होर्मुज संकट के बीच 20,000 टन एलपीजी लेकर कतरी जहाज कांडला पहुंचा, भारत की ऊर्जा आपूर्ति जारी

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होर्मुज संकट के बीच 20,000 टन एलपीजी लेकर कतरी जहाज कांडला पहुंचा, भारत की ऊर्जा आपूर्ति जारी

सारांश

पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे के बावजूद कतर से 20,000 टन एलपीजी लेकर आया जहाज कांडला पहुंचा — यह भारत की ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने की कोशिश का प्रतीक है, जबकि 13 मई को एक भारतीय जहाज पर हमला भी हो चुका है।

मुख्य बातें

एमवी एसवाईएमआई जहाज 20,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर 17 मई 2026 को कांडला बंदरगाह (गुजरात) पहुंचा।
जहाज कतर से रवाना हुआ और 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया।
मार्च 2026 से अब तक 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज — 12 एलपीजी टैंकर और 1 कच्चे तेल का टैंकर — होर्मुज से गुजर चुके हैं।
13 मई को ओमान तट के पास एक भारतीय जहाज पर हमला हुआ; सभी 14 चालक दल के सदस्य सुरक्षित बचाए गए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने हमलों को 'अस्वीकार्य' बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की लगभग एक-पांचवीं ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने के बाद 20,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया जहाज 17 मई 2026 को गुजरात के दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (कांडला) पर पहुंचा। मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाले इस जहाज — एमवी एसवाईएमआई — की सुरक्षित आमद ऐसे समय में राहत की खबर है जब इस संकरे जलमार्ग से भारतीय ऊर्जा आयात पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

जहाज की यात्रा और मार्ग

अधिकारियों के अनुसार एमवी एसवाईएमआई कतर से रवाना हुआ और 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे कांडला बंदरगाह पर लंगर डाला। यह जलडमरूमध्य ओमान के तट के निकट स्थित एक अत्यंत संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और गैस निर्यात का पारगमन होता है।

मुख्य घटनाक्रम: भारतीय जहाजों की आवाजाही

मार्च 2026 की शुरुआत से अब तक 12 एलपीजी टैंकरों और एक कच्चे तेल के टैंकर सहित कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने की हर संभव कोशिश कर रहा है, बावजूद इसके कि क्षेत्र में तनाव चरम पर है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने हाल के दशकों के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया है।

भारतीय जहाज पर हमला और चालक दल का बचाव

13 मई को ओमान के तट के पास एक भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ, जो सोमालिया से आ रहा था। जहाज के सभी 14 चालक दल के सदस्यों को ओमान के अधिकारियों ने सुरक्षित बचा लिया। हालांकि, इस हमले को अंजाम देने वाले का नाम तुरंत सामने नहीं आया। इस साल की शुरुआत से अब तक कम से कम दो अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर भी हमले हो चुके हैं।

भारत की प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र में रुख

भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने इन हमलों को 'अस्वीकार्य' करार दिया। उन्होंने कहा कि 'नागरिक चालक दल को निशाना बनाना और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।'

आगे की स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की लगभग एक-पांचवीं ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है, और भारत इस मार्ग पर खाड़ी देशों से एलपीजी व कच्चे तेल के आयात के लिए बड़े पैमाने पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल सरकार वैकल्पिक मार्गों और आपूर्तिकर्ताओं की संभावनाएं भी तलाश रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े खतरे को नहीं ढकती जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहा है — एक ऐसा मार्ग जिस पर भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा टिका है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से कम से कम तीन भारतीय जहाजों पर हमले हो चुके हैं, फिर भी सरकार की सार्वजनिक प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र में बयानबाजी तक सीमित दिखती है। असली सवाल यह है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचा तो क्या भारत के पास वैकल्पिक आपूर्ति शृंखला की पर्याप्त तैयारी है — और इस पर सरकार की चुप्पी चिंताजनक है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांडला बंदरगाह पर पहुंचा एलपीजी जहाज कहां से आया था?
यह जहाज — एमवी एसवाईएमआई — कतर से रवाना हुआ था और 13 मई 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद 17 मई की रात करीब 11:30 बजे कांडला बंदरगाह पहुंचा। यह मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला जहाज है और इसमें 20,000 मीट्रिक टन एलपीजी थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान के तट के पास स्थित एक अत्यंत संकरा समुद्री मार्ग है जिससे सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और गैस निर्यात का पारगमन होता है। भारत खाड़ी देशों से एलपीजी और कच्चे तेल के आयात के लिए इस मार्ग पर बड़े पैमाने पर निर्भर है।
पश्चिम एशिया संकट का भारतीय जहाजों पर क्या असर पड़ा है?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए संघर्ष के बाद से कम से कम तीन भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर हमले हो चुके हैं। 13 मई को ओमान तट के पास एक भारतीय जहाज पर हमले में सभी 14 चालक दल के सदस्यों को ओमान के अधिकारियों ने सुरक्षित बचाया, लेकिन हमलावर की पहचान तुरंत नहीं हो पाई।
भारत ने इन हमलों पर क्या रुख अपनाया है?
भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने इन्हें 'अस्वीकार्य' बताया और कहा कि नागरिक चालक दल को निशाना बनाना और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना किसी भी तरह से उचित नहीं।
मार्च 2026 से अब तक कितने भारतीय जहाज होर्मुज से गुजरे हैं?
मार्च 2026 की शुरुआत से अब तक 12 एलपीजी टैंकरों और एक कच्चे तेल के टैंकर सहित कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। यह संख्या दर्शाती है कि भारत संकट के बावजूद अपनी ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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