बिहार एमएलसी चुनाव: NDA की 16 सीटों पर जीत, BJP-JDU बोले — बैलेट पेपर ने भी नकारा कांग्रेस को
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में एमएलसी चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) ने कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। 29 अक्टूबर 2026 को पटना में एनडीए नेताओं ने कहा कि चार राज्यों में विधान परिषद और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 28 सीटों पर हुए चुनावों में एनडीए ने 16 सीटें जीती हैं और जनता ने एक बार फिर विपक्ष को नकार दिया है। नेताओं ने विपक्ष से कहा कि बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों के नतीजों के बाद अब उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए।
मुख्य चुनाव परिणाम
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बताया कि 28 सीटों पर हुए चुनावों में एनडीए ने 16 सीटें जीती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक और बिहार में अपनी मौजूदा सीटें भी गंवा दी हैं। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर कांग्रेस को कहीं भी सफलता नहीं मिली।
BJP प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भारी बहुमत से जीत की बात करते हुए कहा कि पार्टी ने पिछली बार की तुलना में अधिक सीटें जीती हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सरावगी ने आरोप लगाया कि विपक्ष दोहरे मापदंड अपना रहा है। उनके अनुसार, जब विपक्ष चुनाव हार रहा था तब भी वह ईवीएम को सही बताता था, और अब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में हार के बाद भी उसके बयान विरोधाभासी हैं।
JDU का विपक्ष पर हमला
राजीव रंजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमएलसी चुनावों के नतीजों को लेकर जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब कांग्रेस और उसके इंडी गठबंधन के सहयोगियों को देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय जनहित से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दें और पार्टी की खराब स्थिति के कारणों पर आत्ममंथन करें।
1 नवंबर की रैली और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल
1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली को लेकर भी जदयू नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राजीव रंजन ने रैली से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि विपक्ष को खुद पता है कि इस आयोजन से उसे कोई बड़ी राजनीतिक सफलता मिलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने और सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर करने के विपक्षी कदमों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि न्यायिक और संसदीय रास्ते अपनाने के साथ-साथ सड़कों पर अराजकता फैलाने की कोशिश किस नज़रिए से देखी जानी चाहिए।
आगे क्या होगा
संजय झा ने कहा कि कुछ विपक्षी नेता प्रधानमंत्री को जनता से मिल रहे जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, और इसी वजह से कांग्रेस के साथ ऐसे तत्व जुड़ रहे हैं जो देश में अस्थिरता चाहते हैं। गौरतलब है कि यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब 1 नवंबर की इंडी गठबंधन की रैली से पहले राजनीतिक माहौल गर्म है। अगले कुछ दिनों में विपक्ष की रैली और उस पर सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगी।