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होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 'निसोस केरोस' टैंकर विशाखापत्तनम की ओर, 3 जून को पहुंचने की उम्मीद

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होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 'निसोस केरोस' टैंकर विशाखापत्तनम की ओर, 3 जून को पहुंचने की उम्मीद

सारांश

भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर चल रहा विशाल तेल टैंकर 'निसोस केरोस' होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है — लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है। ईरान की नई 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' और शुल्क वसूलने की धमकी से दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बरकरार है।

मुख्य बातें

तेल टैंकर 'निसोस केरोस' होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर विशाखापत्तनम की ओर बढ़ रहा है; 3 जून को पहुंचने की उम्मीद।
जहाज 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ; 333 मीटर लंबा, क्षमता 3,18,744 टन ।
IRGC ने पिछले 24 घंटों में 23 वाणिज्यिक जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी।
ईरान ने 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' बनाने की घोषणा की; शुल्क वसूलने की संभावना, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने अवैध बताया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा; ओमान को ईरान से समझौते पर हमले की चेतावनी दी।
ईरान की कार्रवाई से दुनिया की लगभग 20% गैस और तेल आपूर्ति प्रभावित।

भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर आ रहा तेल टैंकर 'निसोस केरोस' होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और अब विशाखापत्तनम बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। समुद्री यातायात पर नज़र रखने वाली वेबसाइटों के अनुसार, यह जहाज 3 जून तक विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। शुक्रवार सुबह 6 बजे IST को यह जहाज भारत के पश्चिमी तट के निकट उत्तरी अरब सागर में देखा गया।

जहाज का परिचय और यात्रा

मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चलने वाला यह जहाज 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था। हुंडई द्वारा निर्मित 333 मीटर लंबे इस टैंकर की क्षमता 3,18,744 टन (अथवा 3,38,648 घन मीटर) है। जहाज ट्रैकिंग संस्था ऑकविसर के अनुसार, इस जहाज का मालिक अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन है और इसका संचालन किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है।

ईरान की 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' और शुल्क विवाद

ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 24 घंटों में 23 वाणिज्यिक जहाजों — जिनमें तेल टैंकर और कंटेनर जहाज शामिल हैं — को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। ईरानी सेना के अनुसार, यह आवाजाही IRGC नौसेना अधिकारियों के साथ औपचारिक समन्वय के बाद हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जहाजों को मार्ग-शुल्क देना पड़ा या नहीं।

गौरतलब है कि इसी महीने ईरान ने समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' नामक एजेंसी बनाने की घोषणा की थी। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने के लिए शुल्क वसूल सकता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।

अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, 'यह जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा।' इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ओमान ने ईरान के साथ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क वसूलने को लेकर कोई समझौता किया, तो अमेरिका ओमान पर हमला कर सकता है। ओमान, ईरान के सामने जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है।

यह ऐसे समय में आया है जब फरवरी में अमेरिका द्वारा इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी के बाद ईरान ने इस मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं और जहाजों पर हमले किए थे। होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र आवाजाही बहाल करना ईरान युद्ध समाप्त करने की बातचीत में सबसे प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर

ईरान की कार्रवाइयों के कारण दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत गैस और तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो इसी जलमार्ग से गुजरती है। इससे वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक संकट और गहरा गया है। भारत जैसे ऊर्जा-आयात पर निर्भर देशों के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की तेल आयात की एक बड़ी हिस्सेदारी खाड़ी देशों से आती है।

आगे क्या

निसोस केरोस का विशाखापत्तनम पहुंचना भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत का संकेत है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण और शुल्क वसूलने की संभावना दीर्घकालिक अनिश्चितता बनाए रखती है। अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे तय करेंगे कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग कितना सुगम और किफ़ायती रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ईरान की 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' और शुल्क वसूलने की मंशा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या मायने रखती है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी से आयात करता है, इसलिए यह जलमार्ग किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत के लिए अधिक संवेदनशील है। ट्रंप की ओमान को दी गई धमकी यह दर्शाती है कि अमेरिकी नीति तेज़ी से बदल रही है और क्षेत्रीय देश दो महाशक्तियों के बीच फंस सकते हैं। नई दिल्ली को इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल में ऊर्जा विविधीकरण और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर और तेज़ी से काम करना होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेल टैंकर 'निसोस केरोस' कहाँ से आ रहा है और कहाँ जाएगा?
'निसोस केरोस' 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ और विशाखापत्तनम की ओर जा रहा है, जहाँ इसके 3 जून तक पहुंचने की उम्मीद है। यह जहाज भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर आ रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क विवाद क्या है?
ईरान ने इस महीने 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' बनाने की घोषणा की है और जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत गैस और तेल आपूर्ति इसी जलमार्ग से गुजरती है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस मार्ग में कोई भी रुकावट भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है।
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर क्या तनाव है?
फरवरी में अमेरिका-इजरायल की बमबारी के बाद ईरान ने जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाईं और जहाजों पर हमले किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने जलडमरूमध्य को सभी के लिए खुला रखने की बात कही है और ओमान को ईरान से कोई शुल्क समझौता करने पर हमले की चेतावनी दी है।
'निसोस केरोस' जहाज का मालिक कौन है?
जहाज ट्रैकिंग संस्था ऑकविसर के अनुसार, इस जहाज का मालिक अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन है और इसका संचालन किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है। यह हुंडई द्वारा निर्मित 333 मीटर लंबा जहाज है।
राष्ट्र प्रेस
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