उड़िया सिनेमा के पुनरुद्धार के लिए ओडिशा सरकार लाएगी नई फिल्म नीति, फिल्म प्रशिक्षण संस्थान भी होगा स्थापित

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उड़िया सिनेमा के पुनरुद्धार के लिए ओडिशा सरकार लाएगी नई फिल्म नीति, फिल्म प्रशिक्षण संस्थान भी होगा स्थापित

सारांश

ओडिशा सरकार उड़िया सिनेमा को नई दिशा देने की तैयारी में है — एक समर्पित फिल्म नीति और फिल्म प्रशिक्षण संस्थान के साथ। मुख्यमंत्री मांझी का संदेश साफ है: नकल नहीं, अपनी जड़ों से उगी कहानियाँ। 2036 के शताब्दी वर्ष तक ओड़िया सिनेमा को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का लक्ष्य।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने 15 मई को उड़िया फिल्म उद्योग के लिए समर्पित फिल्म नीति लाने की घोषणा की।
भुवनेश्वर के संस्कृति भवन में आयोजित संवाद में अभिनेता, निर्माता और तकनीशियन शामिल हुए।
ओडिशा में एक फिल्म प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना भी घोषित की गई।
सरकार ने आश्वस्त किया कि वित्तीय बाधाएँ उद्योग के विकास में रुकावट नहीं बनेंगी।
मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने कहा कि 2036 के शताब्दी वर्ष समारोहों में फिल्म उद्योग केंद्रीय भूमिका निभाएगा।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने शुक्रवार, 15 मई को घोषणा की कि राज्य सरकार शीघ्र ही उड़िया फिल्म उद्योग को पुनर्जीवित करने और सुदृढ़ बनाने के लिए एक समर्पित फिल्म नीति लागू करेगी। साथ ही, ओडिशा में एक फिल्म प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की भी योजना सामने रखी गई है। यह घोषणा भुवनेश्वर के संस्कृति भवन में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान की गई।

संवाद कार्यक्रम में क्या हुआ

इस संवाद में मुख्यमंत्री मांझी ने उड़िया फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियों — अभिनेताओं, निर्माताओं और तकनीशियनों — के साथ ओड़िया सिनेमा की वर्तमान स्थिति और उसके भविष्य पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम में अनुभव मोहंती, अनु चौधरी, पुष्पा पांडा, हरिहर महापात्रा, पिंकी प्रधान और निर्माता सिद्धार्थ अग्रवाल सहित कई प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहीं। अभिनेता से विधायक बने आकाश दास नायक, अभिनेता एवं विधायक सिद्धांत महापात्रा, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और सांस्कृतिक हस्तियाँ भी इस अवसर पर मौजूद थीं।

मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण: संस्कृति और पहचान

उड़िया सिनेमा को राज्य की पहचान का अभिन्न अंग बताते हुए मुख्यमंत्री मांझी ने कहा, 'महान सिनेमा का निर्माण करने वाला समाज विश्व के समक्ष अपनी पहचान को मजबूती से स्थापित कर सकता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह समाज की संस्कृति, भावनाओं, स्मृतियों और सामूहिक चेतना का दर्पण है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि उड़िया सिनेमा को अन्य क्षेत्रीय उद्योगों की नकल करने के बजाय ओडिशा की अपनी सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से जुड़ी संस्कृति, ओडिशा का समुद्री इतिहास, आदिवासी परंपराएँ, चक्रवात और बाढ़ के दौरान लोगों का संघर्ष, ग्रामीण जीवन तथा महानदी एवं अन्य नदियों की नदी-संस्कृति जैसे विषयों को ओड़िया सिनेमा के लिए समृद्ध कहानी-सूत्रों के रूप में रेखांकित किया।

सरकारी प्रतिबद्धता और अवसंरचना

पिछली सरकारों पर फिल्म क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मांझी ने कहा कि वर्तमान सरकार ओड़िया पहचान और संस्कृति के संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वित्तीय बाधाएँ उड़िया फिल्म उद्योग के विकास में रोड़ा नहीं बनेंगी और राज्य में मजबूत फिल्म अवसंरचना का निर्माण किया जाएगा। फिल्म निर्माण में पेशेवर कौशल विकास के लिए एक फिल्म प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

