11 जुलाई 2026
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नोएडा सेक्टर-58 में खुले नाले में गिरकर इंजीनियर आर्यन की मौत, प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

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नोएडा सेक्टर-58 में खुले नाले में गिरकर इंजीनियर आर्यन की मौत, प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

सारांश

नोएडा सेक्टर-58 में जलभराव के बीच टूटे स्लैब से खुले नाले में गिरकर 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की मौत हो गई — यह इस वर्ष प्राधिकरण की अनदेखी से जुड़ी तीसरी जानलेवा घटना है। हर हादसे के बाद निर्देश, समितियाँ, वादे — और फिर वही ढर्रा।

मुख्य बातें

नोएडा सेक्टर-58 में 11 जुलाई को जलभराव के बीच टूटे स्लैब से नाले में गिरकर 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन (मूल निवासी: फर्रुखाबाद ) की मौत हो गई।
घटना सुबह करीब 9 बजे हुई जब आर्यन कार्यालय जा रहे थे; पानी में डूबा टूटा स्लैब दिखाई नहीं दे रहा था।
इससे पहले इसी वर्ष जनवरी में सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज और एमिटी विश्वविद्यालय के एक छात्र की भी इसी तरह डूबने से मौत हो चुकी है।
युवराज हादसे के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।
परिजनों ने नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

नोएडा के सेक्टर-58 में 11 जुलाई को जलभराव के बीच एक टूटे हुए स्लैब से खुले नाले में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की मौत हो गई। मूल रूप से फर्रुखाबाद निवासी आर्यन उस सुबह करीब 9 बजे अपने कार्यालय जा रहे थे, जब यह हादसा हुआ। यह नोएडा में इस वर्ष जलभराव और खुले गड्ढों से जुड़ी कम-से-कम तीसरी मौत है, और हर बार नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रातभर हुई बारिश के कारण सेक्टर-58 की सड़क पर भारी जलभराव था और नाले के ऊपर बने स्लैब पानी में पूरी तरह डूबे हुए थे। एक स्थान पर स्लैब टूटा हुआ था, जो पानी के कारण दिखाई नहीं दे रहा था। जैसे ही आर्यन उस स्थान से गुजरे, उनका पैर फिसला और वे गहरे नाले में जा गिरे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बाद में उनका शव नाले से बाहर निकाला गया।

परिजनों के आरोप

आर्यन के परिजनों ने नोएडा प्राधिकरण और संबंधित विभागों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि नाले सुरक्षित होते, टूटे स्लैब समय रहते बदले जाते और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया गया होता, तो आर्यन की जान बच सकती थी। परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है।

पिछले हादसे और अनदेखी

यह घटना अकेली नहीं है। इसी वर्ष जनवरी में सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन परियोजना के पास बने गहरे गड्ढे में बारिश का पानी भर जाने से युवा इंजीनियर युवराज की डूबकर मौत हो गई थी। उस घटना के बाद जांच समिति गठित की गई थी और खुले गड्ढों को सुरक्षित करने, बैरिकेडिंग करने तथा नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे — लेकिन वह जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।

उसके कुछ समय बाद एमिटी विश्वविद्यालय का एक छात्र एक निर्माणाधीन साइट पर बने जलभराव वाले गड्ढे में डूब गया था। उस हादसे के बाद भी निर्माणाधीन स्थलों पर सुरक्षा घेराबंदी, चेतावनी बोर्ड लगाने और जलभराव वाले गड्ढों को तत्काल भरने के निर्देश जारी हुए थे।

आम जनता पर असर

स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर के कई सेक्टरों में खुले नाले, टूटे स्लैब, निर्माणाधीन स्थलों पर असुरक्षित गड्ढे और मानसून में गंभीर जलभराव आज भी बड़ी समस्या बने हुए हैं। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होती, जिसकी कीमत आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

जवाबदेही का सवाल

लगातार तीन गंभीर हादसे यह दर्शाते हैं कि प्राधिकरण के वादों और ज़मीनी हकीकत के बीच गहरी खाई है। हर हादसे के बाद जांच समिति, सुरक्षा अभियान और निर्देशों की घोषणाएं होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। आर्यन की मौत ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने रख दिया है कि इन मौतों के बाद भी सिस्टम कब जागेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर मानसून में ऐसी खबरें आती रहेंगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा सेक्टर-58 में इंजीनियर आर्यन की मौत कैसे हुई?
11 जुलाई को सुबह करीब 9 बजे आर्यन कार्यालय जा रहे थे, तब सेक्टर-58 में जलभराव के कारण नाले पर बना टूटा स्लैब पानी में दिखाई नहीं दे रहा था। पैर फिसलने से वे गहरे नाले में गिर गए और बाद में उनका शव निकाला गया।
नोएडा में इससे पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं?
हाँ, इसी वर्ष जनवरी में सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की जलभराव वाले गड्ढे में डूबने से मौत हुई थी। उसके बाद एमिटी विश्वविद्यालय का एक छात्र भी निर्माणाधीन साइट के जलभराव वाले गड्ढे में डूब गया था। आर्यन की मौत इस वर्ष की तीसरी ऐसी घटना है।
युवराज हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने क्या कदम उठाए थे?
युवराज की मौत के बाद जांच समिति गठित की गई थी और खुले गड्ढों को सुरक्षित करने, बैरिकेडिंग तथा नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे। हालांकि वह जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
आर्यन के परिजनों ने क्या माँग की है?
परिजनों ने नोएडा प्राधिकरण और संबंधित विभागों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय रहते टूटे स्लैब बदले गए होते और जलभराव दूर किया गया होता तो आर्यन की जान बच सकती थी। परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है।
नोएडा में जलभराव और खुले नालों की समस्या कितनी व्यापक है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, शहर के कई सेक्टरों में खुले नाले, टूटे स्लैब और मानसून में गंभीर जलभराव अब भी बड़ी समस्या है। बार-बार शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाया जाता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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