निशा भगत आत्महत्या मामला: पिता का आरोप — सरकार ने भूमाफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, सीबीआई जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
आदिवासी नेता निशा भगत की आत्महत्या के मामले में उनके पिता देवेंद्र लाल उरांव ने 7 नवंबर 2026 को गुमला में राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निशा को भूमाफिया लगातार धमकियाँ दे रहे थे और परेशान कर रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया — जिसके परिणामस्वरूप निशा ने यह कदम उठाया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले की सीबीआई जांच की माँग करते हुए विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
परिवार के आरोप
निशा भगत के पिता देवेंद्र लाल उरांव ने कहा, 'निशा भगत बहुत लड़ाकू और साहसी लड़की थी। किसी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का काम कर रही थी। उसको सरकार से निराशा हो गई थी। सरकार ने उसके किसी भी मामले को हल नहीं किया।' उन्होंने आगे कहा, 'निशा ने जिन लोगों का नाम लिया है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। सरकार से मांग है कि इस मामले की सीबीआई जांच की जाए और दूध का दूध और पानी का पानी किया जाए।'
भूमाफिया पर सीधा निशाना
देवेंद्र लाल उरांव ने यह भी आरोप लगाया कि फेसबुक लाइव के दौरान निशा ने स्पष्ट किया था कि वह भूमाफियाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया, 'मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगल-बगल घूमने वाले लोग भूमाफिया हैं। सरकार को समय रहते संज्ञान लेना चाहिए और सीबीआई से जांच कराई जाए।' गौरतलब है कि ये आरोप सत्ताधारी नेतृत्व पर सीधा प्रहार हैं, हालाँकि राज्य सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज़
सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र लालूराम ने कहा कि निशा भगत बेबाकी के साथ अपने समाज के मुद्दों को लेकर भूमाफियाओं और सरकारी दलालों को घेरती रहीं और आदिवासी धर्म-संस्कृति के लिए आवाज़ उठाती रहीं। उनके अनुसार, 'भूमाफियाओं, सरकारी चमचों और पुलिस-प्रशासन के ज़रिए निशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। सोशल मीडिया के माध्यम से उनके निजी जीवन पर भी हमला किया जा रहा था। इससे मर्माहत होकर उन्होंने आत्महत्या की।' उन्होंने भी सीबीआई जांच की माँग दोहराई।
आम जनता पर असर
यह मामला झारखंड के आदिवासी समुदायों में गहरी पीड़ा और आक्रोश का कारण बना है। स्थानीय लोग निशा को अपने अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक मानते थे। आलोचकों का कहना है कि यह घटना राज्य में आदिवासी ज़मीनों पर भूमाफिया के बढ़ते दबाव और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है।
क्या होगा आगे
निशा भगत के परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने साफ कहा है कि यदि सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए गए तो विरोध-प्रदर्शन तेज किए जाएंगे। मामले में एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन जांच की दिशा और दायरा अभी तय होना बाकी है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार सीबीआई जांच की माँग पर क्या रुख अपनाती है।