2036 शताब्दी वर्ष और उद्योग की भूमिका

उड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने कहा कि 2036 में ओडिशा के शताब्दी वर्ष के समारोहों में राज्य का फिल्म उद्योग एक महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका निभाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब ओड़िया सिनेमा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए संघर्षरत है और दक्षिण भारतीय क्षेत्रीय उद्योगों की सफलता से प्रेरणा ले रहा है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री मांझी ने कलाकारों और फिल्मकर्मियों के साथ उद्योग की चुनौतियों पर सीधे संवाद किया और दीर्घकालिक समाधान एवं सरकारी सहायता का आश्वासन दिया। नई फिल्म नीति की रूपरेखा और फिल्म प्रशिक्षण संस्थान की विस्तृत योजना आने वाले समय में सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तमिल और मलयालम सिनेमा की सफलता से उपजी उस व्यापक होड़ का हिस्सा है जिसमें छोटे राज्य अपने क्षेत्रीय सिनेमा को सांस्कृतिक कूटनीति के औज़ार के रूप में देख रहे हैं। लेकिन नीति की घोषणा और उसके क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर गहरी होती है — पिछले दशक में कई राज्यों ने ऐसी नीतियाँ बनाईं जो कागज़ों तक सिमट गईं। असली परीक्षा यह होगी कि नई फिल्म नीति में सब्सिडी का ढाँचा, वितरण की बाधाएँ और OTT पर ओड़िया कंटेंट की पहुँच जैसे व्यावहारिक मुद्दों को कितनी गंभीरता से संबोधित किया जाता है। फिल्म प्रशिक्षण संस्थान एक सकारात्मक कदम है, पर इसकी सफलता तभी होगी जब उद्योग को टैलेंट के साथ-साथ बाज़ार भी मिले।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा की नई फिल्म नीति क्या है?
यह एक प्रस्तावित सरकारी नीति है जिसे उड़िया फिल्म उद्योग को पुनर्जीवित और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लाया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने 15 मई को भुवनेश्वर में इसकी घोषणा की, हालाँकि नीति की विस्तृत रूपरेखा अभी सामने नहीं आई है।
ओडिशा में फिल्म प्रशिक्षण संस्थान कब स्थापित होगा?
मुख्यमंत्री मांझी ने फिल्म प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना की घोषणा की है, लेकिन इसकी स्थापना की तिथि या स्थान का अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। यह संस्थान फिल्म निर्माण में पेशेवर कौशल विकास के लिए होगा।
उड़िया सिनेमा के लिए किन विषयों पर फिल्म बनाने की सलाह दी गई?
मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ की संस्कृति, ओडिशा का समुद्री इतिहास, आदिवासी परंपराएँ, चक्रवात-बाढ़ में लोगों का संघर्ष, ग्रामीण जीवन और महानदी की नदी-संस्कृति जैसे विषयों को ओड़िया सिनेमा के लिए समृद्ध कहानी-सूत्रों के रूप में सुझाया।
2036 के शताब्दी वर्ष से उड़िया फिल्म उद्योग का क्या संबंध है?
उड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने कहा कि 2036 में ओडिशा के शताब्दी वर्ष समारोहों में राज्य का फिल्म उद्योग महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका निभाएगा, जिससे यह नीति उस दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा बन जाती है।
संवाद कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए?
भुवनेश्वर के संस्कृति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में अनुभव मोहंती, अनु चौधरी, पुष्पा पांडा, हरिहर महापात्रा, पिंकी प्रधान, निर्माता सिद्धार्थ अग्रवाल, विधायक आकाश दास नायक, विधायक सिद्धांत महापात्रा सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और सांस्कृतिक हस्तियाँ उपस्थित थीं।
राष्ट्र प्रेस
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