14 अक्टूबर 2026
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अमित शाह के बयान पर NDA नेताओं की मुहर: 'बैलेट हो या EVM, कांग्रेस हारना तय'

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अमित शाह के बयान पर NDA नेताओं की मुहर: 'बैलेट हो या EVM, कांग्रेस हारना तय'

सारांश

अमित शाह के बैलेट-EVM बयान को NDA ने हथियार बना लिया। बिहार से रांची तक, BJP और JDU नेताओं ने एक सुर में कहा — जनता से जुड़ाव और काम ही जीत की गारंटी है, माध्यम नहीं। झारखंड चुनाव से पहले घुसपैठ का मुद्दा भी सामने आया।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह के 'गुजरात में बैलेट से वोटिंग हुई, फिर भी कांग्रेस हारी' बयान पर बिहार और झारखंड के NDA नेताओं ने 14 अक्टूबर 2026 को समर्थन जताया।
बिहार मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि राहुल गांधी को BJP से काम करने का तरीका सीखना चाहिए।
BJP प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने दिल्ली , पंजाब और सिलचर के बैलेट चुनावों में कांग्रेस की हार का हवाला दिया।
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा — वोट काम पर मिलते हैं, ईवीएम या बैलेट पर नहीं।
रांची से BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की वोटर लिस्ट में तीन अफगानी नागरिकों के नाम होने का आरोप लगाया।

गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को — कि गुजरात में बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस हारी — बिहार और झारखंड के एनडीए नेताओं ने 14 अक्टूबर 2026 को खुलकर समर्थन दिया। नेताओं ने एकसुर में कहा कि कांग्रेस की हार का कारण ईवीएम या बैलेट पेपर नहीं, बल्कि पार्टी का जनता से कटा होना और काम न करना है।

मुख्य घटनाक्रम

पटना में बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने अमित शाह के बयान की तारीफ करते हुए कहा, 'गृह मंत्री अमित शाह का यह कहना सही है कि राहुल गांधी को भाजपा से सीखना चाहिए।' उन्होंने जोड़ा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चाहे गुजरात हो या अन्य राज्य, स्थानीय निकाय चुनाव हो या उपचुनाव, हर जगह जीत रही है।

यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'राहुल गांधी और उनकी रामलीला मंडली को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि क्या वे 2029 में भी मौजूद रहेंगे या नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम पर भरोसा जताया है और 2029 में मोदी सरकार फिर सत्ता में आएगी।

BJP प्रवक्ता की दलील

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने पटना में कहा, 'बैलेट पेपर से चुनाव हो रहा है — कांग्रेस हार रही है। ईवीएम से चुनाव हो रहा है — कांग्रेस हार रही है। ज्ञानेश कुमार से पहले चुनाव होता था, कांग्रेस हार रही थी; ज्ञानेश कुमार के बाद भी कांग्रेस हारेगी।'

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ, पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ और असम के सिलचर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ बैलेट से चुनाव हुए, फिर भी कांग्रेस हारी। गुरु प्रकाश ने कहा कि असली मुद्दा 'कुछ परिवारों की ठेकेदारी और सामंतवादी मानसिकता' है जो अपनी मठाधीशी बनाए रखना चाहते हैं।

JDU का समर्थन

जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी शाह के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'बैलेट या ईवीएम से नहीं, वोट आपको आपके काम पर मिलते हैं। गुजरात के निकाय चुनाव के नतीजे इसकी तस्दीक करते हैं।' रंजन ने स्पष्ट किया कि जो जनता के बीच सक्रिय हैं और जिनके काम से लोगों की जिंदगी में बदलाव आया है, जीत उन्हीं की होगी — चाहे मतदान का माध्यम कोई भी हो।

झारखंड से BJP का पलटवार

रांची में BJP के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने अमित शाह के बयान को 'आई-ओपनिंग स्टेटमेंट' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर (SIR) के मुद्दे का विरोध कर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

शाहदेव ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार राहुल गांधी के सहयोग से चल रही है और झारखंड की वोटर लिस्ट में तीन अफगानी नागरिकों के नाम भी शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विदेशी नागरिकों को देश की मतदाता सूची से हटाने का कार्यक्रम चल रहा है, तो राहुल गांधी को इसमें आपत्ति क्यों है।

राजनीतिक संदर्भ

यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हुई है जब झारखंड में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं और ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष का सवाल एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। गौरतलब है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता के नाम पर बैलेट पेपर की वापसी की माँग करते रहे हैं। NDA का पलटवार इसी माँग को निरस्त करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

आगे आने वाले हफ्तों में झारखंड चुनाव प्रचार और तेज़ होने की उम्मीद है, जिसमें घुसपैठ और वोटर लिस्ट जैसे मुद्दे केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें EVM विवाद को कांग्रेस की 'बहानेबाज़ी' के रूप में पेश किया जा रहा है। घुसपैठ और वोटर लिस्ट के आरोप इसी रणनीति का हिस्सा हैं — जो तथ्यात्मक सत्यापन की माँग करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को 'राजनीतिक प्रतिक्रिया' तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि वोटर लिस्ट में विदेशी नागरिकों के नाम होने के दावे की स्वतंत्र जाँच हुई या नहीं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह का वह बयान क्या था जिस पर NDA नेताओं ने प्रतिक्रिया दी?
अमित शाह ने कहा था कि गुजरात में बैलेट पेपर से वोटिंग हुई, फिर भी कांग्रेस हारी — इस बयान का मतलब यह था कि कांग्रेस की हार का कारण ईवीएम नहीं, बल्कि पार्टी का काम और जनाधार है। बिहार और झारखंड के NDA नेताओं ने इस बयान का समर्थन किया।
बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने क्या कहा?
राम कृपाल यादव ने कहा कि राहुल गांधी को भाजपा से काम करने का तरीका सीखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 2029 में मोदी सरकार फिर सत्ता में आएगी और राहुल गांधी को अपनी पार्टी के अस्तित्व की चिंता करनी चाहिए।
BJP प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कांग्रेस की हार के लिए क्या उदाहरण दिए?
गुरु प्रकाश ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ, पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ और असम के सिलचर का उदाहरण दिया, जहाँ बैलेट पेपर से चुनाव हुए लेकिन कांग्रेस हारी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हार का कारण पारिवारिक ठेकेदारी और सामंतवादी मानसिकता है।
झारखंड में BJP ने क्या आरोप लगाए?
रांची में BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने दावा किया कि झारखंड की वोटर लिस्ट में तीन अफगानी नागरिकों के नाम शामिल थे। उन्होंने राहुल गांधी पर SIR कार्यक्रम का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने का आरोप भी लगाया।
इन बयानों का झारखंड चुनाव से क्या संबंध है?
ये बयान झारखंड विधानसभा चुनाव की आहट के बीच आए हैं। NDA घुसपैठ और वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडे में केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है, जबकि EVM विवाद को कांग्रेस की हार का 'बहाना' बताकर खारिज कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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