नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रखा, 18 नवंबर को आदेश
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले में 14 आरोपियों पर आरोप तय करने के संबंध में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत अब 18 नवंबर 2026 को इस मामले में आदेश सुनाएगी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में करीब 20 हज़ार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है।
मामले का घटनाक्रम
CBI ने मई 2026 में नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण में केस दर्ज किया था। एजेंसी ने अपनी पहली चार्जशीट जुलाई 2026 में दाखिल की, जिस पर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 अगस्त 2026 को संज्ञान लिया था। गौरतलब है कि यह मामला देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की भविष्य की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, और न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।
आरोपियों की सूची
CBI ने जिन 14 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है, उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार शामिल हैं।
पेपर लीक कैसे हुआ — CBI का दावा
CBI के अनुसार, तीन विषय विशेषज्ञों ने नई दिल्ली स्थित NTA कार्यालय के गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय जब उनकी तलाशी नहीं ली गई, तो उन्होंने अलग-अलग तरीकों से परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए। जीव विज्ञान (वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान) के प्रश्न तेजस दभाडे ने 20 और 21 अप्रैल को स्नेहांजलि देशमुख और दिया शिंदे के नोट्स की फोटोकॉपी से टाइप किए थे।
ये नोट्स आरोपी मनीषा संजय वाघमारे ने धनंजय निवृत्ति लोखंडे के माध्यम से सत्यजीत सोलुंके और तेजस को उपलब्ध कराए थे। भौतिकी के लीक प्रश्नों वाले दो दस्तावेजों में से एक मनीषा संजय हवालदार के हस्तलेखन में है, जिसमें 9 पन्नों पर 68 प्रश्न दर्ज हैं। इन्हें 25 अप्रैल को व्हाट्सएप के ज़रिए सह-आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को भेजा गया। इससे पहले 14 अप्रैल 2026 को यही प्रश्न आरोपी तेजस हर्षदकुमार शाह को दिए गए थे।
रसायन विज्ञान के लीक से संबंधित दस्तावेज साक्षी धूमल के हस्तलेखन में पाए गए, जो पुणे में आरोपी पीवी कुलकर्णी के आवास पर कक्षाएं लेने वाले अभ्यर्थियों में से एक थीं। एक अन्य दस्तावेज, जो खतीब मदीहा बेगम से बरामद हुआ, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के हस्तलेखन में था। मोटेगांवकर ने यह दस्तावेज अपने बेटे आदित्य के माध्यम से पीवी कुलकर्णी से प्राप्त किया था।
देशव्यापी तलाशी और साक्ष्य
CBI ने जांच के दौरान राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान लीक प्रश्नों की भौतिक प्रतियाँ और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी ने कुल 42 उपकरण और मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल तथा विकास बिवाल के आवाज़ के नमूने भी एकत्र किए हैं।
आगे की राह
अब सभी की निगाहें 18 नवंबर 2026 पर टिकी हैं, जब विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट आरोप तय करने पर अपना आदेश सुनाएगी। यह फैसला तय करेगा कि इस बहुचर्चित मामले में मुकदमे की औपचारिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और देश के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों को न्याय मिलने का मार्ग कितना प्रशस्त होता है।