ओडिशा: फूड पॉइजनिंग से 13 वर्षीय स्वाधीन की मौत, केंद्रपाड़ा के कुकुनी गांव में परिवार के 5 सदस्य बीमार

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ओडिशा: फूड पॉइजनिंग से 13 वर्षीय स्वाधीन की मौत, केंद्रपाड़ा के कुकुनी गांव में परिवार के 5 सदस्य बीमार

सारांश

ओडिशा के केंद्रपाड़ा के कुकुनी गांव में एक परिवार के पाँच सदस्य तरबूज, आम और नारियल खाने के बाद बीमार पड़े — लेकिन डॉक्टरों का कहना है असली कारण दूषित भोजन हो सकता है। 13 वर्षीय स्वाधीन सेनापति की कटक में मौत हो गई। गर्मियों में फूड पॉइजनिंग का यह मामला ग्रामीण भंडारण सुरक्षा पर सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के कुकुनी गांव में पंचानन सेनापति के परिवार के 5 सदस्य गंभीर रूप से बीमार पड़े।
13 वर्षीय स्वाधीन सेनापति की कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
परिवार ने पिछले दो दिनों में तरबूज, पके आम और कच्चा नारियल खाया था; गुरुवार रात से लक्षण शुरू हुए।
अंबिका प्रसाद नायक के अनुसार, यह फूड पॉइजनिंग का मामला है — दूषित या बासी भोजन संभावित कारण, फल नहीं।
तीन सदस्यों का इलाज केंद्रपाड़ा अस्पताल में जारी, हालत स्थिर; एक अन्य सदस्य कटक में भर्ती।

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के कुकुनी गांव में एक परिवार के पाँच सदस्य तरबूज, पके आम और नारियल खाने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, और इलाज के दौरान 13 वर्षीय स्वाधीन सेनापति की मृत्यु हो गई। यह घटना 16 मई की सुबह सामने आई, जब परिवार को गंभीर उल्टी, दस्त और पेट दर्द के बाद अस्पताल पहुँचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला फलों से नहीं बल्कि दूषित या बासी भोजन से उत्पन्न फूड पॉइजनिंग का प्रतीत होता है।

घटनाक्रम: कैसे बिगड़ी तबीयत

परिवार की सदस्य चारुलता सेनापति ने बताया कि गुरुवार रात तरबूज खाने के बाद लक्षण शुरू हुए। उन्होंने कहा, 'बच्चे ट्यूशन से लौटे और जल्द ही उन्हें उल्टी होने लगी। उन्हें चक्कर आना, पेट में ऐंठन और दस्त की भी शिकायत हुई।' परिवार ने पहले स्थानीय फार्मेसी से दवाइयाँ लीं, लेकिन हालत में सुधार न होने पर शुक्रवार सुबह अस्पताल का रुख किया।

परिवार के मुखिया पंचानन सेनापति ने बताया कि पिछले दो दिनों में परिवार ने तरबूज, पके आम और कच्चा नारियल खाया था। उन्होंने कहा, 'फल खाने के बाद हमें तेज बुखार, सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी महसूस हुई।'

अस्पताल में भर्ती और रेफरल

पाँचों बीमार सदस्यों को केंद्रपाड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर हालत के कारण स्वाधीन सेनापति और परिवार के एक अन्य सदस्य को कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहाँ स्वाधीन की मृत्यु हो गई। शेष तीन सदस्यों — दो वयस्क और एक 17 वर्षीय लड़की — का इलाज केंद्रपाड़ा अस्पताल में जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

डॉक्टरों की राय: फल नहीं, दूषित भोजन संभावित कारण

केंद्रपाड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अंबिका प्रसाद नायक ने स्पष्ट किया कि यह बीमारी फलों के कारण नहीं, बल्कि दूषित या ठीक से न संग्रहित बासी भोजन के कारण होने की संभावना अधिक है। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर तरबूज खाने से ऐसे लक्षण नहीं होते। गर्मियों में ठीक से संग्रहित न किए गए पके भोजन के सेवन से इस तरह के संक्रमण हो सकते हैं। परिवार द्वारा खाए गए भोजन में कुछ मिलावट हो सकती है।'

मरीजों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसे फूड पॉइजनिंग के सामान्य लक्षण देखे गए। हालाँकि, मृत्यु का अंतिम कारण जाँच के बाद ही स्पष्ट होगा।

पृष्ठभूमि: गर्मियों में बढ़ता फूड पॉइजनिंग का खतरा

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ओडिशा सहित पूरे देश में भीषण गर्मी का दौर जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च तापमान में भोजन तेजी से खराब होता है और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में उचित भंडारण सुविधाओं के अभाव में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

आगे की जाँच

पट्टामुंडई ग्रामीण पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अधिकारियों को घटना की सूचना दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की जाँच और भोजन के नमूनों की जाँच किए जाने की संभावना है। स्वाधीन की मृत्यु के सटीक कारण की पुष्टि विस्तृत चिकित्सा जाँच के बाद ही हो सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि अस्पताल का — यह देरी जानलेवा साबित हुई। डॉक्टर स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि फल नहीं, दूषित भंडारण दोषी है, लेकिन मीडिया कवरेज फलों पर केंद्रित हो गई — जो एक भ्रामक आख्यान है। असली सवाल यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य जागरूकता और खाद्य भंडारण के बुनियादी ढाँचे की कमी को कब तक नज़रअंदाज़ किया जाएगा।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा के केंद्रपाड़ा में फूड पॉइजनिंग से किसकी मौत हुई?
कुकुनी गांव के पंचानन सेनापति के परिवार के 13 वर्षीय स्वाधीन सेनापति की मौत हुई, जिन्हें गंभीर हालत में कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। परिवार के अन्य चार सदस्य भी बीमार पड़े, जिनमें से तीन का इलाज केंद्रपाड़ा अस्पताल में चल रहा है।
क्या सच में तरबूज और आम खाने से यह बीमारी हुई?
डॉक्टरों के अनुसार, नहीं। केंद्रपाड़ा अस्पताल के डॉ. अंबिका प्रसाद नायक ने स्पष्ट किया कि यह फूड पॉइजनिंग का मामला है और संभावित कारण दूषित या ठीक से न संग्रहित बासी भोजन है। गर्मियों में उच्च तापमान में भोजन तेजी से खराब हो जाता है, जिससे बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
परिवार के कितने सदस्य अभी भी अस्पताल में हैं?
परिवार के पाँच में से चार सदस्य अस्पताल में हैं — दो वयस्क और एक 17 वर्षीय लड़की का इलाज केंद्रपाड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि एक अन्य सदस्य कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण कब और कैसे शुरू हुए?
परिवार के अनुसार, गुरुवार रात तरबूज खाने के बाद लक्षण शुरू हुए। बच्चे ट्यूशन से लौटे और जल्द ही उन्हें उल्टी, चक्कर, पेट में ऐंठन और दस्त होने लगे। परिवार ने पहले स्थानीय फार्मेसी से दवाइयाँ लीं, लेकिन हालत में सुधार न होने पर शुक्रवार सुबह अस्पताल पहुँचे।
इस मामले में आगे क्या जाँच होगी?
पट्टामुंडई ग्रामीण पुलिस स्टेशन को घटना की सूचना दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भोजन के नमूनों की जाँच और मृत्यु के सटीक कारण की पुष्टि के लिए चिकित्सा जाँच किए जाने की संभावना है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी या आधिकारिक जाँच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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