होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित निकला तेल टैंकर 'निसोस केरोस', 3 जून तक विशाखापट्टनम पहुँचेगा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है। मार्शल आइलैंड्स का तेल टैंकर 'निसोस केरोस' — जो हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के लिए लगभग 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है — सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह टैंकर 3 जून 2026 तक विशाखापट्टनम पहुँचने की उम्मीद है।
टैंकर और क्रू की स्थिति
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को जारी आधिकारिक बयान में बताया कि टैंकर पर 25 विदेशी क्रू सदस्य मौजूद हैं और इसमें कोई भारतीय नाविक नहीं है। मंत्रालय लगातार विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और समुद्री क्षेत्र के हितधारकों के साथ समन्वय करते हुए हालात पर नज़र बनाए हुए है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा
सरकार के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 96 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या भारतीय क्रू वाले विदेशी जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। डीजी शिपिंग कंट्रोल रूम लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है।
कंट्रोल रूम के सक्रिय होने के बाद से अब तक 10,841 कॉल और 24,098 से अधिक ईमेल प्राप्त हुए हैं। पिछले 96 घंटों में ही 509 कॉल और 1,332 ईमेल नाविकों, उनके परिजनों और समुद्री हितधारकों की ओर से मिले हैं।
भारतीय नागरिकों की वापसी
सरकार अब तक खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से 3,422 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर चुकी है, जिनमें पिछले 96 घंटों में स्वदेश लौटे 47 नाविक भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान से 2,557 भारतीय नागरिकों को जमीनी सीमा मार्गों के ज़रिए सुरक्षित बाहर निकालने में सहायता की है।
बंदरगाहों पर सामान्य संचालन
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत भर में सभी बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी भीड़भाड़ या व्यवधान की सूचना नहीं मिली है। विदेश मंत्रालय खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर सतत निगरानी रख रहा है और इस क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा, संरक्षा तथा कल्याण सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई तनाव के कारण जोखिम में बताया जा रहा है। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है, इसलिए इस टैंकर का सुरक्षित निकलना ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से भी अहम है। आने वाले दिनों में सरकार की निगरानी और राजनयिक सक्रियता जारी रहने की उम्मीद है।