होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 'निसोस केरोस' टैंकर विशाखापत्तनम की ओर, 3 जून को पहुंचने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर आ रहा तेल टैंकर 'निसोस केरोस' होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और अब विशाखापत्तनम बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। समुद्री यातायात पर नज़र रखने वाली वेबसाइटों के अनुसार, यह जहाज 3 जून तक विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। शुक्रवार सुबह 6 बजे IST को यह जहाज भारत के पश्चिमी तट के निकट उत्तरी अरब सागर में देखा गया।
जहाज का परिचय और यात्रा
मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चलने वाला यह जहाज 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था। हुंडई द्वारा निर्मित 333 मीटर लंबे इस टैंकर की क्षमता 3,18,744 टन (अथवा 3,38,648 घन मीटर) है। जहाज ट्रैकिंग संस्था ऑकविसर के अनुसार, इस जहाज का मालिक अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन है और इसका संचालन किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है।
ईरान की 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' और शुल्क विवाद
ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 24 घंटों में 23 वाणिज्यिक जहाजों — जिनमें तेल टैंकर और कंटेनर जहाज शामिल हैं — को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। ईरानी सेना के अनुसार, यह आवाजाही IRGC नौसेना अधिकारियों के साथ औपचारिक समन्वय के बाद हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जहाजों को मार्ग-शुल्क देना पड़ा या नहीं।
गौरतलब है कि इसी महीने ईरान ने समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' नामक एजेंसी बनाने की घोषणा की थी। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने के लिए शुल्क वसूल सकता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।
अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, 'यह जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा।' इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ओमान ने ईरान के साथ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क वसूलने को लेकर कोई समझौता किया, तो अमेरिका ओमान पर हमला कर सकता है। ओमान, ईरान के सामने जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है।
यह ऐसे समय में आया है जब फरवरी में अमेरिका द्वारा इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी के बाद ईरान ने इस मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं और जहाजों पर हमले किए थे। होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र आवाजाही बहाल करना ईरान युद्ध समाप्त करने की बातचीत में सबसे प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
ईरान की कार्रवाइयों के कारण दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत गैस और तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो इसी जलमार्ग से गुजरती है। इससे वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक संकट और गहरा गया है। भारत जैसे ऊर्जा-आयात पर निर्भर देशों के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की तेल आयात की एक बड़ी हिस्सेदारी खाड़ी देशों से आती है।
आगे क्या
निसोस केरोस का विशाखापत्तनम पहुंचना भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत का संकेत है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण और शुल्क वसूलने की संभावना दीर्घकालिक अनिश्चितता बनाए रखती है। अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे तय करेंगे कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग कितना सुगम और किफ़ायती रहेगा।