उदयपुर स्कूल छत हादसा: NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान, जिला मजिस्ट्रेट से 2 हफ्ते में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान के उदयपुर जिले के नारदा गांव स्थित एक जर्जर सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कक्षा की छत का प्लास्टर गिरने से तीन छात्रों के घायल होने की घटना का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने उदयपुर के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह हादसा 6 अक्टूबर 2026 को हुआ।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भिंडर पुलिस थाना क्षेत्र के नारदा गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में सुबह करीब 11 बजे कक्षा की छत का प्लास्टर अचानक बच्चों के ऊपर आ गिरा। उस समय कक्षा में 32 बच्चे मौजूद थे। 7 से 8 वर्ष की आयु के तीन बच्चों के सिर पर चोटें आईं।
गंभीर बात यह है कि हादसे के वक्त कक्षा में कोई शिक्षक उपस्थित नहीं था। घायल बच्चे खुद अपने घर पहुँचे, जिसके बाद उनके परिजन उन्हें भिंडर सरकारी अस्पताल ले गए, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।
NHRC का रुख और नोटिस
आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में दी गई जानकारी सत्य है, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। नोटिस में उम्मीद जताई गई है कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट में घायल छात्रों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का भी विवरण शामिल होगा।
NHRC का यह कदम उस व्यापक चिंता को रेखांकित करता है जो देशभर के जर्जर सरकारी स्कूलों की इमारतों को लेकर लंबे समय से बनी हुई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्कूल भवनों की जीर्णोद्धार की माँग पहले से उठती रही है।
स्कूल की स्थिति और प्रशासन की लापरवाही
स्कूल के प्रधानाध्यापक लालसिंह शक्तावत के अनुसार, यह विद्यालय भवन 2001 में बना था और इसमें दो कमरे व एक बरामदा है — तीनों अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं। विद्यालय में कक्षा 5 तक पढ़ाई होती है और कुल 37 बच्चे नामांकित हैं।
शक्तावत ने यह भी बताया कि स्कूल प्रशासन पहले ही शिक्षा विभाग को भवन की खस्ताहाल स्थिति से अवगत करा चुका था। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों को कई बार सूचित करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
हादसे के बाद की व्यवस्था
घटना के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर स्कूल भवन को तत्काल बंद कर दिया गया। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए पास के एक धार्मिक स्थल के निकट वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
आम जनता और बच्चों की सुरक्षा पर असर
यह घटना राजस्थान के उन सैकड़ों सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल उठाती है जो पुरानी और खराब रखरखाव वाली इमारतों में संचालित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण के 25 वर्ष से अधिक पुराने स्कूल भवनों की नियमित संरचनात्मक जाँच अनिवार्य की जानी चाहिए। अब NHRC की रिपोर्ट तलब के बाद राज्य सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा।