टेक्सास से एलपीजी लेकर आया जहाज भारत के मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचा
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका से एलपीजी का आगमन
- भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीद में वृद्धि की
- ईंधन कीमतों को स्थिर करने का प्रयास
- पश्चिमी फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की संख्या
- समुद्री रास्तों पर तनाव की स्थिति
नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दुनिया भर में वस्तुओं की आपूर्ति में आ रही समस्याओं के बीच, अमेरिका से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर एक बड़ा जहाज़ भारत के मंगलुरु बंदरगाह पर पहुँच गया है।
टेक्सास राज्य से एलपीजी लेकर आ रहा मालवाहक जहाज पाइक्सिस पायनियर ने बंदरगाह पर दस्तक दी है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चा तेल ले जा रहा एक अन्य जहाज भी मंगलुरु पहुँच गया है। यह जहाज बंदरगाह से लगभग 18 समुद्री मील दूर था। तेल को पाइपलाइन के माध्यम से एमआरपीएल तक पहुँचाने के लिए सिंगल-पॉइंट मूरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।
रूस से आया यह कच्चा तेल अमेरिका द्वारा जारी किए गए अस्थायी सामान्य लाइसेंस के बाद पहुँचा है, जिससे 12 मार्च से समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ईंधन कीमतों को स्थिर करने के लिए भारत सरकार ने यह कदम उठाया है।
अमेरिका से मिली अनुमति के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में आई बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से भारत ने कच्चे तेल की खरीद में वृद्धि की है।
इससे पहले, 'नंदा देवी' और 'शिवालिक' जहाज भी एलपीजी लेकर भारत आए थे। नंदा देवी जहाज गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा था और शिवालिक मुंद्रा बंदरगाह पर पहुँचा था। दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बेहद जोखिम भरे रास्ते से गुजरते हुए एलपीजी लेकर आए थे। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री रास्ता बाधित है।
पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कुल 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं और डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के समन्वय से स्थिति पर नजर रख रहा है।