21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नीट पेपर लीक: आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत पर फैसला 9 जून को, राऊ एवेन्यू कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीट पेपर लीक: आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत पर फैसला 9 जून को, राऊ एवेन्यू कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश

सारांश

नीट पेपर लीक मामले में आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर राऊ एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। CBI ने छात्रों के बयानों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया, जबकि बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य समस्याओं और साफ बैंक रिकॉर्ड का तर्क दिया। 9 जून को आदेश आएगा।

मुख्य बातें

राऊ एवेन्यू कोर्ट ने 5 जून 2026 को नीट पेपर लीक आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
अदालत 9 जून 2026 को जमानत पर आदेश सुनाएगी।
बचाव पक्ष ने ₹3.50 लाख के बैंक लेन-देन को पैतृक संपत्ति की गिफ्ट डीड बताया; CBI की दो तलाशियों में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।
CBI ने आरोप लगाया कि मनीषा ने परीक्षा प्रश्न अन्य आरोपियों तक पहुँचाए और छात्रों से पैसे लिए; एजेंसी के पास छात्रों के बयान मौजूद हैं।
अदालत ने 47 वर्षीया आरोपी की स्वास्थ्य समस्याओं (वर्टिगो) को जमानत का आधार मानने से इनकार किया।

नई दिल्ली स्थित राऊ एवेन्यू कोर्ट ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले की आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर 5 जून 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में 9 जून 2026 को आदेश सुनाया जाएगा। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नीट परीक्षा घोटाले की जाँच का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) संचालित कर रही है।

बचाव पक्ष की दलीलें

मनीषा वाघमारे के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल एक प्रमाणित एजुकेशन काउंसलर हैं और काउंसलिंग सेवाओं से उनकी नियमित आय होती है। बचाव पक्ष के अनुसार, CBI जिस बैंक लेन-देन का उल्लेख कर रही है, वह ₹3.50 लाख की राशि थी, जो कथित तौर पर पैतृक संपत्ति की गिफ्ट डीड के माध्यम से प्राप्त हुई थी।

वकील ने यह भी बताया कि CBI ने मनीषा वाघमारे के घर पर दो बार तलाशी ली, परंतु वहाँ से न कोई नकद राशि और न ही कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। उनके बैंक खातों में भी किसी संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि नहीं हुई।

स्वास्थ्य आधार पर जमानत की माँग

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 47 वर्षीया मनीषा वाघमारे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं, जिनमें वर्टिगो और अन्य बीमारियाँ शामिल हैं। उन्हें हाल ही में जेल के अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा था। बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य स्थिति और जाँच में सहयोग की इच्छा को आधार बनाते हुए जमानत देने का अनुरोध किया।

हालाँकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य समस्याओं को जमानत का आधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि जेल प्रशासन के पास पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यदि किसी विशेष इलाज की ज़रूरत हो, तो उसके लिए अलग से आवेदन किया जा सकता है।

CBI का पक्ष और आरोप

CBI ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे स्वयं को एजुकेशन काउंसलर बताती हैं, जबकि वे एक ब्यूटी पार्लर भी संचालित करती हैं। जाँच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से जुड़े प्रश्नों को अन्य आरोपियों तक पहुँचाया और इसके बदले छात्रों से धनराशि ली।

CBI के अनुसार, उसके पास ऐसे छात्रों के बयान हैं जिन्होंने मनीषा को रकम देने की बात स्वीकार की है। अदालत ने कहा कि वह CBI द्वारा प्रस्तुत छात्रों के बयानों और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत अध्ययन करेगी।

आगे क्या होगा

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 9 जून 2026 को आने वाला आदेश तय करेगा कि मनीषा वाघमारे को जमानत मिलती है या नहीं। यह फैसला नीट घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियों पर भी मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्या वे अदालती कसौटी पर खरे उतरेंगे — क्योंकि अतीत में ऐसे कई हाई-प्रोफाइल मामलों में साक्ष्य की कमज़ोरी आरोपियों को राहत दिलाती रही है। 9 जून का फैसला न केवल मनीषा वाघमारे, बल्कि इस पूरे घोटाले की जाँच की दिशा के लिए भी अहम होगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीषा वाघमारे कौन हैं और नीट पेपर लीक से उनका क्या संबंध है?
मनीषा वाघमारे नीट पेपर लीक मामले की आरोपी हैं, जिन पर CBI का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से जुड़े प्रश्न अन्य आरोपियों तक पहुँचाए और इसके बदले छात्रों से धनराशि ली। वे स्वयं को एजुकेशन काउंसलर बताती हैं और एक ब्यूटी पार्लर भी संचालित करती हैं।
राऊ एवेन्यू कोर्ट मनीषा वाघमारे की जमानत पर कब फैसला सुनाएगी?
राऊ एवेन्यू कोर्ट 9 जून 2026 को मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर आदेश सुनाएगी। 5 जून को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
CBI ने जमानत का विरोध क्यों किया?
CBI ने आरोप लगाया कि मनीषा वाघमारे ने नीट परीक्षा के प्रश्न अन्य आरोपियों तक पहुँचाए और छात्रों से पैसे लिए। एजेंसी के पास ऐसे छात्रों के बयान हैं जिन्होंने मनीषा को रकम देने की बात स्वीकार की है।
बचाव पक्ष ने जमानत के लिए क्या तर्क दिए?
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि CBI की दो तलाशियों में कोई नकद या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, बैंक खातों में कोई संदिग्ध लेन-देन नहीं है, और ₹3.50 लाख की राशि पैतृक संपत्ति की गिफ्ट डीड से प्राप्त हुई थी। इसके अलावा, 47 वर्षीया आरोपी वर्टिगो सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं।
क्या स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिल सकती है?
अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य समस्याओं को जमानत का आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार जेल प्रशासन के पास पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं और विशेष इलाज के लिए अलग से आवेदन किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले