6 अक्टूबर 2026
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उदयपुर के सरकारी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरा, 5 छात्र घायल; विभाग को पहले ही दी गई थी जर्जर भवन की सूचना

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उदयपुर के सरकारी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरा, 5 छात्र घायल; विभाग को पहले ही दी गई थी जर्जर भवन की सूचना

सारांश

उदयपुर के नारदा गाँव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में छत का प्लास्टर 32 बच्चों के ऊपर आ गिरा — 5 घायल हुए। इमारत 2001 में बनी थी और शिक्षा विभाग को इसकी जर्जर हालत की पूर्व सूचना दी जा चुकी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह हादसा सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे की खस्ता हालत को उजागर करता है।

मुख्य बातें

6 अक्टूबर 2026 को उदयपुर जिले के नारदा गाँव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से 5 बच्चे घायल हुए।
हादसे के वक्त क्लासरूम में 32 बच्चे मौजूद थे; 3 को सिर में चोटें आईं और उन्हें भिंडर सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
स्कूल भवन 2001 में बना था; हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत के अनुसार शिक्षा विभाग को इमारत की जर्जर हालत की पहले ही सूचना दी गई थी।
एहतियात के तौर पर स्कूल भवन बंद ; अब कक्षाएँ 'माताजी का चबूतरा' के पास वैकल्पिक स्थान पर चलेंगी।
सीबीईओ राजेंद्र कुमार चौबीसा ने घटना के बाद स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीणों का आरोप — कई बार शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

उदयपुर जिले के भिंडर थाना क्षेत्र स्थित नारदा गाँव (वानियातलाई ग्राम पंचायत) के सरकारी प्राइमरी स्कूल में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 की सुबह एक कक्षा की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया, जिसमें पाँच बच्चे घायल हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब कमरे में 32 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। प्रशासन की जानकारी के अनुसार इमारत की जर्जर हालत को लेकर शिक्षा विभाग को पहले ही सूचित किया जा चुका था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

हादसे का विवरण

अधिकारियों के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे क्लासरूम की छत से प्लास्टर जोरदार आवाज के साथ नीचे आ गिरा। उस समय तीन अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से छात्रों और स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई।

तीन बच्चों के सिर में चोटें आईं, जबकि दो अन्य को मामूली चोटें लगीं। हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत ने बताया कि पहली कक्षा के छात्र कृष्णा कुमारी और कार्तिक, तथा पाँचवीं कक्षा के छात्र गणेश लाल के सिर में चोटें आईं। तीनों को भिंडर सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।

इमारत की स्थिति और पूर्व शिकायतें

हेडमास्टर शक्तावत के अनुसार, यह स्कूल भवन 2001 में बनाया गया था। बीते दो दशकों में इमारत की हालत लगातार बिगड़ती गई और यह जर्जर होती चली गई। स्कूल में दो कमरे और एक बरामदा हैं — ग्रामीणों का कहना है कि ये सभी खराब स्थिति में हैं।

हेडमास्टर ने स्पष्ट किया कि स्कूल प्रबंधन ने इमारत की दयनीय दशा के बारे में शिक्षा विभाग को पूर्व में ही सूचित कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन से कई बार शिकायतें की गईं, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही भिंडर के खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) राजेंद्र कुमार चौबीसा ने स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के बाद एहतियात के तौर पर स्कूल भवन को बंद कर दिया गया है।

अब तक 37 नामांकित छात्रों की कक्षाएँ स्थानीय धार्मिक स्थल 'माताजी का चबूतरा' के समीप एक वैकल्पिक स्थान पर संचालित की जाएंगी।

आम जनता और बच्चों की सुरक्षा पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि यदि छत का पूरा हिस्सा गिर जाता, तो यह घटना एक बड़ी त्रासदी बन सकती थी। इस हादसे ने देशभर में पुरानी और खराब रखरखाव वाली इमारतों में संचालित सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी स्कूल बुनियादी ढाँचे की बदहाली एक राष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि राजस्थान सहित कई राज्यों में स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए बजट आवंटन के बावजूद ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन की गति धीमी रही है।

आगे क्या होगा

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूल भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण की कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं। ग्रामीण और अभिभावक प्रशासन से माँग कर रहे हैं कि बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

और फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया। असल सवाल यह है कि जब चेतावनी दर्ज थी, तो जवाबदेही किसकी बनती है? राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में सैकड़ों ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहाँ दशकों पुरानी इमारतों में बच्चे पढ़ते हैं और रखरखाव के बजट का इंतजार करते रहते हैं। जब तक शिकायतों पर कार्रवाई की जवाबदेही तय नहीं होती और भवन निरीक्षण की नियमित व्यवस्था नहीं बनती, तब तक ऐसे हादसे महज दुर्भाग्यपूर्ण संयोग नहीं, बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता का प्रमाण बनते रहेंगे।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदयपुर के सरकारी स्कूल में क्या हादसा हुआ?
6 अक्टूबर 2026 को उदयपुर जिले के नारदा गाँव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में एक कक्षा की छत का प्लास्टर गिर गया, जिसमें 5 छात्र घायल हो गए। उस समय कमरे में 32 बच्चे मौजूद थे।
घायल बच्चों को कहाँ ले जाया गया और उनकी स्थिति क्या है?
सिर में चोट आए तीन बच्चों — कृष्णा कुमारी, कार्तिक और गणेश लाल — को भिंडर सरकारी अस्पताल ले जाया गया। उपचार के बाद तीनों को घर भेज दिया गया; दो अन्य को मामूली चोटें लगी थीं।
क्या शिक्षा विभाग को पहले से जर्जर भवन की जानकारी थी?
हाँ, हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने इमारत की खराब हालत के बारे में शिक्षा विभाग को पहले ही सूचित कर दिया था। ग्रामीणों का भी आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्कूल की कक्षाएँ अब कहाँ चलेंगी?
स्कूल भवन को एहतियातन बंद कर दिया गया है। अब 37 नामांकित छात्रों की कक्षाएँ स्थानीय धार्मिक स्थल 'माताजी का चबूतरा' के पास एक वैकल्पिक स्थान पर संचालित होंगी।
इस हादसे का बड़ा संदेश क्या है?
यह घटना देशभर के पुराने और खराब रखरखाव वाले सरकारी स्कूल भवनों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है। 2001 में बना यह भवन बिना मरम्मत के दशकों से चल रहा था — यह एकमात्र मामला नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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