मयूरभंज आश्रम स्कूल में आदिवासी छात्रा की मौत: NCST ने ओडिशा सरकार से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- 12 अप्रैल को मयूरभंज के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में भोजन के बाद सैकड़ों छात्र बीमार पड़े।
- 5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा की 14 अप्रैल को पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज, बारीपदा के ICU में मृत्यु हुई।
- NCST ने 27 अप्रैल को ओडिशा सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी कर 7 दिनों में ATR माँगी।
- ओडिशा सरकार ने स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित किया और परिवार को ₹7 लाख की सहायता घोषित की।
- NHRC ने भी स्वतः संज्ञान लेकर रिपोर्ट माँगी; राजस्व संभागीय आयुक्त स्तर की जांच जारी।
- BJD नेता प्रियब्रत माझी की याचिका पर NCST ने अनुच्छेद 338ए के तहत जांच का निर्णय लिया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने 27 अप्रैल 2026 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में हुई आदिवासी छात्रा की मौत और सैकड़ों छात्रों के सामूहिक रूप से बीमार पड़ने के मामले में राज्य सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है। आयोग ने अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त-सह-सचिव, मयूरभंज के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से नोटिस प्राप्ति के सात दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी
12 अप्रैल को मयूरभंज जिले के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में स्कूल का भोजन खाने के बाद सैकड़ों छात्र अचानक बीमार पड़ गए। संदेह है कि खाने में कुछ गड़बड़ी थी, जिसके कारण यह सामूहिक बीमारी फैली। बीमार पड़ने वाले छात्रों में 5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा की हालत सबसे गंभीर थी, जिसे बारीपदा के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराया गया। 14 अप्रैल को इलाज के दौरान ही रूपाली की मृत्यु हो गई।
NCST की जांच और नोटिस
आयोग ने 15 अप्रैल को बीजू जनता दल (BJD) के नेता प्रियब्रत माझी और अन्य द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले की विधिवत जांच का निर्णय लिया। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित अधिकारी निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करते, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया जा सकता है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है।
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
घटना के बाद ओडिशा सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया और मृत छात्रा रूपाली बेसरा के परिवार को ₹7 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मामले की जांच के लिए राजस्व संभागीय आयुक्त स्तर की एक जांच समिति गठित की गई है, जो फिलहाल अपनी जांच जारी रखे हुए है।
विपक्ष का आरोप और राजनीतिक विवाद
विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने सोमवार को आरोप लगाया कि सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों को तुरंत जवाब देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो सकी। पार्टी ने आश्रम स्कूलों में खाद्य सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी की माँग की है।
आदिवासी छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना आदिवासी बच्चों के लिए संचालित आश्रम स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। यह ऐसे समय में आई है जब देशभर में अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। NCST और NHRC दोनों के हस्तक्षेप से उम्मीद है कि जांच में तेजी आएगी और आश्रम स्कूलों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।