नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: ठेका मजदूरों का प्रदर्शन, छह महीने से बकाया वेतन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के निर्माण कार्यों में लगे ठेका मजदूरों ने 23 सितंबर 2026 (बुधवार) को बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें पिछले करीब छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने परियोजना से जुड़ी विकासकर्ता कंपनी टाटा के अधिकारियों से मुलाकात कर जल्द से जल्द बकाया राशि जारी कराने की माँग रखी।
मजदूरों की स्थिति और आरोप
प्रदर्शन में शामिल मजदूरों के अनुसार, वे एयरपोर्ट परियोजना के शुरुआती चरण से ही विभिन्न कार्यों में जुटे हुए हैं। ये मजदूर सीधे विकासकर्ता कंपनी के कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग ठेकेदारों के माध्यम से साइट पर तैनात किए गए हैं। मजदूरों का कहना है कि नियमित रूप से काम करने के बावजूद करीब छह माह से उनके खातों में वेतन नहीं आया।
कई मजदूरों के परिवार पूरी तरह उनकी मासिक आय पर निर्भर हैं। लंबे समय तक भुगतान न मिलने से रोज़मर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। मजदूरों ने बताया कि उन्होंने पहले संबंधित ठेकेदारों से बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद वे विकासकर्ता कंपनी के अधिकारियों तक पहुँचे।
टाटा अधिकारियों से मुलाकात
प्रदर्शनकारी मजदूरों ने टाटा के एयरपोर्ट परियोजना से जुड़े अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराया। उन्होंने माँग की कि बकाया वेतन भुगतान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। मजदूरों ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा काम रोकना नहीं, बल्कि अपने श्रम का उचित और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराना है।
गौरतलब है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश की प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में से एक है और इसे ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना पर हज़ारों मजदूर काम कर रहे हैं।
ठेकेदारी प्रणाली और श्रमिक अधिकार
यह विवाद ठेकेदारी प्रणाली की उस पुरानी समस्या को उजागर करता है, जिसमें श्रमिक मुख्य कंपनी और ठेकेदार के बीच फँसकर अपनी मजदूरी से वंचित रह जाते हैं। श्रम कानूनों के तहत मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि ठेकेदार के मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब बड़े बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों में श्रमिक कल्याण की निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मजदूरों के अनुसार, उन्होंने पहले आपसी बातचीत के ज़रिए समाधान की कोशिश की, लेकिन बार-बार आश्वासन के बाद भी बकाया नहीं चुकाया गया, जिससे उन्हें खुले प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आम जनता और श्रमिकों पर असर
छह माह का बकाया वेतन न मिलने से इन मजदूरों और उनके परिवारों पर गहरा आर्थिक बोझ पड़ा है। कई परिवार दैनिक ज़रूरतें पूरी करने में असमर्थ हो रहे हैं। मजदूरों का यह प्रदर्शन परियोजना की प्रगति और श्रमिक संरक्षण व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
क्या होगा आगे
मजदूरों ने संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप कर जल्द समाधान सुनिश्चित कराने की अपील की है। यदि बकाया वेतन शीघ्र जारी नहीं किया गया तो प्रदर्शन के और उग्र होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। श्रम विभाग और प्रशासन की भूमिका इस मामले के निपटारे में निर्णायक साबित होगी।