बंगाल विवाद पर हसन दलवई का मोदी को जवाब, विदेश नीति और पाक-कश्मीर मुद्दे पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हसन दलवई ने रविवार, 21 जून को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा पलटवार किया, जब मोदी ने कांग्रेस पर बंगाल को भारत से अलग करने की राजनीति करने का आरोप लगाया था। दलवई ने कहा कि देश की जनता अब राजनीतिक बयानों और ज़मीनी वास्तविकता के बीच का फ़र्क भली-भाँति समझने लगी है।
विदेश नीति पर सवाल
दलवई ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'शक्तिशाली देशों के सामने झुकने का काम स्वयं प्रधानमंत्री कर रहे हैं।' उनका आरोप था कि जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई बयान देते हैं, भारत सरकार उसी दिशा में कदम उठाती दिखाई देती है — और इसीलिए ट्रंप भी प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हैं।
इंदिरा गांधी और बांग्लादेश का ज़िक्र
दलवई ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान से बांग्लादेश को अलग कराने का निर्णायक कार्य पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में हुआ था। उन्होंने दावा किया कि हाल के सैन्य संघर्षों के दौरान भारत ने अपेक्षित कठोर रुख नहीं अपनाया। उनके अनुसार, 'लोगों को उम्मीद थी कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'
री-नीट परीक्षा और जवाबदेही
री-नीट परीक्षा पर पूछे गए सवाल के जवाब में दलवई ने कहा कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि व्यवस्था में फिर कोई बड़ी चूक होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उनके अनुसार, अब तक सामने आई घटनाओं में किसी न किसी स्तर पर जवाबदेही तय होना अनिवार्य है।
महाराष्ट्र की राजनीति और शिवसेना (यूबीटी)
शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बगावती रुख पर दलवई ने कहा कि इन सांसदों को केवल किसी एक दल का नहीं, बल्कि महाविकास अघाड़ी के सभी सहयोगी दलों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला है। उनका कहना था कि पार्टी छोड़ना या अलग रास्ता अपनाना मतदाताओं के जनादेश के विपरीत होगा और ऐसे नेताओं के क्षेत्रों में जनता इसका विरोध कर सकती है।
अखिलेश यादव इस्तीफे की अटकलें खारिज
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के भीतर संभावित टूट और अखिलेश यादव के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की चर्चाओं को दलवई ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, 'इस तरह की अटकलों में कोई तथ्य नहीं है और अखिलेश यादव के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता — यह केवल राजनीतिक अफवाहें हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता पर देशभर में सवाल उठाए जा रहे हैं।