नीट पेपर लीक: आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत पर फैसला 9 जून को, राऊ एवेन्यू कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली स्थित राऊ एवेन्यू कोर्ट ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले की आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर 5 जून 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में 9 जून 2026 को आदेश सुनाया जाएगा। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नीट परीक्षा घोटाले की जाँच का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) संचालित कर रही है।
बचाव पक्ष की दलीलें
मनीषा वाघमारे के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल एक प्रमाणित एजुकेशन काउंसलर हैं और काउंसलिंग सेवाओं से उनकी नियमित आय होती है। बचाव पक्ष के अनुसार, CBI जिस बैंक लेन-देन का उल्लेख कर रही है, वह ₹3.50 लाख की राशि थी, जो कथित तौर पर पैतृक संपत्ति की गिफ्ट डीड के माध्यम से प्राप्त हुई थी।
वकील ने यह भी बताया कि CBI ने मनीषा वाघमारे के घर पर दो बार तलाशी ली, परंतु वहाँ से न कोई नकद राशि और न ही कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। उनके बैंक खातों में भी किसी संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि नहीं हुई।
स्वास्थ्य आधार पर जमानत की माँग
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 47 वर्षीया मनीषा वाघमारे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं, जिनमें वर्टिगो और अन्य बीमारियाँ शामिल हैं। उन्हें हाल ही में जेल के अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा था। बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य स्थिति और जाँच में सहयोग की इच्छा को आधार बनाते हुए जमानत देने का अनुरोध किया।
हालाँकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य समस्याओं को जमानत का आधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि जेल प्रशासन के पास पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यदि किसी विशेष इलाज की ज़रूरत हो, तो उसके लिए अलग से आवेदन किया जा सकता है।
CBI का पक्ष और आरोप
CBI ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे स्वयं को एजुकेशन काउंसलर बताती हैं, जबकि वे एक ब्यूटी पार्लर भी संचालित करती हैं। जाँच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से जुड़े प्रश्नों को अन्य आरोपियों तक पहुँचाया और इसके बदले छात्रों से धनराशि ली।
CBI के अनुसार, उसके पास ऐसे छात्रों के बयान हैं जिन्होंने मनीषा को रकम देने की बात स्वीकार की है। अदालत ने कहा कि वह CBI द्वारा प्रस्तुत छात्रों के बयानों और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
आगे क्या होगा
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 9 जून 2026 को आने वाला आदेश तय करेगा कि मनीषा वाघमारे को जमानत मिलती है या नहीं। यह फैसला नीट घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियों पर भी मिसाल बन सकता है।