एनआरआई और एफसीएनआर-बी इनफ्लो से वित्त वर्ष 27 में बैंक डिपॉजिट वृद्धि 15% तक पहुँचने का अनुमान: एसबीआई रिसर्च
सारांश
मुख्य बातें
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, गैर-निवासी भारतीय (एनआरआई) और एफसीएनआर-बी इनफ्लो की बदौलत भारतीय बैंकों की डिपॉजिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 15 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। 20 जुलाई को जारी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस अवधि में क्रेडिट वृद्धि दर मजबूत बनी रहेगी और डिपॉजिट से आगे निकलती रहेगी।
एफसीएनआर-बी इनफ्लो की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक एफसीएनआर-बी डिपॉजिट के माध्यम से लगभग $13–14 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं, जिससे चालू वित्त वर्ष में भारतीय बैंकों का डिपॉजिट आधार काफी मजबूत हुआ है। यह इनफ्लो ऐसे समय में आया है जब घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा बाज़ार-संबद्ध निवेश साधनों की ओर खिसक रहा है।
क्रेडिट-डिपॉजिट अंतर की स्थिति
30 जून को समाप्त पखवाड़े में बैंक क्रेडिट में सालाना आधार पर 18.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल डिपॉजिट में 13.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे क्रेडिट-डिपॉजिट का अंतर बढ़कर 5.3 प्रतिशत अंक हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 से जारी यह ट्रेंड कोविड-19 महामारी के बाद आए संरचनात्मक बदलावों को दर्शाता है, न कि लिक्विडिटी के किसी अस्थायी असंतुलन को।
जमा वृद्धि की बदलती भूगोल
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े महानगरों में पारंपरिक जमा बाज़ार अब संतृप्त हो चुके हैं। जमा वृद्धि अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो रही है, जिसके पीछे परिवारों की बढ़ती आय, महिला-केंद्रित कल्याण योजनाएँ और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार प्रमुख कारण हैं। दूसरी ओर, शहरी परिवार अपनी बचत को म्यूचुअल फंड और इक्विटी जैसे बाज़ार-संबद्ध साधनों में लगा रहे हैं, जिससे बैंकिंग प्रणाली में घरेलू जमा का अनुपात घट रहा है।
कर्ज देने के रुझान में बदलाव
रेगुलेटरी उपायों के तहत बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन पर अंकुश लगने के बाद क्रेडिट ग्रोथ का दायरा विस्तृत हुआ है। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के सहयोग से नए कर्ज का रुझान उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्किंग कैपिटल लोन और सोने के गहनों के बदले लोन की ओर बढ़ा है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, आपूर्ति पक्ष के झटके — जैसे कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव — डिपॉजिट की तुलना में क्रेडिट ग्रोथ को अधिक प्रभावित करते हैं, जिससे बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी की दीर्घकालिक कमी बनी रहती है।
बैंकिंग क्षेत्र की समग्र स्थिति
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारतीय बैंक फिलहाल 'गोल्डीलॉक्स' स्थिति में हैं — मजबूत पूँजी पर्याप्तता अनुपात (कैपिटल एडिक्वेसी) और घटते नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के साथ। खपत की माँग और पूँजीगत व्यय के समर्थन से क्रेडिट ग्रोथ के मज़बूत बने रहने की उम्मीद है, जबकि बैंकों के बैलेंस-शीट अनुशासन बनाए रखने की भी संभावना जताई गई है।