अमित शाह के बयान पर NDA नेताओं की मुहर: 'बैलेट हो या EVM, कांग्रेस हारना तय'
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को — कि गुजरात में बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस हारी — बिहार और झारखंड के एनडीए नेताओं ने 14 अक्टूबर 2026 को खुलकर समर्थन दिया। नेताओं ने एकसुर में कहा कि कांग्रेस की हार का कारण ईवीएम या बैलेट पेपर नहीं, बल्कि पार्टी का जनता से कटा होना और काम न करना है।
मुख्य घटनाक्रम
पटना में बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने अमित शाह के बयान की तारीफ करते हुए कहा, 'गृह मंत्री अमित शाह का यह कहना सही है कि राहुल गांधी को भाजपा से सीखना चाहिए।' उन्होंने जोड़ा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चाहे गुजरात हो या अन्य राज्य, स्थानीय निकाय चुनाव हो या उपचुनाव, हर जगह जीत रही है।
यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'राहुल गांधी और उनकी रामलीला मंडली को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि क्या वे 2029 में भी मौजूद रहेंगे या नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम पर भरोसा जताया है और 2029 में मोदी सरकार फिर सत्ता में आएगी।
BJP प्रवक्ता की दलील
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने पटना में कहा, 'बैलेट पेपर से चुनाव हो रहा है — कांग्रेस हार रही है। ईवीएम से चुनाव हो रहा है — कांग्रेस हार रही है। ज्ञानेश कुमार से पहले चुनाव होता था, कांग्रेस हार रही थी; ज्ञानेश कुमार के बाद भी कांग्रेस हारेगी।'
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ, पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ और असम के सिलचर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ बैलेट से चुनाव हुए, फिर भी कांग्रेस हारी। गुरु प्रकाश ने कहा कि असली मुद्दा 'कुछ परिवारों की ठेकेदारी और सामंतवादी मानसिकता' है जो अपनी मठाधीशी बनाए रखना चाहते हैं।
JDU का समर्थन
जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी शाह के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'बैलेट या ईवीएम से नहीं, वोट आपको आपके काम पर मिलते हैं। गुजरात के निकाय चुनाव के नतीजे इसकी तस्दीक करते हैं।' रंजन ने स्पष्ट किया कि जो जनता के बीच सक्रिय हैं और जिनके काम से लोगों की जिंदगी में बदलाव आया है, जीत उन्हीं की होगी — चाहे मतदान का माध्यम कोई भी हो।
झारखंड से BJP का पलटवार
रांची में BJP के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने अमित शाह के बयान को 'आई-ओपनिंग स्टेटमेंट' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर (SIR) के मुद्दे का विरोध कर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
शाहदेव ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार राहुल गांधी के सहयोग से चल रही है और झारखंड की वोटर लिस्ट में तीन अफगानी नागरिकों के नाम भी शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विदेशी नागरिकों को देश की मतदाता सूची से हटाने का कार्यक्रम चल रहा है, तो राहुल गांधी को इसमें आपत्ति क्यों है।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में हुई है जब झारखंड में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हो रही हैं और ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष का सवाल एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। गौरतलब है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता के नाम पर बैलेट पेपर की वापसी की माँग करते रहे हैं। NDA का पलटवार इसी माँग को निरस्त करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे आने वाले हफ्तों में झारखंड चुनाव प्रचार और तेज़ होने की उम्मीद है, जिसमें घुसपैठ और वोटर लिस्ट जैसे मुद्दे केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं।