मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा पर हुसैन दलवई का तंज: '2029 के बाद PM नहीं रहेंगे, इसलिए दुनिया घूम रहे हैं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 11 जुलाई को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी 2029 के बाद प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, इसलिए अभी से पूरी दुनिया की सैर कर रहे हैं। दलवई ने इस अवसर पर महाराष्ट्र की राजनीति, सिद्धिविनायक मंदिर चढ़ावा विवाद, बीएमसी पार्षदों की सदस्यता रद्द होने और हिंदुत्व से जुड़े कई मुद्दों पर भी अपनी बेबाक राय रखी।
मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा पर कटाक्ष
करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का दौरा किया है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए व्यापक व्यापार समझौते को दोनों देशों के लिए एक बड़ा कदम बताया। हालाँकि, दलवई ने इस पर व्यंग्य करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि 2029 के बाद वे प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, इसलिए पूरी दुनिया की सैर कर रहे हैं।'
सिद्धिविनायक मंदिर विवाद पर प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाल ही में सवाल उठाया था कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ियों की जाँच क्यों नहीं कराई गई। दलवई ने शिंदे के सवाल को उचित तो माना, लेकिन पलटवार करते हुए कहा, 'जब एकनाथ शिंदे स्वयं सरकार का हिस्सा थे, तब उन्होंने इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? एनडीए में शामिल होने के बाद उनके विचार बदल गए। मंत्री रहते हुए उन्होंने कुछ नहीं किया, फिर अब यह मुद्दा क्यों उठा रहे हैं?'
हनुमानगढ़ी विवाद और योगी के बयान पर रुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि हनुमानगढ़ी में नमाज अदा करवाई गई थी और सवाल उठाया था कि क्या कोई अन्य सरकार जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करवा सकती है। इस पर दलवई ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, 'मेरे ख्याल से जहाँ हिंदुओं की आस्था है, वहाँ नमाज पढ़ना बिल्कुल गलत था।' यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह कांग्रेस नेता की ओर से योगी के बयान के एक पहलू से सहमति दर्शाती है।
बीएमसी पार्षदों की सदस्यता रद्द होने पर सवाल
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में अब तक चार नगरसेवकों की सदस्यता रद्द किए जाने के मुद्दे पर दलवई ने कहा कि सबसे पहले यह देखा जाना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई। उन्होंने कहा, 'जब किसी से काम लिया जाता है, तो पहले उसकी पूरी जाँच क्यों नहीं की जाती।' गौरतलब है कि बीएमसी में पार्षदों की सदस्यता रद्द होने का यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
दलवई के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब महाराष्ट्र में 2029 के आम चुनाव की रणनीतिक तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं और विपक्ष केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस का यह कटाक्ष प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति सक्रियता को चुनावी नजरिए से परिभाषित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में इन मुद्दों पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।