गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर एलपीजी लेकर पहुंचा भारतीय जहाज 'नंदा देवी'
सारांश
Key Takeaways
- नंदा देवी ने गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर एलपीजी लेकर दस्तक दी।
- यह इस हफ्ते का दूसरा एलपीजी ले जाने वाला जहाज है।
- दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से आए हैं।
- सरकार ने एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
- भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
भुज, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय पोत नंदा देवी ने मंगलवार को एलपीजी लेकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर कदम रखा है। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह जहाज एलपीजी लेकर मंगलवार को सुबह लगभग 11.25 बजे वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा। इस हफ्ते पश्चिमी तट पर एलपीजी लेकर आने वाला 'नंदा देवी' दूसरा जहाज है, जबकि इससे एक दिन पहले 'शिवालिक' मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था।
दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत आए हैं। यह जलडमरूमध्य ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण बाधित है। ईरान से अनुमति मिलने के बाद ये जहाज भारत पहुंचे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण फरवरी के अंत से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
सोमवार को कांडला बंदरगाह के अधिकारियों ने निर्देश जारी किया था कि एलपीजी ले जाने वाले सभी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर लंगर डालने की अनुमति दी जाए ताकि माल की अनलोडिंग में तेजी लाई जा सके और देरी को कम किया जा सके।
दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण ने जहाज एजेंटों को भेजे गए एक परिपत्र में कहा कि बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बंदरगाहों को एलपीजी से लदे जहाजों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है ताकि देश भर में खाना पकाने की गैस का निर्बाध वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
कतर से लगभग 46,000 टन एलपीजी लेकर आने वाले शिवालिक ने अपनी नौ दिवसीय यात्रा पूरी की और सोमवार शाम को मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। बंदरगाह अधिकारियों ने पहले से ही डॉक्यूमेंटेशन और डॉकिंग की व्यवस्था कर ली थी ताकि बिना किसी देरी के माल उतारने का काम शुरू किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों जहाज घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
नंदा देवी के पहुंचने के साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा एक अन्य जहाज 'जग लाडकी' रास्ते में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे, जिनमें कुल 611 नाविक सवार थे।