाव डाल रही है और फॉर्म-7 के जरिए वैध आपत्ति दर्ज कराने वाले नागरिकों व BJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ BNS, 2023 के तहत झूठी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। इसीलिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग की गई है।
फॉर्म-7 क्या है और इसे कौन दाखिल कर सकता है?
फॉर्म-7 वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है। इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 के नियम 13(2) के तहत कोई भी व्यक्ति जिसका नाम मतदाता सूची में पहले से दर्ज है, यह आपत्ति फाइल कर सकता है और बूथ लेवल एजेंट एकाधिक फॉर्म-7 जमा कर सकते हैं।
किन जिलों में एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई है?
एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में बेलगावी, बीदर, बल्लारी और मैसूर समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज होने का उल्लेख किया है। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार इन मुकदमों ने फॉर्म-7 दाखिल करने वाले नागरिकों में भय का वातावरण बना दिया है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कैबिनेट मंत्रियों ने रोक के आदेशों के बावजूद कथित तौर पर मुख्य चुनाव कार्यालय के परिसर में विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कार्यालय के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ा और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव करने वाला सर्कुलर जारी हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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