ओडिशा विजिलेंस का बड़ा एक्शन: इंजीनियर प्रसनजीत दास के ठिकानों से ₹21.88 लाख कैश जब्त, रिश्वत की जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विजिलेंस ने 17 अक्टूबर 2026 को कटक जिले के जगतपुर में तैनात महानदी नॉर्दर्न डिवीजन के अधीक्षण अभियंता प्रसनजीत दास के विभिन्न ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए कुल ₹21,88,620 की नकदी बरामद की। दास पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों से कथित तौर पर रिश्वत वसूली। यह मामला 16 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।
कैसे हुई गिरफ्तारी और तलाशी
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, दास को ट्रैक करना आसान नहीं था — वह बार-बार अपनी लोकेशन और गाड़ियाँ बदल रहा था। टीम ने मोबाइल ट्रैकिंग का सहारा लेकर उसे पहले भुवनेश्वर के डेल्टा स्क्वायर के पास और फिर डेल्टा सिंचाई निरीक्षण बंगले में चिह्नित किया, जहाँ वह एक कार्यक्रम में मौजूद था।
सादे कपड़ों में दो विजिलेंस अधिकारियों ने बंगले के भीतर जाकर उसकी पहचान सुनिश्चित की। कुछ देर बाद जब दास अपनी सरकारी बोलेरो में बैठकर एक अन्य ठेकेदार से मिलने निकला, तो एजी स्क्वायर के पास उसे रोका गया। तलाशी में गाड़ी से ₹7,28,620 नकद मिले, जिनके बारे में अधिकारियों को संदेह है कि ये अवैध आय के हिस्से हैं।
एक साथ कई ठिकानों पर छापे
दास को हिरासत में लेने के समानांतर, एक अलग टीम ने भुवनेश्वर के घटिकिया स्थित आवासीय परिसर 'ट्राइडेंट गैलेक्सी' में उसके किराए के फ्लैट को निगरानी में ले लिया। फ्लैट की तलाशी में ₹14,60,000 अतिरिक्त नकदी बरामद हुई। इसके अलावा बारागडा स्थित उसके पैतृक घर की भी तलाशी ली गई। इन सभी स्थानों से मिली राशि को जोड़कर कुल बरामदगी ₹21,88,620 हो गई।
रिश्वत का आरोप और जाँच की शुरुआत
विजिलेंस को सूचना मिली थी कि दास ने जगतपुर सिंचाई निरीक्षण बंगले में ठेकेदारों से कथित तौर पर रिश्वत ली। इसी सूचना के आधार पर यह पूरी कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद दास इस बड़ी नकदी के स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ओडिशा में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की बढ़ती सक्रियता का हिस्सा है। सिंचाई और जल संसाधन विभागों में ठेकेदारों के साथ भ्रष्टाचार के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
क्या होगा आगे
फिलहाल प्रसनजीत दास पूछताछ के लिए विजिलेंस की हिरासत में हैं। जाँचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बरामद नकदी का असली स्रोत क्या है और किन-किन ठेकेदारों से रिश्वत ली गई। 16 अक्टूबर 2026 को दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।