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होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकले तीन भारतीय तेल टैंकर, 8.6 लाख मीट्रिक टन कार्गो लेकर भारत आ रहे

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होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकले तीन भारतीय तेल टैंकर, 8.6 लाख मीट्रिक टन कार्गो लेकर भारत आ रहे

सारांश

महीनों की अनिश्चितता के बाद तीन भारतीय तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। 8.6 लाख मीट्रिक टन कार्गो और 94 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी — यह अमेरिका-ईरान समझौते और भारत की समुद्री कूटनीति की मिली-जुली जीत है।

मुख्य बातें

देश वैभव , देश विभोर और सनमार हेराल्ड — तीनों भारतीय ध्वजवाहक टैंकर होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं।
जहाजों पर 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल और 94 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं।
देश वैभव और देश विभोर 24 जून को क्रमशः वाडिनार और सिक्का पोर्ट पहुँचेंगे; सनमार हेराल्ड 1 जुलाई को पारादीप पोर्ट पहुँचेगा।
18 जून को अमेरिका ने होर्मुज से समुद्री यातायात पर लगी रोक हटाई; उसी दिन राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक्स पर पोस्ट कर सफल मार्ग की घोषणा की और सरकारी समन्वय को रेखांकित किया।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 21 जून 2025 को घोषणा की कि तीन भारतीय ध्वजवाहक कच्चे तेल के टैंकर — देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्डहोर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं और 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्गो तथा 94 भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। यह सफलता ऐसे समय में मिली है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के बाद समुद्री यातायात महीनों से बाधित था।

कौन से जहाज और कहाँ पहुँचेंगे

अधिकारियों के अनुसार, देश वैभव के 24 जून को वाडिनार पोर्ट पर पहुँचने की उम्मीद है, जबकि देश विभोर उसी दिन सिक्का पोर्ट पर लंगर डालेगा। तीसरा जहाज सनमार हेराल्ड, जो 20 जून को होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका था, 1 जुलाई को पारादीप पोर्ट पर पहुँचने वाला है। तीनों जहाजों का यह आगमन भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक अहम आपूर्ति श्रृंखला की बहाली का प्रतीक है।

मंत्री सोनोवाल का बयान

मंत्री सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'सुरक्षित मार्ग! तीन भारतीय ध्वज वाले कच्चे तेल के टैंकर, देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड, 94 भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल लेकर आज होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर गए हैं और भारत के रास्ते पर हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि उनका मंत्रालय भारतीय नाविकों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय में है।

भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ट्रांजिट ऐसे समय में हुआ जब क्षेत्र में तनाव कम हो रहा है। 18 जून को अमेरिका ने एक कूटनीतिक सफलता के बाद होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही पर लगी रोक हटा ली थी। उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए, जिसमें तेहरान द्वारा अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार में कटौती और कुछ प्रतिबंधों में ढील के प्रावधान शामिल हैं। इस कदम ने ईरानी तेल निर्यात का मार्ग खोला और शिपिंग कॉरिडोर को पुनः सक्रिय करने में सहायता की।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर

भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, और होर्मुज स्ट्रेट इस आपूर्ति का एक निर्णायक मार्ग है। गौरतलब है कि सुरक्षा चिंताओं के कारण यह गलियारा महीनों से काफी हद तक अवरुद्ध था। अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय निरंतर जारी है।

आगे क्या

तीनों जहाजों के 24 जून से 1 जुलाई के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचने के साथ ही देश की रिफाइनिंग क्षमता को ताज़ा कच्चे तेल की आपूर्ति मिलेगी। यह सफल ट्रांजिट खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक प्रगति और भारत की समुद्री ऊर्जा आपूर्ति लाइन की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता, दोनों को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भारत की ऊर्जा आपूर्ति की उस गहरी भेद्यता को भी उजागर करता है जो बाहरी भू-राजनीति पर टिकी है। अमेरिका-ईरान समझौते की वजह से गलियारा खुला — यानी भारत की ऊर्जा सुरक्षा का दारोमदार उन वार्ताओं पर था जिनमें नई दिल्ली की सीधी भूमिका सीमित थी। यह ऐसे समय में है जब भारत अपनी विदेश नीति में 'रणनीतिक स्वायत्तता' का दावा करता है। दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू विकल्पों और आपूर्ति विविधीकरण की जरूरत इससे और स्पष्ट हो जाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट से कौन से तीन भारतीय टैंकर सुरक्षित निकले हैं?
देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड — ये तीन भारतीय ध्वजवाहक कच्चे तेल के टैंकर होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन पर 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्गो और 94 भारतीय नाविक सवार हैं।
ये तेल टैंकर भारत के किन बंदरगाहों पर और कब पहुँचेंगे?
अधिकारियों के अनुसार देश वैभव 24 जून को वाडिनार पोर्ट, देश विभोर 24 जून को सिक्का पोर्ट और सनमार हेराल्ड 1 जुलाई को पारादीप पोर्ट पर पहुँचेगा।
होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री यातायात फिर कब और क्यों शुरू हुआ?
18 जून को अमेरिका ने एक कूटनीतिक सफलता के बाद होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री यातायात पर लगी रोक हटाई। उसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार में कटौती और कुछ प्रतिबंधों में ढील के प्रावधान हैं।
भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत अपनी कच्चे तेल की बड़ी जरूरत आयात से पूरी करता है और होर्मुज स्ट्रेट इस आपूर्ति का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इस गलियारे के बाधित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला सीधे प्रभावित होती है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बारे में क्या कहा?
मंत्री सोनोवाल ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि तीनों टैंकर 94 भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल लेकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय भारतीय नाविकों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए सभी एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय में है।
राष्ट्र प्रेस
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