ओडिशा CM माझी की भ्रष्ट अधिकारियों को सीधी चेतावनी, विजिलेंस की दोषसिद्धि दर 65% पहुंची
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर के लोक सेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब शासन आम जनता से कटे हुए 'आइवरी टावर' से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सीधे लोगों तक पहुँचकर चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
माझी ने कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और प्रतिभागियों को ईमानदारी की शपथ दिलाते हुए कहा, 'सतर्कता विभाग सुशासन की आंख और कान है। सुशासन केवल नीतियाँ और योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असली अर्थ भ्रष्टाचार को पूरी तरह रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन सही लाभार्थियों तक पूरी तरह पहुँचे।' उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ओडिशा विजिलेंस को और अधिक कुशल व मजबूत बनाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।
तीन-सूत्रीय रणनीति
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए तीन रणनीतियाँ अपनाई हैं — पहली, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति; दूसरी, अधिकारी के पद या कार्यकाल की परवाह किए बिना खुफिया जानकारी के आधार पर कानूनी कार्रवाई; और तीसरी, दोषी पाए गए अधिकारियों को कठोर दंड दिलाना। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि सतर्कता विभाग इन रणनीतियों को निडरता और पेशेवर तरीके से लागू कर रहा है।
ढाई वर्षों में कार्रवाई का ब्यौरा
माझी ने जानकारी दी कि पिछले ढाई वर्षों में ओडिशा विजिलेंस ने एक IAS अधिकारी, मुख्य अभियंता रैंक के आठ अधिकारियों, दो प्रभागीय वन अधिकारियों (DFO), आबकारी एवं राज्य परिवहन प्राधिकरण के संयुक्त आयुक्तों, खान विभाग के तीन उप-निदेशकों, पाँच तहसीलदारों और चार ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) सहित कई अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की है। इसी अवधि में 41 सरकारी कर्मचारियों को दोषसिद्धि के बाद सेवा से बर्खास्त किया गया है और 91 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन रोकी गई है।
दोषसिद्धि दर के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है — 2025 में यह दर 50 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है।
तकनीक और JAM प्रणाली की भूमिका
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की JAM (जन धन, आधार, मोबाइल) प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस तकनीकी ढाँचे ने सरकारी धन की लीकेज और दुरुपयोग को प्रभावी ढंग से रोका है और यह गरीबों के लिए वरदान साबित हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने ओडिशा IT नीति को मंजूरी दी है और ओडिशा विजिलेंस के भीतर एक प्रिवेंटिव विजिलेंस रिसर्च विंग (निवारक सतर्कता अनुसंधान शाखा) स्थापित की जा रही है, जो भ्रष्टाचार की आशंका वाले क्षेत्रों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करेगी।
जन शिकायत निवारण और आगे की राह
माझी ने जन शिकायत निवारण कार्यक्रम को भ्रष्टाचार रोकने की एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जिसके माध्यम से आम लोग सीधे मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक भ्रष्टाचार की शिकायत पहुँचा सकते हैं। इस वर्ष की थीम — 'समृद्धि के लिए ईमानदारी' — का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकारी कर्मचारियों से ईमानदारी और समर्पण का परिचय देने का आग्रह किया। बढ़ती दोषसिद्धि दर और संस्थागत सुधारों के साथ, ओडिशा सरकार का अगला कदम इस विजिलेंस ढाँचे को जिला और पंचायत स्तर तक और अधिक मजबूत करना होगा।