नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: दिल्ली कोर्ट ने मनोज शिरुरे की जमानत याचिका खारिज, सीबीआई ने बताई अहम भूमिका
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 25 जुलाई 2026 को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी मनोज शिरुरे की जमानत याचिका खारिज कर दी। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत के समक्ष शिरुरे की भूमिका को इस पूरे लीक नेटवर्क में महत्वपूर्ण बताया, जिसके बाद अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
अदालत का फैसला
स्पेशल जज (सीबीआई) अजय गुप्ता ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर रखे गए साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद यह आदेश सुनाया। अदालत ने सीबीआई की इस दलील को स्वीकार किया कि शिरुरे की रिहाई से जाँच प्रभावित हो सकती है।
शिरुरे की कथित भूमिका
सीबीआई के अनुसार, मनोज शिरुरे ने तीन छात्रों को केमिस्ट्री के प्रश्न उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। इन तीन छात्रों में एक आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक का पुत्र भी शामिल था। जाँच एजेंसी का आरोप है कि शिरुरे ने आरोपी पीवी कुलकर्णी से इन छात्रों तक केमिस्ट्री के प्रश्न पहुँचाने में मदद की।
लीक नेटवर्क की संरचना
सीबीआई की जाँच के अनुसार, पुणे की एजुकेशन कंसल्टेंट मनीषा वाघमारे ने उन छात्रों को एकजुट करने में बिचौलिए की भूमिका निभाई, जिन्होंने विशेष कोचिंग सत्रों में शामिल होने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया। इन सत्रों में उन प्रश्नों पर चर्चा की गई और उन्हें लिखवाया गया, जो बाद में नीट-यूजी 2026 की परीक्षा में पूछे गए।
इन विशेष कक्षाओं को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा नियुक्त वरिष्ठ बॉटनी शिक्षिका मनीषा मांढरे संचालित करती थीं, जिन पर जीव विज्ञान पेपर लीक की कथित सह-मास्टरमाइंड होने का संदेह है। वहीं केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को इस कथित नेटवर्क का मुख्य सरगना माना जा रहा है। पुणे की एक अकादमी में फिजिक्स पढ़ाने वाले तेजस हर्षद शाह पर आरोप है कि उन्हें सह-आरोपी मनीषा संजय हवलदार से फिजिक्स के लीक प्रश्न प्राप्त हुए थे।
जाँच की स्थिति
सीबीआई ने इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने 12 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद विशेष टीमें गठित की गईं और देशभर में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए गए।
परीक्षा और आगे की राह
कथित गड़बड़ियों की आशंकाओं के चलते मूल परीक्षा रद्द किए जाने के बाद एनटीए ने 21 जून को नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की। यह मामला भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के संदर्भ में अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है, और आने वाले सुनवाइयों में और खुलासे होने की संभावना है।