एलएनजी टैंकर 'दिशा' तीन माह बाद होर्मुज पार कर गुजरात के दाहेज पहुंचा, 62,370 मीट्रिक टन गैस डिलीवर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजरानी सामान्य होने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, भारतीय एलएनजी टैंकर 'दिशा' तीन माह से अधिक की प्रतीक्षा के बाद गुजरात के दाहेज बंदरगाह पर 19 जून 2026 को सफलतापूर्वक पहुंच गया। जहाज ने 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का कार्गो डिलीवर किया, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दिशा शुक्रवार सुबह करीब 7:32 बजे IST दाहेज टर्मिनल पर पहुंचा। यह टैंकर खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तीन महीने से अधिक समय तक वहीं रुका रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही पुनः शुरू होने पर यह जहाज रवाना हो सका।
एलएनजी कार्गो को कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल पर लोड किया गया था। सूत्रों के अनुसार, टैंकर 'दिशा' को शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के लिए किराए पर लिया गया है।
दाहेज टर्मिनल की भूमिका
भरूच जिले में स्थित दाहेज एलएनजी टर्मिनल भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस आयात केंद्र है। यह देश के प्राकृतिक गैस वितरण नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है और औद्योगिक तथा घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है। इस खेप के पहुंचने से एलएनजी की उपलब्धता बढ़ने और आपूर्ति स्थिरता को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस व्यापार का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही दबाव में था। गौरतलब है कि इस मार्ग पर कोई भी बाधा वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति श्रृंखला को सीधे प्रभावित कर सकती है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर
पश्चिम एशिया में हालिया भू-राजनीतिक तनाव के बीच 'दिशा' के सुरक्षित पहुंचने से भारत के ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों को राहत मिली है। यह यात्रा इस बात को भी रेखांकित करती है कि भारत के निर्बाध ऊर्जा आयात के लिए सुरक्षित समुद्री मार्गों का कितना महत्व है। पेट्रोनेट एलएनजी देश के प्रमुख एलएनजी आयातकों में से एक है और दाहेज के माध्यम से गैस की यह आपूर्ति औद्योगिक एवं घरेलू दोनों क्षेत्रों को राहत देगी।
आगे क्या
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजरानी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में स्थायी स्थिरता के लिए राजनयिक प्रयास जारी रहना जरूरी है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बड़े पैमाने पर निर्भर है, आने वाले महीनों में इस मार्ग से और अधिक एलएनजी खेपों की प्राप्ति की योजना बना रहा है।