उदयपुर के सरकारी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरा, 5 छात्र घायल; विभाग को पहले ही दी गई थी जर्जर भवन की सूचना
सारांश
मुख्य बातें
उदयपुर जिले के भिंडर थाना क्षेत्र स्थित नारदा गाँव (वानियातलाई ग्राम पंचायत) के सरकारी प्राइमरी स्कूल में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 की सुबह एक कक्षा की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया, जिसमें पाँच बच्चे घायल हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब कमरे में 32 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। प्रशासन की जानकारी के अनुसार इमारत की जर्जर हालत को लेकर शिक्षा विभाग को पहले ही सूचित किया जा चुका था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हादसे का विवरण
अधिकारियों के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे क्लासरूम की छत से प्लास्टर जोरदार आवाज के साथ नीचे आ गिरा। उस समय तीन अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से छात्रों और स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई।
तीन बच्चों के सिर में चोटें आईं, जबकि दो अन्य को मामूली चोटें लगीं। हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत ने बताया कि पहली कक्षा के छात्र कृष्णा कुमारी और कार्तिक, तथा पाँचवीं कक्षा के छात्र गणेश लाल के सिर में चोटें आईं। तीनों को भिंडर सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
इमारत की स्थिति और पूर्व शिकायतें
हेडमास्टर शक्तावत के अनुसार, यह स्कूल भवन 2001 में बनाया गया था। बीते दो दशकों में इमारत की हालत लगातार बिगड़ती गई और यह जर्जर होती चली गई। स्कूल में दो कमरे और एक बरामदा हैं — ग्रामीणों का कहना है कि ये सभी खराब स्थिति में हैं।
हेडमास्टर ने स्पष्ट किया कि स्कूल प्रबंधन ने इमारत की दयनीय दशा के बारे में शिक्षा विभाग को पूर्व में ही सूचित कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन से कई बार शिकायतें की गईं, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही भिंडर के खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) राजेंद्र कुमार चौबीसा ने स्कूल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के बाद एहतियात के तौर पर स्कूल भवन को बंद कर दिया गया है।
अब तक 37 नामांकित छात्रों की कक्षाएँ स्थानीय धार्मिक स्थल 'माताजी का चबूतरा' के समीप एक वैकल्पिक स्थान पर संचालित की जाएंगी।
आम जनता और बच्चों की सुरक्षा पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि यदि छत का पूरा हिस्सा गिर जाता, तो यह घटना एक बड़ी त्रासदी बन सकती थी। इस हादसे ने देशभर में पुरानी और खराब रखरखाव वाली इमारतों में संचालित सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी स्कूल बुनियादी ढाँचे की बदहाली एक राष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। गौरतलब है कि राजस्थान सहित कई राज्यों में स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए बजट आवंटन के बावजूद ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन की गति धीमी रही है।
आगे क्या होगा
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूल भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण की कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं। ग्रामीण और अभिभावक प्रशासन से माँग कर रहे हैं कि बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।